India Rupee 34 Countries: भारत का रुपया बन गया ग्लोबल खिलाड़ी— 18 से 34 देशों तक पहुंचा Indian Rupee
punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 04:31 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कभी सिर्फ घरेलू जेबों में घूमने वाला भारतीय रुपया अब दुनिया के व्यापारिक टेबल पर अपनी जगह बना रहा है। अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में इसकी पकड़ इतनी तेज़ी से बढ़ रही है कि बीते दो साल में ही रुपये में कारोबार करने वाले देशों की संख्या 18 से बढ़कर सीधे 34 हो गई। यह सिर्फ एक आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक वित्तीय ताकत का बढ़ता संकेत है।
रुपये का फैलता दायरा—क्यों है यह बड़ी उपलब्धि?
फॉरेक्स एक्सचेंज डीलर एसोसिएशन (FEDAI) द्वारा साझा किए गए ताज़ा आंकड़े हाल ही में RBI अधिकारियों और निर्यातकों की बैठक में सामने आए। निर्यातकों का कहना है कि जैसे-जैसे रुपये को ज्यादा देश स्वीकार कर रहे हैं, वैसे-वैसे डॉलर पर निर्भरता घट रही है, जिसकी वजह से व्यापार का जोखिम भी कम होता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से दुनिया भर में वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों पर चर्चा बढ़ी और भारत को भी रुपये को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर मिला।
रुपये में कारोबार से क्या-क्या फायदे होंगे?
डॉलर पर निर्भरता घटेगी
बाहरी राजनीतिक परिस्थितियां डॉलर की मांग और भुगतान प्रक्रिया पर असर डालती हैं। इससे व्यापार में अनिश्चितता बढ़ती है। रुपये में लेन-देन इस बाधा को कम करता है।
व्यापार की लागत कम
मुद्रा बदलने के शुल्क, एक्सचेंज उतार-चढ़ाव और ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम होने से निर्यात-आयात सस्ता पड़ता है।
निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
लागत कम होने से भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में ज्यादा आकर्षक बनते हैं।
जोखिम कम होगा
वैश्विक तनाव, प्रतिबंध, डॉलर की कमी जैसी परिस्थितियों में भी व्यापार सुचारू रहता है।
अब किन 34 देशों के साथ रुपये में व्यापार हो रहा है?
रुपये को अपनाने वाले देशों की सूची चौंकाने वाली है—इसमें विकसित अर्थव्यवस्थाएं, उभरती ताकतें और पड़ोसी देश सभी शामिल हैं।
एशिया के देश:
-
चीन
-
जापान
-
सिंगापुर
-
दक्षिण कोरिया
-
श्रीलंका
-
मालदीव
-
म्यांमार
-
कजाकिस्तान
-
किर्गिस्तान
-
इंडोनेशिया
-
बांग्लादेश
-
आर्मेनिया
-
ओमान
-
कतर
-
यूएई
यूरोप के देश:
-
बेल्जियम
-
बेलारूस
-
जर्मनी
-
यूनाइटेड किंगडम
अफ्रीकी देश:
-
मिस्र
-
तंजानिया
-
बोत्सवाना
-
युगांडा
ओशिनिया:
-
ऑस्ट्रेलिया
-
न्यूज़ीलैंड
-
फिजी
अमेरिकी महाद्वीप:
-
संयुक्त राज्य अमेरिका
-
गुयाना
और रूस भी इस सूची में शामिल है।
इन सभी देशों के साथ अब व्यापार सीधे रुपये में संभव है। यानी भारतीय मुद्रा की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।
रुपये की यह रफ्तार क्यों महत्वपूर्ण है?
वैश्विक अर्थव्यवस्था धीमी हो, युद्ध के हालात हों या डॉलर में उतार-चढ़ाव—रुपये में व्यापार भारत को एक स्थिर और स्वयंनिर्भर वित्तीय पहचान देता है। जितने ज्यादा देश रुपये को अपनाएंगे, उतना ही भारत का प्रभाव, विश्वास और व्यापारिक ताकत बढ़ेगी।
