'राजा बेटा उठ जा… देख पापा आए हैं' - मां की बाहों में आखिरी सांस, बेटे को देख टूट गया बेबस पिता, हर दिल को किया घायल
punjabkesari.in Saturday, May 02, 2026 - 01:16 PM (IST)
Jabalpur cruise accident: जबलपुर के बरगी डैम में हुआ एक दर्दनाक क्रूज हादसा कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द छोड़ गया। दिल्ली से घूमने आए मेसी परिवार की खुशियां उस शाम अचानक मातम में बदल गईं, जब नर्मदा की लहरों पर चल रहा क्रूज तेज तूफानी हवाओं की चपेट में आकर पलट गया। पूरा देश उस समय रो उठा जब एक मां का शव उसके बच्चे के साथ लिपटा मिला।
परिवार के सदस्य प्रदीप मेसी, उनकी पत्नी मरीना और उनका 4 साल का बेटा त्रिशान इस सफर का आनंद ले रहे थे। अचानक मौसम बिगड़ गया और तेज हवाएं चलने लगीं। क्रूज स्टाफ ने यात्रियों को नीचे जाने और खिड़कियां बंद रखने को कहा, लेकिन कुछ ही पलों में स्थिति बेकाबू हो गई और जहाज डूब गया।
बताया जाता है कि तेज लहरों के कारण क्रूज की खिड़कियां टूट गईं और पानी तेजी से अंदर भरने लगा। कुछ ही समय में पूरा जहाज पलट गया। चारों तरफ अफरा-तफरी, चीख-पुकार और अंधेरा फैल गया।
इस भयावह स्थिति में सबसे दिल दहला देने वाला दृश्य तब सामने आया जब मरीना ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने बेटे त्रिशान को सीने से लगा लिया। उन्होंने लाइफ जैकेट के भीतर उसे मजबूती से पकड़ लिया और पानी के तेज बहाव के बीच भी उसकी सुरक्षा के लिए खुद को ढाल बना लिया। बताया जाता है कि उन्होंने आखिरी सांस तक अपनी पकड़ नहीं छोड़ी।
pic.twitter.com/1yaiFLp91I Tragedy in Jabalpur: Cruise boat capsizes at Bargi Dam due to sudden storm.
— Sourabh (@vellasrv) May 1, 2026
Death toll rises to 9.
A mother was found still holding her child in a tight embrace inside the submerged boat.
Rescue operations ongoing.
Deepest condolences to the families.…
करीब 14 घंटे बाद जब रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, तो मलबे के भीतर से मां और बेटे के शव एक साथ मिले। दोनों इस तरह जुड़े हुए थे कि उन्हें अलग करना भी मुश्किल हो गया। यह दृश्य देखकर रेस्क्यू टीम और वहां मौजूद लोग भावुक हो गए।
दूसरी तरफ, अस्पताल में जब पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे गए, तो पिता प्रदीप मेसी का दर्द फूट पड़ा। वे अपने बेटे और पत्नी को देखकर बार-बार उन्हें जगाने की कोशिश करते रहे और बेसुध होकर रोते रहे। पत्नी मरीना और बेटे त्रिशान के चेहरे से कफन हटाते बाप-बेटी अपना सुध-बुध खो बैठे और पिता बार-बार अपने बेटे का ठंडा पड़ चुका हाथ थामते कहते रहे, राजा बेटा उठ जा… यूं चुप मत रह… देख पापा आए हैं, कुछ तो बोल बेटा।
बेबस प्रदीप कभी पत्नी को आवाज देते तो कभी बेटे को उठाने की कोशिश करते लेकिन सब कूछ खत्म हो चुका था। अस्पताल के गलियारे में गूंजती उनकी चीखें सिस्टम की लापरवाही और कुदरत की बेरुखी पर सबसे बड़ा सवालिया निशान थीं।
नकी हालत देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। इस हादसे को लेकर लोगों में नाराजगी भी सामने आ रही है। यात्रियों का कहना है कि क्रूज पर सुरक्षा इंतजाम ठीक नहीं थे, लाइफ जैकेट समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए और मौसम खराब होने के बावजूद यात्रा जारी रखी गई। कई लोगों ने ओवरलोडिंग और लापरवाही के आरोप भी लगाए हैं।
