हार्ट अटैक के खतरे पर लग सकती है रोक... एक बार की जीन थेरेपी ''बैड कोलेस्ट्रॉल'' को 62% तक कम कर सकती है: स्टडी में बड़ा दावा

punjabkesari.in Wednesday, May 27, 2026 - 01:14 PM (IST)

Gene Therapy: मेडिकल साइंस में वैज्ञानिकों ने एक बड़ा कामयाबी हासिल की है। नई रिसर्च में सामने आया है कि सिर्फ एक बार दी जाने वाली जीन थेरेपी (gene therapy) कम से कम एक साल तक शरीर में मौजूद bad cholesterol यानी LDL को काफी हद तक घटा सकती है। इससे भविष्य में ऐसे इलाज की उम्मीद बढ़ी है, जिसमें दिल के मरीजों को लंबे समय तक रोज दवाइयां लेने की जरूरत न पड़े।

New England Journal of Medicine में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, VERVE-102 नाम की प्रायोगिक थेरेपी ने उन लोगों में LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर लगभग 62 प्रतिशत तक कम कर दिया, जो जन्म से ही हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या और कम उम्र में हृदय रोग के जोखिम से जूझ रहे थे। शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर बड़े स्तर पर होने वाले आगे के परीक्षणों में भी ऐसे ही सकारात्मक नतीजे मिलते हैं, तो भविष्य में यह तकनीक दिल की बीमारियों से बचाव के लिए One-Time Treatment के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।

फिलहाल ज्यादातर जीन थेरेपी दुर्लभ बीमारियों के इलाज तक सीमित हैं, लेकिन हार्ट संबंधी रोग आज भी दुनियाभर में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। भारत में होने वाली करीब 28 प्रतिशत मौतों के पीछे कार्डियोवैस्कुलर बीमारिया जिम्मेदार मानी जाती हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि जैसे-जैसे थेरेपी की डोज़ बढ़ाई गई, कोलेस्ट्रॉल में कमी भी उसी हिसाब से ज़्यादा होती गई।

AIIMS के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय के अनुसार, यह शोध कोलेस्ट्रॉल से जुड़े जीन एडिटिंग के विचार को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा सकता है। उनके मुताबिक यह अध्ययन दिखाता है कि शरीर के भीतर ही की जाने वाली (in-vivo) बेस एडिटिंग तकनीक के जरिए, केवल एक बार इलाज देने पर भी LDL कोलेस्ट्रॉल को काफी हद तक और लंबे समय तक नियंत्रित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर आने वाले समय में इसकी दीर्घकालिक सुरक्षा की पुष्टि हो जाती है, तो कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए जीन एडिटिंग कार्डियोलॉजी में एक बड़ी क्रांति साबित हो सकती है। क्योंकि LDL को नियंत्रित करना दिल की बीमारियों से बचाव की सबसे अहम रणनीतियों में से एक माना जाता है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक यह उपचार लिवर में मौजूद एक खास जीन PCSK9 को निष्क्रिय करके काम करता है। यह जीन शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है। इस तकनीक में base editing नामक उन्नत और अधिक सटीक gene editing method का उपयोग किया गया है।

शुरुआती चरण के इस क्लिनिकल ट्रायल में Familial Hypercholesterolemia से पीड़ित 35 मरीज शामिल थे। यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जिसमें बचपन से ही कोलेस्ट्रॉल बेहद बढ़ा हुआ रहता है और कम उम्र में ही कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज का खतरा बढ़ जाता है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि जैसे-जैसे दवा की खुराक बढ़ाई गई, LDL कोलेस्ट्रॉल में गिरावट भी अधिक देखी गई। सबसे अधिक डोज वाले समूह में LDL स्तर औसतन 78 mg/dL तक पहुंचा, यानी लगभग 62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। शोधकर्ताओं के अनुसार इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है और कई मरीजों में यह कमी कम से कम एक साल तक स्थिर रही।

दुनिया भर में दिल का दौरा, स्ट्रोक और धमनियों में रुकावट जैसी गंभीर समस्याओं का एक प्रमुख कारण LDL कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा हुआ स्तर माना जाता है। कई मरीज, खासकर जिनमें यह समस्या आनुवंशिक होती है, अलग-अलग दवाएं लेने के बावजूद भी लगातार उच्च जोखिम में रहते हैं। इस शोध में बताया गया कि क्लिनिकल ट्रायल के दौरान सुरक्षा को लेकर कोई बड़ी या गंभीर समस्या सामने नहीं आई। शुरुआती परिणामों के आधार पर यह उपचार अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है, हालांकि आगे और लंबे समय तक निगरानी की जरूरत होगी। Eli Lilly and Company ने एक बयान में कहा है कि वह इस साल के अंत तक VERVE-102 के लिए दूसरे चरण (Phase-2) के क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की योजना बना रही है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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