खाना नहीं खाया, रात भर सो नहीं सके: ''ब्लू ड्रम'' मामले मुस्कान और साहिल को मिली मौत की सजा... कोर्ट में ऐसा था पहला रिएक्शन
punjabkesari.in Friday, Oct 16, 2026 - 07:57 AM (IST)
मेरठ: मेरठ के चर्चित 'ब्लू ड्रम केस' में मौत की सजा पाने वाले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने फैसला आने के बाद मेरठ जिला जेल में रात बेचैनी में बिताई और रात का खाना भी नहीं खाया। मुस्कान और साहिल ने पिछले साल मार्च में मुस्कान के पति और मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या कर दी थी और उनके शव को सीमेंट से भरे एक ड्रम में छिपा दिया था।
न तो नाश्ता किया और न ही रात का खाना खाया
जेल प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, बुधवार को सजा सुनाए जाने से पहले भी वे काफी परेशान थे। जिला अदालत का फैसला आने के बाद उनकी चिंताएं और बढ़ गई हैं। खासकर मुस्कान को अपनी 10 महीने की बेटी, राधा के भविष्य और उसकी देखभाल की बहुत चिंता है। जेल प्रशासन के मुताबिक, मौत की सजा मिलने के बाद से मुस्कान और साहिल मानसिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने सजा सुनाए जाने से पहले और बाद में, न तो नाश्ता किया और न ही रात का खाना खाया। मौत की सजा सुनकर मुस्कान की पहली प्रतिक्रिया थी - "अरे!", जो हैरानी या अविश्वास को दर्शाती है। बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किए गए इन दोषियों को अलग-अलग बैरकों में रखा गया है। मुस्कान को बैरक नंबर 12B में रखा गया है, जबकि साहिल बैरक नंबर 15 में है।
जेल के कपड़े और काम का बंटवारा
मौत की सजा मिलने के बाद, मुस्कान और साहिल को जेल के कपड़े दिए गए हैं, जिन्हें उन्हें जेल में रहने के दौरान पहनना होगा। साहिल को सफेद कुर्ते-पायजामे के दो जोड़े दिए गए हैं, जबकि मुस्कान को एक सफेद साड़ी और क्रीम रंग का सूट दिया गया है। जेल की दिनचर्या के तहत उन्हें काम भी सौंपा गया है। मुस्कान सिलाई का काम करेंगी, जबकि साहिल को खेती-बाड़ी का काम दिया गया है। अब जेल से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए इन दोषियों की पहचान उनके कैदी नंबर से होगी। साहिल को 395/2026 नंबर दिया गया है, जबकि मुस्कान का नंबर 396/2026 है।
क्या था 'ब्लू ड्रम' मामला?
3 मार्च, 2025 को सौरभ की हत्या करने, उसके शव के टुकड़े करने और मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में सीमेंट से भरे एक नीले ड्रम में अवशेष छिपाने के आरोप में 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया गया था। यह अपराध लगभग दो हफ्ते बाद तब सामने आया, जब दंपति के घर से शव के अवशेष बरामद हुए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुस्कान और साहिल ने अपने रिश्ते के दौरान सौरभ की हत्या की साजिश रची थी और वे उसे अपनी जिंदगी से हटाना चाहते थे। मौत की सजा सुनाने की सुनवाई के दौरान, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि दंड देना भी धर्म का ही एक रूप है। 13 महीने तक चले मुकदमे और 126 सुनवाइयों के बाद न्यायाधीश ने यह सजा सुनाई।
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