Himachal Tourist News: हिमाचल जाना हुआ महंगा: एंट्री फीस में 2.5 गुना तक की बढ़ोतरी, 1 अप्रैल से लागू होंगी नई दरें
punjabkesari.in Friday, Feb 20, 2026 - 11:25 AM (IST)
नेशनल डेस्क: अगर आप आने वाले दिनों में शिमला, मनाली या कसोल की वादियों में अपनी गाड़ी लेकर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो अपना बजट थोड़ा बढ़ा लीजिए। हिमाचल की सुक्खू सरकार ने बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों के लिए 'entry tax' का नया टैरिफ जारी कर दिया है।

क्या हैं नई दरें? (एक नजर में)
सरकार ने प्रदेश के 55 एंट्री बैरियरों पर शुल्क की समीक्षा की है। सबसे ज्यादा असर छोटी कारों और सामान्य वाहनों पर पड़ा है।
| वाहन की श्रेणी | पुरानी दर (₹) | नई दर (₹) | स्थिति |
| सामान्य निजी कार/वाहन | 70 | 170 | ₹100 की सीधी बढ़त |
| 12+1 क्षमता वाले वाहन | 110 | 170 | बढ़ाया गया |
| भारी वाहन (Heavy Vehicles) | 720 | 900 | बढ़ाया गया |
| JCB और निर्माण मशीनरी | 570 | 800 | बढ़ाया गया |
| ट्रैक्टर | 70 | 100 | बढ़ाया गया |
| डबल एक्सल बस/ट्रक | 570 | 570 | कोई बदलाव नहीं |
55 बैरियरों पर 'फास्टैग' की तैयारी
हिमाचल में प्रवेश के प्रमुख रास्तों जैसे परवाणू, बद्दी, ऊना के मैहतपुर और बिलासपुर के गरामोड़ा सहित सभी 55 बैरियरों पर ये दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी।
वसूली को पारदर्शी बनाने और बॉर्डर पर लगने वाले लंबे जाम से निजात दिलाने के लिए सरकार अब इन बैरियरों को फास्टैग (FASTag) सिस्टम से जोड़ने जा रही है। इसके लिए जिला कलेक्टर (DC) की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी भी बनाई गई है जो ठेका प्रक्रिया और निगरानी का जिम्मा संभालेगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?
हिमाचल प्रदेश वर्तमान में गंभीर आर्थिक तंगी (Financial Crisis) से जूझ रहा है। वेतन, पेंशन और रुकी हुई विकास परियोजनाओं के लिए धन जुटाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार का मानना है कि एंट्री टैक्स में इस ढाई गुना इजाफे से सरकारी खजाने में अच्छी-खासी रकम जमा होगी, जिससे राज्य की वित्तीय सेहत सुधारी जा सकेगी।

पर्यटन पर क्या होगा असर?
हिमाचल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन पर टिकी है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि ₹170 की राशि बहुत ज्यादा तो नहीं है, लेकिन पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच यह पर्यटकों के लिए एक अतिरिक्त मानसिक और वित्तीय बोझ जरूर है। डर यह भी है कि कहीं लोग बजट के चक्कर में पड़ोसी राज्यों (जैसे उत्तराखंड या कश्मीर) का रुख न करने लगें।
