होटल-रेस्टुरेंट्स से लेकर अंतिम संस्कार तक… मिडिल ईस्ट जंग के भारत पर पड़े ये 5 बड़े असर
punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 09:39 PM (IST)
नेशनल डेस्क : पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव को करीब दो सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। न तो Iran की तरफ से पीछे हटने के संकेत मिल रहे हैं और न ही United States और Israel के रुख में कोई नरमी दिख रही है। इस बढ़ते संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें हाल ही में 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं और फिलहाल भी 100 डॉलर के पार बनी हुई हैं।
इस स्थिति का प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की दैनिक जिंदगी पर भी महसूस किया जा रहा है। आइए जानते हैं कि यह संकट भारत को किन-किन तरीकों से प्रभावित कर रहा है।
1- गैस सप्लाई पर दबाव
संघर्ष के चलते ऊर्जा आपूर्ति की वैश्विक श्रृंखला प्रभावित हुई है। खासकर Strait of Hormuz में गतिविधियां बाधित होने से तेल और गैस के परिवहन पर असर पड़ा है। चूंकि India अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए इस संकट का प्रभाव देश में भी महसूस किया जा रहा है। गैस की कमी से कई उद्योग प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें उर्वरक संयंत्र, टाइल्स निर्माण इकाइयां और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर शामिल हैं। National Restaurant Association of India ने अपने सदस्यों को सलाह दी है कि वे जरूरत पड़ने पर सीमित मेन्यू रखें, बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाएं और काम के घंटों में कटौती करें।
2- श्मशानों में बदली व्यवस्था
एलपीजी की सीमित उपलब्धता का असर अंतिम संस्कार सेवाओं तक पहुंच गया है। कई शहरों में गैस से चलने वाली श्मशान भट्टियों का संचालन प्रभावित हुआ है। ऐसी स्थिति में कई स्थानों पर पारंपरिक लकड़ी से अंतिम संस्कार की व्यवस्था अपनाई जा रही है।
3- विमान यात्रा हुई महंगी
तेल की कीमतों में उछाल का असर विमानन उद्योग पर भी पड़ा है। जेट ईंधन महंगा होने से एयरलाइंस की लागत बढ़ गई है। इसके अलावा मध्य पूर्व से गुजरने वाली उड़ानों के लिए बीमा प्रीमियम भी बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक युद्ध के कारण दुनिया भर में करीब 46 हजार उड़ानें रद्द हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय हवाई किराया भी काफी बढ़ गया है।
4- सोने की कीमतों पर दबाव
सामान्य तौर पर वैश्विक तनाव के समय निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे उसकी कीमत बढ़ती है। लेकिन इस बार महंगे तेल के कारण बढ़ती महंगाई की आशंका ने बाजार की दिशा बदल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत डॉलर और ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। निवेश बैंक Goldman Sachs का अनुमान है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve की ओर से ब्याज दरों में कटौती सितंबर से पहले मुश्किल हो सकती है।
5- आर्थिक विकास पर असर की चिंता
भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए ऊंची आर्थिक वृद्धि दर जरूरी मानी जाती है। लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो इसका असर आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।
