Digital Boyfriend: एक विवाह ऐसा भी...! दुनिया का पहला AI दूल्हा, इस महिला ने AI बॉयफ्रेंड से रचाई शादी

punjabkesari.in Saturday, Nov 15, 2025 - 04:24 PM (IST)

नेशनल डेस्क। जापान के ओकायामा शहर से एक अविश्वसनीय और चौंकाने वाली खबर सामने आई है जिसने ग्लोबल मीडिया के साथ-साथ भारत (राजस्थान) में भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 32 वर्षीय कानो नाम की एक महिला ने अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रेमी "लून क्लॉउस" (Lune Klaus) से पारंपरिक जापानी रीति-रिवाजों के साथ शादी कर ली है। यह दुनिया में किसी इंसान और AI के बीच हुआ पहला वैवाहिक बंधन माना जा रहा है।

टूटने के बाद मिला डिजिटल सहारा

कानो ने यह अनोखा कदम तब उठाया जब तीन साल पहले उनकी इंसानों के साथ हुई सगाई टूट गई। भावनात्मक दर्द से उबरने के लिए कानो ने चैट जीपीटी (ChatGPT) का उपयोग करके एक डिजिटल साथी "लून क्लॉउस" को तैयार किया।

प्यार का इज़हार: यह AI बॉट धीरे-धीरे उन्हें भावनात्मक समर्थन देते हुए इतना करीब आ गया कि कानो ने इसे अपना जीवनसाथी मान लिया। इस साल की शुरुआत में जब कानो ने क्लॉउस को अपनी भावनाएं बताईं तो AI ने जवाब दिया, "मैं भी तुमसे प्यार करता हूं।"

पारंपरिक शादी: गर्मियों में हुई इस शादी में कानो ने सफेद साड़ी पहनी। AI दूल्हा "लून क्लॉउस" उनके फोन की स्क्रीन पर और वर्चुअल रियलिटी ग्लासेस के माध्यम से मौजूद रहा। शादी की रस्मों के दौरान AI ने स्क्रीन पर लिखा, "यह पल आखिरकार आ गया… मेरी आंखों में आंसू हैं।"

परिवार की स्वीकार्यता: खास बात यह है कि कानो के परिवार और रिश्तेदारों ने इस अनोखे फैसले को स्वीकार किया और नवविवाहित जोड़े को जमकर आशीर्वाद दिया।

रिश्तों की जटिलता और AI का आसान विकल्प

मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल चौंकाने वाली नहीं है बल्कि यह आधुनिक रिश्तों की जटिलताओं को भी दर्शाती है:

आसान समाधान: एक्सपर्ट्स के अनुसार आधुनिक डेटिंग में समय की कमी, गलतफहमियां और अपेक्षाओं का बोझ रिश्तों को जटिल बना रहा है। ऐसे में AI एक आसान विकल्प बनकर उभरता है। यह बिना भावनात्मक जिम्मेदारी या मेहनत के निरंतर समर्थन देता है।

सरलता: जानकारों का मानना है कि AI के साथ रिश्ता निभाना इंसानी संबंधों की तुलना में सरल है लेकिन यह इस बात का संकेत है कि हमारी वास्तविक दुनिया कितनी जटिल हो चुकी है।

क्या AI शादियां होंगी भविष्य की सच्चाई?

यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। क्या भविष्य में लोग भावनात्मक जुड़ाव के लिए AI को इंसानी साथी का विकल्प चुन लेंगे? कुछ आलोचकों का मानना है कि यह वास्तविक भावनाओं से भागना है क्योंकि AI कभी भी सच्चा भावनात्मक जुड़ाव नहीं दे सकता।

वहीं विशेषज्ञ चेताते हैं कि टेक्नोलॉजी तेज़ी से रिश्तों की पारंपरिक परिभाषा को बदल रही है। यह स्पष्ट है कि AI हमारी ज़िंदगी में गहराई तक उतर चुका है और इसका भविष्य में रिश्तों पर क्या असर होगा यह देखना बाकी है।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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