ISRO ने लाई नई तकनीक! बारिश में बिजली कहां गिरेगी, पहले ही मिल जाएगा अलर्ट
punjabkesari.in Wednesday, Apr 02, 2025 - 03:06 PM (IST)

नेशनल डेस्क: हर साल मानसून के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में आकाशीय बिजली गिरने से जान-माल का भारी नुकसान होता है। लेकिन अब इस प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए इसरो (ISRO) ने एक नई तकनीक विकसित की है, जो बिजली गिरने से 2.5 घंटे पहले ही अलर्ट देगी। यह तकनीक लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने का समय देगी, जिससे जान-माल के नुकसान को रोका जा सकेगा।
कैसे काम करेगी ISRO की नई तकनीक?
ISRO द्वारा विकसित इस नई प्रणाली के तहत सैटेलाइट और ग्राउंड-आधारित सेंसर की मदद से वातावरण में मौजूद आयनोस्फेरिक बदलावों को ट्रैक किया जाएगा। इसके बाद कंप्यूटर आधारित एल्गोरिदम यह अनुमान लगाएगा कि किस क्षेत्र में बिजली गिरने की संभावना सबसे अधिक है। यह अलर्ट मौसम विज्ञान विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
किन इलाकों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
भारत में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हर साल बिजली गिरने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। ISRO की नई तकनीक इन राज्यों में बिजली गिरने की सटीक भविष्यवाणी करने में मदद करेगी। इससे खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों और आम लोगों को पहले से सतर्क किया जा सकेगा।
बिजली गिरने से हर साल होते हैं हजारों हादसे
आंकड़ों के मुताबिक, हर साल भारत में 2,500 से 3,000 लोगों की मौत बिजली गिरने से होती है। इसके अलावा, कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और फसलें भी नष्ट हो जाती हैं। खासतौर पर खेतों में काम करने वाले किसान इस खतरे से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। ISRO की नई तकनीक इन घटनाओं को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।
बिजली गिरने से बचाव के लिए क्या करें?
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बिजली चमकने या गरजने की आवाज सुनते ही तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
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खुले मैदान, खेतों, ऊंची इमारतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
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धातु से बनी चीजों जैसे छतरी, मोबाइल टावर और बिजली के खंभों से दूर रहें।
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यदि घर के अंदर हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद कर दें और खिड़कियों से दूर रहें।
सरकार और ISRO मिलकर कैसे करेंगे काम?
ISRO की यह तकनीक भारत सरकार के मौसम विभाग (IMD) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के साथ मिलकर काम करेगी। भविष्य में इस प्रणाली को और उन्नत बनाकर मोबाइल ऐप और एसएमएस अलर्ट के जरिए आम नागरिकों तक पहुंचाया जाएगा।