COP28 में भारत ने जलवायु कार्रवाई में समान आधार और न्याय पर दिया जोर
punjabkesari.in Sunday, Dec 10, 2023 - 01:40 PM (IST)
दुबई: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने शनिवार को यहां COP28 में कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि समानता और जलवायु न्याय, जलवायु कार्रवाई का आधार होना चाहिए तथा यह तभी सुनिश्चित किया जा सकता है जब विकसित देश जलवायु परिवर्तन से निपटने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने वार्षिक जलवायु सम्मेलन के दौरान उच्चस्तरीय खंड में राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए उत्सर्जन तीव्रता को कम करके तापमान वृद्धि रोकने के वैश्विक कार्य में भारत के योगदान और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए देश की कार्ययोजना पर भी प्रकाश डाला।
मंत्री ने जोर देकर कहा, ‘‘ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से आर्थिक विकास को अलग करने के हमारे प्रयास में, भारत ने 2005 और 2019 के बीच अपने सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में उत्सर्जन की तीव्रता को 33 प्रतिशत तक सफलतापूर्वक कम कर दिया है और इस प्रकार 2030 के लिए प्रारंभिक एनडीसी लक्ष्य को निर्धारित समय से 11 साल पहले हासिल कर लिया है।'' उन्होंने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपेक्षाओं को पार कर लिया है और गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों के माध्यम से स्थापित विद्युत क्षमता का 40 प्रतिशत हासिल कर लिया है, जो कि 2030 के लक्ष्य से नौ साल पहले है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत बढ़ी हुई जलवायु कार्रवाई पर निर्णय लेने के लिए सार्थक और प्रासंगिक जानकारी प्रदान करने के वास्ते ‘ग्लोबल स्टॉकटेक' (जीएसटी) परिणाम को लेकर आशान्वित है।
उन्होंने कहा, ‘‘संसाधन जुटाना और एक नया सामूहिक गुणवत्ता एवं सामूहिक परिमाणित लक्ष्य विकासशील देशों की आवश्यकताओं द्वारा निर्देशित होना चाहिए। भारत का दृढ़ विश्वास है कि समानता और जलवायु न्याय वैश्विक जलवायु कार्रवाई का आधार होना चाहिए तथा यह तभी सुनिश्चित किया जा सकता है जब विकसित देश महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।'' ग्लोबल स्टॉकटेक पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सामूहिक वैश्विक प्रयासों की दो साल की समीक्षा है, जो विशेष रूप से पूर्व-औद्योगिक युग (1850-1900) की तुलना में ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने का लक्ष्य है। मंत्री ने जारी जलवायु वार्ता को 'कार्रवाई का सीओपी28' बताते हुए कहा कि यह हानि और क्षति कोष के संचालन के पहले दिन ही स्पष्ट हो गया।
उन्होंने कहा, “भारत जलवायु परिवर्तन के जवाब में वैश्विक स्तर पर कार्रवाई-उन्मुख कदमों का समर्थन करने में सबसे आगे रहा है। हानि और क्षति कोष का सफल संचालन एक स्थायी भविष्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।” यादव ने कहा कि भारत ने एक दिसंबर को COP28 में ग्रीन क्रेडिट पहल शुरू करके पर्यावरण के प्रति अपना समर्पण प्रदर्शित किया। इस पहल का उद्देश्य एक वैश्विक व्यापार मंच बनाना है जो नवीन पर्यावरण कार्यक्रमों और उपकरणों के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पर्यावरण के लिए जीवनशैली पहल ‘लाइफ' की घोषणा की भी याद दिलाई जो भारत के कार्य-उन्मुख दृष्टिकोण को रेखांकित करती है। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र अवसंरचना संधि के तहत आयोजित वार्षिक वैश्विक जलवायु वार्ता 12 दिसंबर को समाप्त होगी।
