India GDP: भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार: Q2 में GDP ने लगाया जोरदार झटका, 8.2% बढ़त
punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 04:21 PM (IST)
नेशनल डेस्क: भारत की अर्थव्यवस्था ने जुलाई–सितंबर 2025 की तिमाही में ऐसी छलांग लगाई है जिसने न सिर्फ वैश्विक विश्लेषकों को चौकाया, बल्कि देश की विकास कहानी को और मजबूत बना दिया। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में वास्तविक GDP 8.2% की रफ्तार से बढ़ी—पिछले वर्ष की समान तिमाही की 5.6% वृद्धि की तुलना में यह एक बहुत बड़ा उछाल है।
अर्थव्यवस्था को किसने दी गति?
इस तगड़ी रफ्तार के पीछे दो सेक्टर सबसे मजबूत सहारा बने—मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज।
➡ सेकेंडरी सेक्टर की दमदार छलांग
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मैन्युफैक्चरिंग में 9.1% की तेजी
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कंस्ट्रक्शन सेक्टर 7.2% बढ़ा
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पूरे सेकेंडरी सेक्टर की संयुक्त वृद्धि 8.1% रही
ये आंकड़े दिखाते हैं कि इंडस्ट्री ने इस तिमाही में विकास को मजबूती से खींचा है।
➡ सर्विस सेक्टर—भारत का हमेशा का स्टार परफॉर्मर
तृतीयक क्षेत्र ने इस बार भी सबसे ज्यादा चमक दिखाई।
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सर्विस सेक्टर की कुल वृद्धि: 9.2%
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वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं की ग्रोथ: 10.2%
इस मोर्चे पर भारत दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से आगे निकल चुका है।
खर्च बढ़ा, मांग मजबूत—PFCE में बड़ा उछाल
निजी खपत, यानी लोगों द्वारा की गई खरीद, भी मजबूत रही।
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PFCE में 7.9% वृद्धि देखी गई
पिछले साल यह आंकड़ा 6.4% था।
बिगड़ते मानसून के बावजूद बाजार में मांग स्थिर बनी रही, जो अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।
कुछ सेक्टर अभी भी दबाव में
जहां कई क्षेत्रों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं कृषि और बिजली-संबंधी सेवाएं थोड़ी सुस्त रहीं।
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कृषि क्षेत्र की ग्रोथ: 3.5%
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बिजली, गैस और पानी आपूर्ति क्षेत्र: 4.4%
इन दोनों क्षेत्रों में सुधार की संभावना अधिक है।
FY26 के पहले आधे साल का रिपोर्ट कार्ड
वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों को मिलाकर भारत ने 8% की औसत GDP वृद्धि दर्ज की है।
पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 6.1% था।
GVA की बात करें तो Q2 में 8.1% की ग्रोथ हुई—यानी उद्योगों का वास्तविक उत्पादन मजबूत रहा।
विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था—भारत की पकड़ और मजबूत
उम्मीद से ज्यादा बेहतर आए आंकड़ों से एक बार फिर स्पष्ट हो गया कि भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सबसे तेज दौड़ रहा है। अब नजर दूसरे हिस्से पर टिकी है, जहां महंगाई, उपभोक्ता खर्च और अंतरराष्ट्रीय मांग जैसे फैक्टर भविष्य की तस्वीर तय करेंगे।
