कनाडा PR के नाम पर 97.5 लाख की महाठगी:  पोल खुली तो परिवार के उड़े होश- केस दर्ज

punjabkesari.in Wednesday, Aug 26, 2026 - 01:19 PM (IST)

गांधीनगर: गुजरात के गांधीनगर से वीज़ा फ्रॉड की एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक वीज़ा एजेंट ने परिवार को उनके बेटे और भतीजी के लिए कनाडा की परमानेंट रेजिडेंसी (PR) दिलाने का सपना दिखाकर लगभग 97.50 लाख रुपये ठग लिए। वीज़ा एजेंट ने PR के बदले  उन्हें कथित तौर पर  'क्लोज्ड वर्क परमिट' यानि temporary वीजा दिए गए और आखिरकार उन्हें भारत लौटना पड़ा। यह शिकायत सुनीलभाई ने रवि सोलंकी के खिलाफ दर्ज कराई, जो कुडासन में 'विन विन ओवरसीज' नाम से वीज़ा कंसल्टेंसी ऑफिस चलाते हैं। 

गांधीनगर निवासी सुनीलभाई को अपने बेटे और भतीजी को कनाडा भेजना था। करीब दो साल पहले अमेरिका में रहने वाले एक परिचित के जरिए उनकी मुलाकात कुडासन में Win Win Overseas चलाने वाले एजेंट रवि सोलंकी से हुई। मार्च 2024 में सोलंकी ने दावा किया कि वह पहले भी 35 से अधिक लोगों को विदेश भेज चुका है और 3 से 4 महीने के भीतर उनके बच्चों को कनाडा की PR दिलवा देगा। इसके बदले 97.50 लाख रुपये में डील तय हुई।  
 
दोनों आवेदकों की बायोमेट्रिक और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद, परिवार ने कथित तौर पर नकद में रकम का भुगतान किया। जुलाई 2025 में, सोलंकी ने उन्हें वादे के मुताबिक PR देने के बजाय कनाडा के मैनिटोबा की एक कंपनी से जुड़े 'क्लोज्ड वर्क परमिट' दिए। 'क्लोज्ड वर्क परमिट' विदेशी कामगारों को मुख्य रूप से टेंपरेरी के लिए दिए जाने वाले कंपनी और Job-specific permit होते हैं।

कनाडा पहुंचने के बाद, सुनीलभाई के बेटे को कंपनी ने नौकरी देने से मना कर दिया क्योंकि उसके पास हेल्थ कार्ड नहीं था। एजेंट ने परिवार को बताया कि हेल्थ कार्ड की प्रक्रिया चल रही है। अगस्त 2025 में, सुनीलभाई की भतीजी कनाडा गईं। शिकायत के अनुसार, इसके बाद सोलंकी हर 15 दिन में लगभग 1,500 कनाडाई डॉलर (1.4 लाख रुपये) की मांग करते रहे और दावा करते रहे कि PR आवेदन पर अभी भी काम चल रहा है।

ठगी का अहसास होने पर जब परिवार ने एजेंट से सख्त सवाल किए, तो उसने टालमटोल करना शुरू कर दिया और कहा प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। इस साल अप्रैल तक, परिवार को एहसास हो गया कि वादा किया गया PR नहीं मिला है। भतीजी को भी कनाडा में उसकी नौकरी से निकाल दिया गया। जब परिवार ने नौकरी के सिलसिले में किसी दूसरी कंपनी से संपर्क किया, तो उन्हें पता चला कि एजेंट से उन्हें जो वर्क परमिट मिले थे, वे 'क्लोज्ड वर्क परमिट' थे और दो साल के लिए मान्य थे। धोखाधड़ी का एहसास होने पर, सुनीलभाई ने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।  


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Content Editor

Anu Malhotra