''भारत की अगली पीढ़ी को आज के मौकों को ''विकसित भारत 2047'' के लिए समाधानों में बदलना होगा'': नवीन जिंदल, सांसद और जिंदल स्टील चेयरमैन

punjabkesari.in Saturday, Oct 10, 2026 - 08:07 PM (IST)

चंडीगढ़ : भारत के भावी उद्यमियों के लिए फंडिंग के अवसर बढ़ाते हुए, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने 'कैंपस टैंक – इंडियाज़ नेक्स्ट यूनिकॉर्न' का दूसरा सीज़न लांच किया है। यह भारत का पहला यूनिवर्सिटी-लेड स्टार्टअप लॉन्चपैड है, जिसमें फंडिंग पूल को पहले सीज़न के 6 मिलियन यूएस डॉलर से बढ़ाकर 15 मिलियन यूएस डॉलर कर दिया गया है। यह युवा इनोवेटर्स को अपने आइडिया पेश करने और इन्वेस्टर्स, मेंटरशिप और सपोर्ट पाने का अवसर देता है, ताकि वे अपने आइडिया को मार्केट तक ले जा सकें, भारत के स्टार्टअप विकास को मज़बूत कर मार्केट के लिए तैयार उत्पादों और टेक्नोलॉजी-आधारित उद्यम बनाने की क्षमता विकसित कर सकें।

यह घोषणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित नेशनल-लेवल 'इनक्यूबेटर एंड कैपिटल समिट 2026' और 'आईएसबीएसीओएन 2026' के दूसरे दिन की गई। समिट का आयोजन चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर ने इंडियन साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर्स पार्क्स एंड बिजनेस इनक्यूबेटर्स एसोसिएशन (आईएसबीए) के सहयोग से किया। समिट में भारत की स्टार्टअप और डीप-टेक क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए 20 से ज़्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 400 इनक्यूबेटर संस्थानों, 100 चुने हुए स्टार्टअप्स, 80 इन्वेस्टर्स और 60 से ज़्यादा सरकारी, पॉलिसी और इंडस्ट्री प्रतिनिधि शामिल हुए। यह लॉन्च पहले सीज़न को मिले ज़बरदस्त रिस्पॉन्स पर आधारित है, जिसमें 1200 से ज़्यादा शहरों से 21,789 रजिस्ट्रेशन हुए थे, जिनमें यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से 10,800 से ज़्यादा रजिस्ट्रेशन शामिल थे। नए सीज़न में अपना , वेंचर कैटलिस्ट्स, एरावटी वेंचर्स, पेडलस्टार्ट, ईगलविंग्स, फाड़, बी एन एंजल और क्यूब फाउंडर्स स्पेस जैसे आठ इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स शामिल हैं।

सांसद और जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने राज्यसभा सांसद और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू के साथ मुख्य अतिथि के तौर पर इस समिट में शामिल हुए। समिट में शामिल होने वाले अन्य गणमान्य व्यक्तियों में इंफोसिस के को-फाउंडर क्रिस गोपालकृष्णन, अपना के ग्रुप सीईओ निर्मित पारिख, वेंचर कैटलिस्ट्स (विकेट्स) के सीओओ हेमंत मल्होत्रा, आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामाकोटी, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर डॉ. गौरव रैना, अमेज़न में पब्लिक पॉलिसी के डॉ. प्रीत दीप सिंह और भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सेक्रेटरी उमेश वी. वाघमारे शामिल थे।

इस मौके पर बोलते हुए, सांसद और जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने कहा, "विकसित भारत 2047 की ओर भारत का सफ़र देश के युवाओं के अपने विचारों, जुनून और उम्मीदों से आगे बढ़ेगा। 10 या 20 साल पहले के मुकाबले, आज युवाओं के पास अपने विचारों को हकीकत में बदलने के बेहतर अवसर, जानकारी और फंडिंग उपलब्ध है। सही मार्गदर्शन और सहयोग से वे अपनी क्षमता को पहचान सकते हैं। आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी इनोवेशन एंड रिसर्च पार्क और कैंपस टैंक सीज़न 2 जैसी पहल, प्रतिभाशाली फाउंडर्स को इन्वेस्टर्स, मेंटर्स और रिसोर्स से जोड़कर इस अंतर को कम करने में मदद कर सकती हैं।"

उन्होंने कहा कि युवा उद्यमी बिना देर किए शुरुआत करें, अपने विचारों को परखें, असफलताओं से सीखें और वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करें और ज़मीन से जुड़े रहें क्योंकि समाज की सेवा के बिना सफलता अधूरी है। सफलता के लिए जुनून, दृढ़ संकल्प और टीमवर्क जरूरी है, लेकिन समाज के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है। सिर्फ़ नतीजे का नहीं, बल्कि सफ़र का भी आनंद लें और आगे बढ़ते हुए दूसरों के लिए भी अवसर पैदा करें, ताकि देश की तरक्की का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।”

राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू ने कहा,"कैंपस टैंक चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की एक ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य छोटे शहरों और गांवों से आने वाले युवाओं को अपने स्टार्टअप आइडियाज को साकार करने के लिए मंच, मार्गदर्शन और निवेश के अवसर प्रदान करना है। कोई भी राष्ट्र अपने राष्ट्र नेता के विजन से आगे बढ़ता है। आज़ादी के बाद लोग अधिकतर समय बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के बारे में सोचता रहे। लेकिन 2014 में देश को एक नई रोशनी की किरण दिखाई दी। विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत का एक नया सपना देश को मिला।

आज विदेशियों का भारत और भारतीयों के प्रति नजरिया बदल गया है। आज हर भारतीय आत्मविश्वास के साथ भरा हुआ है। उनको विश्वास है कि 2047 तक विकसित भारत बन जाएगा। इसी दिशा में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने अपनी ज़िम्मेदारी को समझते हुए कैंपस टैंक जैसी एक ऐसी ही पहल की जो प्रधानमंत्री मोदी जी के विजन से प्रेरित है। उनका मानना है कि राष्ट्र निर्माण का कार्य जो एक शिक्षण संस्थान कर सकता है वो शायद कोई और नहीं कर सकता है। यह ज़रूरी है कि युवाओं की क्षमता को अवसरों में बदलें और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।”

री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग, एआई ट्रेनिंग और एप्लाइड एआई क्षेत्र में स्टार्टअप्स के साथ भारत दुनिया के लिए एआई समाधान विकसित करेगा : निर्मित पारिख, ग्रुप सीईओ 'अपना' 

निर्मित पारिख ने कहा, "कैंपस टैंक का पहला सीज़न बहुत सफल रहा था और दूसरा सीज़न तीन मुख्य थीम के साथ और भी बेहतर होगा। पहला, एआई आने से भारत और दुनियाभर में री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग की संभावनाएं हैं। इसलिए इस क्षेत्र में कई स्टार्टअप्स सामने आएंगे। दूसरा, एआई मॉडल को प्री-ट्रेनिंग और पोस्ट-ट्रेनिंग की ज़रूरत होती है, इसलिए इस क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए उत्साहित हूँ। तीसरा, एप्लाइड एआई है इसलिए इन तीन क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को लेकर उत्साहित हूँ। मेरा विश्वास है कि भारत न सिर्फ़ अपने देश के लिए, बल्कि दुनिया के लिए भी एआई समाधान विकसित करेगा।"

वेंचर कैटलिस्ट्स के ग्रुप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर हेमंत भाटिया ने कहा, “भारत का अगला यूनिकॉर्न कहीं से भी सामने आ सकता है। असल चुनौती इन्वेस्टमेंट के लिए पैसा जुटाना नहीं, बल्कि सही समय पर सही फाउंडर्स को ढूंढना है। वेंचर कैटलिस्ट्स में हमारा ध्यान सही समय पर सही फाउंडर्स की पहचान करने पर है, खासकर मेट्रो शहरों के बाहर। हम उन्हें फंडिंग, मेंटरशिप, मार्केट तक पहुंच और रणनीतिक मार्गदर्शन देकर उनके स्टार्टअप्स को सफल बिजनेस बनाने में मदद करते हैं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के 'कैंपस टैंक' के साथ हमारा लगातार जुड़ाव उभरते हुए एंटरप्रेन्योर्स को आगे बढ़ाने और भारत की अगली पीढ़ी के यूनिकॉर्न तैयार करने के हमारे लंबे समय के कमिटमेंट को दर्शाता है।” 

आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर डॉ. गौरव रैना ने कहा, "आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क ने पिछले 15 सालों में 575 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया है, जिनकी वैल्यू 8.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा है जिससे 10,000 से ज्यादा रोजगार भी पैदा किए हैं। हमारा अगला लक्ष्य हर दिन एक स्टार्टअप और 2030 तक हर महीने एक आईपीओ लाना है। भारत के आकार और यहां की समस्याओं को देखते हुए, अगले 20-25 वर्षों में 10,000 यूनिकॉर्न बनाने का मौका है। इसके लिए, सिर्फ़ इनोवेशन के लिए प्लेटफ़ॉर्म बनाना काफ़ी नहीं।  बड़े पैमाने पर इनोवेशन के लिए हमें सिर्फ़ प्लेटफ़ॉर्म की नहीं, बल्कि पार्टनरशिप की भी ज़रूरत है। इसी संदर्भ में, बड़े पैमाने पर इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी और आईआईटी मद्रास इनोवेशन एंड रिसर्च इकोसिस्टम के बीच एक एमओयू साइन किया गया है।"

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर सीयू-आईआरपी (CU-IRP) लॉन्च किया है, जो इंडस्ट्री को एकेडमिक रिसर्च और स्टार्टअप्स से जोड़ने के लिए एक 'प्लग-एंड-प्ले आरएंडडी हब' के तौर पर काम करेगा।

