माघ मेला विवाद में बड़ा ट्विस्ट: शंकराचार्य को मनाने में जुटा प्रशासन, अब माफी मांगने को तैयार सरकार!

punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 11:54 PM (IST)

नेशनल डेस्क: प्रयागराज के माघ मेले से जुड़ा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर उपजे टकराव के बाद अब शासन और प्रशासन पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने तक को तैयार है और माघी पूर्णिमा (1 फरवरी 2026) के पावन स्नान के लिए उन्हें दोबारा प्रयागराज बुलाने की कोशिश तेज हो गई है।

दरअसल, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के लिए जाते समय शंकराचार्य और प्रशासन के बीच तनाव पैदा हो गया था। उस दिन पालकी यात्रा के दौरान बैरिकेडिंग को लेकर पुलिस और शिष्यों में कहासुनी हुई। प्रशासन ने शिष्यों पर नियम तोड़ने का आरोप लगाया, जबकि शंकराचार्य ने पुलिस पर दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया। विवाद इतना बढ़ा कि शंकराचार्य उसी दिन से धरने पर बैठ गए।

हालात और बिगड़ गए जब प्रशासन की ओर से उनके ‘शंकराचार्य’ पद को लेकर सवाल उठाते हुए नोटिस जारी कर दिया गया। इससे संत समाज में नाराजगी फैल गई। अंततः 28 जनवरी को शंकराचार्य बिना संगम स्नान किए ही माघ मेला छोड़कर वाराणसी लौट गए। यह पहला मौका माना जा रहा है जब किसी शंकराचार्य ने बिना स्नान किए मेला छोड़ा हो।

अब सरकार इस पूरे विवाद को शांत करने की कोशिश में जुट गई है। जानकारी के अनुसार, लखनऊ से दो वरिष्ठ अधिकारी वाराणसी पहुंचे हैं और शंकराचार्य से सीधे बातचीत कर रहे हैं। बातचीत अंतिम दौर में बताई जा रही है और जल्द ही इस पर आधिकारिक घोषणा हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, शंकराचार्य ने प्रशासन के सामने दो साफ शर्तें रखी हैं। पहली, इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार अधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। दूसरी, भविष्य में चारों शंकराचार्यों के लिए माघ मेला स्नान के दौरान पारंपरिक और सम्मानजनक प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जाए, जिसमें पालकी के साथ संगम तक ले जाने की व्यवस्था भी शामिल हो।

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि प्रशासनिक अधिकारी वाराणसी आकर शंकराचार्य को ससम्मान प्रयागराज लेकर जाएंगे और माघी पूर्णिमा के दिन संगम स्नान कराया जाएगा।

यह पूरा मामला अब केवल प्रशासनिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक परंपरा, संतों के सम्मान और सरकारी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। संत समाज और श्रद्धालुओं की नजर अब इसी बात पर टिकी है कि क्या शंकराचार्य एक बार फिर माघ मेले में लौटेंगे या नहीं।


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Ramanjot

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