5-6 घरों में काम और महीने में 60 हजार रुपए की कमाई: घरेलू सहायिका से सीखें पैसे बचाने का तरीका
punjabkesari.in Friday, Sep 11, 2026 - 10:17 AM (IST)
नई दिल्ली: आजकल हम पैसे बचाने, सही जगह निवेश करने और बजट बनाने के लिए न जाने कितने ऐप्स डाउनलोड करते हैं लेकिन कभी-कभी जीवन का सबसे बड़ा आर्थिक पाठ हमें कोई साधारण सी बातचीत सिखा जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ गुड़गांव के एक मार्केटिंग प्रोफेशनल शिवा मित्तल के साथ, जब उनकी अपनी हाउस हेल्प से हुई बातचीत ने उन्हें पैसों के प्रति अपने नजरिए पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया।
गुरुग्राम में रहने वाले शिवा मित्तल ने बताया कि उनके घर काम करने वाली महिला हर सुबह 7 बजे से पहले अपना काम शुरू कर देती हैं। वह दिनभर में 5 से 6 घरों में मेहनत करके महीने के लगभग 60,000 कमाती हैं और महीने में केवल 3 से 4 दिन ही तय छुट्टियां लेती हैं। उनकी मेहनत जितनी प्रेरणादायक है, उससे कहीं ज्यादा असरदार उनका बजट मैनेजमेंट है।
वह हर महीने 10,000 रुपए का किराया (यूटिलिटी खर्चों के अलावा) और घर का राशन पर खर्च करती है। इसके अलावा अपनी बेटी को अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाकर उसका भविष्य सुरक्षित कर रही है और तो और वह अपने गृहनगर में 6 लाख रुपए की ज़मीन के लिए लगातार EMI भी भर रही है। शिवा ने उसके हवाले से कहा, "जो आप खर्च नहीं करते, वही आपकी बचत है," और इसे पैसे मैनेज करने का उसका आसान तरीका बताया।

उन्होंने कहा, "मुझे सबसे ज़्यादा हैरानी इस बात से नहीं हुई कि हिसाब-किताब क्या है, बल्कि इस बात से हुई कि वह पैसा असल में कहां जाता है।" उसका खर्च लगभग पूरी तरह से ज़रूरी चीज़ों पर केंद्रित है, और उसकी मुख्य प्राथमिकता अपनी बेटी के लिए एक सुरक्षित भविष्य बनाना है।
शिवा ने लिखा कि कॉर्पोरेट सेक्टर में अच्छी सैलरी, हेल्थ इंश्योरेंस और जॉब सिक्योरिटी होने के बावजूद लोग अक्सर कार, नए गैजेट्स और लाइफस्टाइल अपग्रेड करने के चक्कर में अपनी कमाई गंवा देते हैं। ऐसी चीजों के लिए EMI ली जाती है जिनकी कीमत समय के साथ घटती जाती है।
उन्होंने कहा, "हम पर्सनल फाइनेंस की किताबें पढ़ते हैं, बजटिंग ऐप्स डाउनलोड करते हैं, और फिर भी कॉर्पोरेट जगत की अच्छी-खासी सुरक्षा होने के बावजूद पैसे बर्बाद करने के तरीके ढूंढ ही लेते हैं।" उन्होंने बताया कि उनके घर काम करने वाली महिला के पास कोई कॉर्पोरेट सुरक्षा कवच, कर्मचारी लाभ या बीमा नहीं है और वित्तीय गलती की गुंजाइश भी बहुत कम है। फिर भी, उनके अनुसार, वह स्प्रेडशीट या औपचारिक वित्तीय योजना पर निर्भर हुए बिना उन चीज़ों पर स्पष्ट रूप से ध्यान केंद्रित रखती है जो उसके लिए मायने रखती हैं।
शिवा ने उसके काम करने के तरीके पर बताया कि वह हर सुबह 7 बजे से पहले काम पर आ जाती है और अपनी कमाई बनाए रखने के लिए कई घरों में काम करती है। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, "इसने सचमुच मुझे रुककर यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में असल फाइनेंशियल डिसिप्लिन कैसा दिखता है।" शिवा मित्तल के मामले में, उनके नज़रिए ने फाइनेंशियल सिक्योरिटी को लेकर एक अलग सोच दी - ऐसी सोच जो अपनी आमदनी के दायरे में रहने, बेटी के भविष्य को प्राथमिकता देने और लाइफ़स्टाइल के खर्चों के बजाय किसी एसेट में पैसा लगाने पर आधारित थी।
उन्होंने कहा कि इस पूरी बातचीत का सार यह है कि फाइनेंशियल डिसिप्लिनन के लिए हमेशा मुश्किल प्लान या एडवांस्ड टूल्स की जरूरत नहीं होती। असली अनुशासन इस बात में है कि आप जानते हों कि आपके लिए क्या सबसे ज्यादा जरूरी है और आप अपनी आमदनी के दायरे में रहकर लगातार उसी हिसाब से फैसले लेते हैं।