'कैंपस टैंक' सीज़न 2 की घोषणा के साथ ही, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर 'चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी इनोवेशन एंड रिसर्च पार्क' (सीयू-आईआरपी) लॉन्च किया। यह एक 'प्लग-एंड-प्ले' आरएंडडी हब के तौर पर काम करेगा और कॉर्पोरेट रिसर्च सेंटर्स को यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स, फैकल्टी, स्टूडेंट्स और स्टार्टअप्स के करीब लाएगा, ताकि इंडस्ट्री से जुड़ी रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और इनोवेशन को मार्केट के लिए तैयार सॉल्यूशन में बदलने में मदद मिल सके। सीयू-आईआरपी के लॉन्च के मौके पर सांसद सतनाम सिंह संधू और सांसद नवीन जिंदल के साथ-साथ आईआईटी मद्रास के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस लॉन्च के दौरान 50 करोड़ रुपये के इनोवेशन और स्टार्टअप फंड की भी घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य होनहार वेंचर्स को आर्थिक मदद देना और रिसर्च के व्यावसायीकरण व स्टार्टअप्स के विकास को मज़बूत करना है।

आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क मॉडल पर आधारित, सीयू आईआरपी के पहले फ़ेज़ को 30,000–40,000 स्क्वायर फ़ीट में बनाने की योजना है, जो इंडस्ट्री रिसर्च, एकेडमिक एक्सपर्टाइज़ और स्टार्टअप विकास को एकसाथ जोड़ेगा। इसके तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, सी-हब के इनक्यूबेशन एवं वेंचर इंफ्रास्ट्रक्चर तथा उद्योग परामर्श और स्पॉन्सर्ड रिसर्च को एकीकृत किया जाएगा। इसमें मेकरस्पेस (MakerSpace); आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बोस-आइंस्टीन क्वांटम और रोबोटिक्स पर ध्यान केंद्रित करने वाली फ़्रंटियर लैब्स; और ज़िओ एआई, ऑटोमेशन और एक्सोस्केलेटन, बायोटेक और एग्रीटेक में इंडस्ट्री एंकर लैबोरेटरी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

एक प्रोडक्ट स्टूडियो और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र ऑफ़िस, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और रिसर्च इनोवेशन को व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए ट्रांसफ़र करने में मदद करेंगे। सीयू आईआरपी फ़ैकल्टी और छात्रों के लिए इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स में क्रेडिट-बेस्ड भागीदारी का एक प्लेटफ़ॉर्म भी बनेगा, जिससे कंपनियां रिसर्च, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और प्रोडक्ट इनोवेशन पर एकेडमिक टीमों के साथ सीधे काम कर सकेंगी। दूसरे दिन 'कैंपस टैंक सीज़न 1' के विजेताओं का ऐलान किया गया। 

थापर यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग ग्रेजुएट यश गोयल और अनंत भारद्वाज द्वारा बनाए 'Krvvy' (कर्वी) को विजेता चुना गया।  महिलाओं के इनरवियर और शेपवियर का यह ब्रांड आराम, फिट और भारतीय महिलाओं के अनुरूप से डिज़ाइन प्रोडक्ट्स बनाता है। इसे वेंचर कैटलिस्ट्स से 12 करोड़ के फंडिंग राउंड और 60 करोड़ के वैल्यूएशन पर 4 करोड़ के इन्वेस्टमेंट का प्रस्ताव मिला।

कुमार आयुष सिन्हा (मास्टर्स यूनियन से टेक्नोलॉजी और बिज़नेस मैनेजमेंट में पोस्ट-ग्रेजुएट) और अर्पित अरोड़ा (आर.वी. कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग के पूर्व छात्र) द्वारा शुरू 'Offlyn' (ओफ्लिन) को किया था। यह वर्कशॉप, सपर क्लब और सोशल गैदरिंग जैसे ऑफलाइन अनुभवों को खोजने, बुक करने और होस्ट करने का एक प्लेटफ़ॉर्म है। इसे 25 करोड़ के पोस्ट-मनी वैल्यूएशन पर 3.85 करोड़ की फंडिंग का प्रस्ताव मिला।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र उत्कर्ष लूथरा (मैडॉक हेल्थ) ने हॉस्पिटल मैनेजमेंट और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी डेवलप प्लेटफार्म बनाया है। 1 करोड़ की प्रस्तावित फंडिंग के साथ, यह पांच राज्यों में 98 अस्पतालों को सेवा देती है।  इसने साल वित्तीय वर्ष 2025–26 में 1.26 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, इसका अनुमानित वैल्यूएशन 24 करोड़ है। ये तीनों विजेता कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, ऑफलाइन अनुभवों और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों से हैं।

आईसीएस26 डेमो डे में चार ट्रैक्स में स्टार्टअप पिच शामिल थीं, जिसके बाद चार ट्रैक विजेताओं और 'इन्वेस्टर्स आरएनडी का भविष्य" विषय पर एक इंडस्ट्री राउंडटेबल भी चर्चा शामिल रही, जिसमें यूनिवर्सिटी रिसर्च और इनोवेशन में इंडस्ट्री पार्टनरशिप की भूमिका पर चर्चा की गई।
 


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News Editor

Parveen Kumar

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