क्या गैर-डेयरी उत्पादों को ‘पनीर’ बताकर बेचना सही? हाईकोर्ट ने FSSAI से मांगा जवाब
punjabkesari.in Wednesday, Oct 14, 2026 - 06:56 PM (IST)
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने डेयरी एनालॉग/गैर-डेयरी उत्पादों को 'पनीर' के नाम पर बेचे जाने के आरोपों से संबंधित जनहित याचिका पर बुधवार को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत पनीर एक मानकीकृत डेयरी उत्पाद है, जबकि गैर-डेयरी एनालॉग उत्पाद में दूध के बजाय अन्य सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है और उसमें पोषक तत्व भी असली पनीर की तरह नहीं होते। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन डब्ल्यू. सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय सिंह की पीठ ने रिधिमा सिंह और अवलोकितेश्वर पद्मपाणि सिद्धार्थ की याचिका पर एफएसएसएआई, केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि होटल या रेस्तरां में पनीर से बना व्यंजन खाने वाले व्यक्ति के पास यह जानने का कोई तरीका नहीं होता कि वह व्यंजन असली पनीर से बनाया गया है या डेयरी एनालॉग से। 'डेयरी एनालॉग' ऐसा खाद्य उत्पाद होता है, जो दिखने, स्वाद या इस्तेमाल में दूध से बने किसी उत्पाद जैसा होता है, लेकिन उसे बनाने में दूध के कुछ या सभी घटकों की जगह दूसरे पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। याचिकाकर्ताओं ने त्योहारों के सीजन को देखते हुए अदालत से तत्काल निर्देश देने का अनुरोध किया। उन्होंने दलील दी कि अधिकारियों को बाजार में बिक रहे पनीर और पनीर के रूप में बेचे जा रहे अन्य उत्पादों के नमूने लेकर उनकी जांच करनी चाहिए।
पीठ ने कहा, ''वे ऐसा कर रहे हैं और इस संबंध में उन्होंने आंकड़े (हमारे समक्ष) प्रस्तुत किए हैं।'' याचिका में कहा गया कि गुजरात, पंजाब, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र गैर-डेयरी पनीर के खिलाफ पहले ही कदम उठा चुके हैं और अधिकारियों को राजधानी में डेयरी उत्पाद जैसे दिखने वाले पनीर के निर्माण, आपूर्ति, बिक्री या इस्तेमाल को रोकने के लिए निर्देश दिया जाए। याचिका में डेयरी एनालॉग पनीर के निर्माण, आपूर्ति, बिक्री व परोसने पर रोक लगाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिका में अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि होटल, रेस्तरां, खानपान प्रतिष्ठान और ई-कॉमर्स के जरिए खाद्य पदार्थ बेचने वाले व्यवसाय अपने व्यंजनों में एनालॉग या गैर-डेयरी विकल्पों के इस्तेमाल के बारे में स्पष्ट जानकारी दें।
