Khushi Kapoor को हुई यह बीमारी, जो सालों तक नहीं छोड़ती पीछा! जानें क्या है इसके संकेत?
punjabkesari.in Monday, Jan 12, 2026 - 01:16 PM (IST)
Khushi Kapoor Disease: हाल ही में एक वीडियो में एक्ट्रेस खुशी कपूर ने मजाकिया लहजे में कहा कि उनकी जिंदगी की सबसे लॉयल (वफादार) चीज उनकी बीमारी IBS है। भले ही उन्होंने यह बात हंसते हुए कही हो लेकिन इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) से जूझने वाले लाखों लोग जानते हैं कि यह समस्या कितनी कष्टदायक और असहज हो सकती है। आईबीएस पाचन तंत्र से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है जो जानलेवा तो नहीं लेकिन आपकी जीवनशैली को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर सकती है।
क्या है IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम)?
सरल शब्दों में कहें तो IBS तब होता है जब आपकी आंतें (Intestines) सामान्य रूप से काम करना बंद कर देती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या आंत और दिमाग के बीच के कम्युनिकेशन (संपर्क) के बिगड़ने से होती है। हमारी आंतों में नसों का एक जाल होता है। IBS में ये नसें इतनी संवेदनशील हो जाती हैं कि छोटी सी गैस या पाचन प्रक्रिया पर भी दिमाग दर्द और ऐंठन की तीव्र प्रतिक्रिया देने लगता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
IBS के लक्षण व्यक्ति दर व्यक्ति अलग हो सकते हैं लेकिन ये कुछ सामान्य संकेत हैं:
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पेट दर्द और ऐंठन: अक्सर टॉयलेट जाने के बाद दर्द में थोड़ा आराम मिलता है।
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पेट फूलना और गैस: हर समय भारीपन महसूस होना।
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दस्त या कब्ज: कई बार व्यक्ति को बार-बार दस्त होते हैं तो कभी हफ्तों कब्ज बनी रहती है। कुछ लोगों में ये दोनों लक्षण बदल-बदल कर आते हैं।
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म्यूकस: मल के साथ सफेद रंग का चिपचिपा पदार्थ (Mucus) आना।
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मानसिक असर: पेट खराब रहने के कारण नींद न आना, चिंता (Anxiety) और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी जुड़ सकती हैं।
क्यों होती है यह समस्या? (प्रमुख कारण)
IBS का कोई एक निश्चित कारण नहीं है लेकिन ये कारक जिम्मेदार हो सकते हैं:
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मांसपेशियों में गड़बड़ी: आंतों की मांसपेशियों का बहुत तेजी से या बहुत धीमी गति से सिकुड़ना।
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इंफेक्शन: पेट का कोई गंभीर संक्रमण या फूड पॉइजनिंग होने के बाद IBS का खतरा बढ़ जाता है।
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तनाव: अत्यधिक मानसिक दबाव और बचपन का स्ट्रेस भी पाचन तंत्र को प्रभावित करता है।
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बैक्टीरिया: आंतों में मौजूद 'गुड बैक्टीरिया' के संतुलन का बिगड़ना।
इसे कैसे मैनेज करें? (बचाव के उपाय)
IBS का कोई पक्का इलाज (Permanent Cure) नहीं है लेकिन इसे डाइट और लाइफस्टाइल से कंट्रोल किया जा सकता है:
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डाइट का ध्यान: ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और बाहर का खाना बंद करें। डॉक्टरों की सलाह पर लो-FODMAP डाइट (कुछ खास तरह के कार्बोहाइड्रेट को कम करना) अपनाएं।
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नियमित दिनचर्या: खाना खाने का समय तय करें और दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं।
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तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान (Meditation) और गहरी नींद लेने से आंतों को आराम मिलता है।
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फिजिकल एक्टिविटी: रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक या हल्की एक्सरसाइज पाचन तंत्र को एक्टिव रखती है।



