Students Diagnosed HIV: इस राज्य में 7,000 से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, सरकार ने उठाया बड़ा कदम
punjabkesari.in Wednesday, Jul 29, 2026 - 03:23 PM (IST)
कर्नाटक: कर्नाटक सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में HIV टेस्टिंग और काउंसिलिंग अनिवार्य करने का फैसला लिया है। दरअसल, हाल ही में राज्य में 18 से 25 साल की उम्र के 7,000 से ज़्यादा छात्र और युवा HIV पॉज़िटिव पाए गए हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने इंजीनियरिंग और डिग्री कॉलेजों में HIV टेस्टिंग और काउंसलिंग कैंप लगाने का फ़ैसला किया है। ये कैंप सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और प्राइवेट कॉलेजों में लगाए जाएंगे, लेकिन किसी भी छात्र की टेस्टिंग उसकी मंज़ूरी के बिना नहीं की जाएगी।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहल कर्नाटक राज्य एड्स रोकथाम सोसाइटी (KSAPS) की सिफ़ारिश पर शुरू की गई है। इसके तहत विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) और कॉलेज शिक्षा विभाग मिलकर इंटीग्रेटेड हेल्थ कैंप (IHC) आयोजित कर रहे हैं। 'डेक्कन क्रॉनिकल' ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 7,000 से ज़्यादा छात्र और युवा HIV पॉजिटिव पाए गए हैं।
RPR टेस्ट किट की सप्लाई के लिए टेंडर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइज़ेशन (NACO) की रिपोर्ट 'संकलक: स्टेटस ऑफ़ नेशनल एड्स एंड STD रिस्पॉन्स 2024' के मुताबिक, भारत में HIV के साथ जीने वाले लोगों की संख्या के मामले में कर्नाटक तीसरे नंबर पर है। राज्य में लगभग 2.60 लाख लोग HIV के साथ जी रहे हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 2.05 लाख लोगों को एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) मिल रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों का अनुमान है कि लगभग 54,000 लोगों को अपने HIV स्टेटस के बारे में पता ही नहीं है।
Over 7,000 young people and students aged 18 to 25 have tested positive for HIV in Karnataka, prompting the state government and the Karnataka State AIDS Prevention Society to mandate integrated health camps for HIV testing, screening, and counseling. pic.twitter.com/8De0uts3eK
— Dr Edmond Fernandes, MD (@Edmondfernandes) July 28, 2026
18 से 35 साल के लोगों में HIV संक्रमण ज्यादा
KSAPS के आंकड़ों से पता चलता है कि 18 से 35 साल के लोगों में HIV संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। इस उम्र के ग्रुप में HIV पॉजिटिव लोगों की संख्या 2023-24 में 44,500 से बढ़कर 2025-26 में 66,600 हो गई है। 'डेक्कन क्रॉनिकल' के मुताबिक, हाल ही में 18 से 25 साल की उम्र के 7,000 से ज़्यादा छात्र और युवा HIV पॉज़िटिव पाए गए हैं। इसके बाद अधिकारियों ने कॉलेज कैंपस में जागरूकता और स्वैच्छिक टेस्टिंग की कोशिशें तेज़ कर दी हैं।
क्या है QR कोड-आधारित HIV असेसमेंट टूल?
KSAPS ने QR कोड पर आधारित HIV से जुड़े अपने जोखिम का पता लगाने वाला एक टूल भी शुरू किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, छात्र QR कोड स्कैन करके अपने व्यवहार और HIV के संपर्क में आने की संभावना के आधार पर, अपनी गोपनीयता बनाए रखते हुए HIV के जोखिम का पता लगा सकते हैं।

95-95-99 का लक्ष्य
VTU और कॉलेज शिक्षा विभाग को लिखे पत्र में, KSAPS (Karnataka State AIDS Prevention Society) ने कहा कि 'मोबिलाइज़ेशन फ़ॉर एड्स सुरक्षा' (MAS) का मकसद 95-95-99 के लक्ष्यों को असरदार तरीके से हासिल करना है। पत्र में कहा गया, "HIV से बचाव और शुरुआती पहचान के लिए 'पहला 95' लक्ष्य-यानी 95% लोगों को उनके HIV स्टेटस के बारे में जागरूक करना-बहुत अहम है, वहीं दूसरा लक्ष्य उन्हें इलाज से जोड़ना और महामारी को रोकना है।
54,000-HIV के साथ जी रहे लोगों की अभी तक पहचान नहीं
अनुमान के मुताबिक, राज्य में लगभग 54,000 PLHIV (HIV के साथ जी रहे लोग) की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है और उन्हें अपने HIV स्टेटस के बारे में पता नहीं है। इस अंतर को कम करने के लिए HIV टेस्टिंग को असरदार तरीके से बढ़ाना ज़रूरी है।"
तीसरा लक्ष्य वायरस के फैलाव पर 99% नियंत्रण पाना है। पत्र में आगे कहा गया कि 'पहला 95' लक्ष्य-'अपना HIV स्टेटस जानें'-को हासिल करने के लिए QR कोड पर आधारित 'HIV सेल्फ-रिस्क असेसमेंट टूल' बनाया गया है, जिसका इस्तेमाल करके सभी छात्र अपना HIV स्टेटस जान सकते हैं।
