केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने PSBs को दिए Gen Z और युवाओं को आकर्षित करने के नए गुरुमंत्र
punjabkesari.in Wednesday, Aug 19, 2026 - 02:34 PM (IST)
नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से अपनी पारंपरिक सरकारी बैंक वाली छवि बदलने और युवाओं तथा Gen Z को आकर्षित करने के लिए खुद को 'कूल' और आधुनिक बनाने का आह्वान किया है। दो दिवसीय PSB कॉन्फ्लुएंस 2026 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने बैंकों से 16 वर्ष और उससे अधिक उम्र के युवाओं को केंद्रित कर आसान, व्यक्तिगत और 24 घंटे बैंकिंग सेवाएं देने को कहा।
सीतारमण ने सुझाव दिया कि बैंक नामी एजुकेशनल प्लेटफॉर्म और संस्थानों के साथ मिलकर फ्री ऑनलाइन लर्निंग कंटेंट दें। उन्होंने कहा कि सीखने और स्किल डेवलपमेंट से बैंकों को युवाओं से जुड़ने और उन्हें फॉर्मल बैंकिंग सिस्टम में लाने में मदद मिल सकती है। वित्त मंत्री ने लाइफस्टाइल से जुड़े फायदों का भी सुझाव दिया जैसे फिटनेस सेंटर, योग सेंटर और भरोसेमंद मेंटल वेलनेस प्लेटफॉर्म के लिए कूपन और वाउचर।
उन्होंने फिजिकल ब्रांच में युवाओं के लिए खास बैंकिंग स्पेस बनाने का प्रस्ताव दिया जैसे युवा कियोस्क या युवा बैंकिंग मित्र। इन जगहों पर एक खास कर्मचारी युवा ग्राहकों की फाइनेंशियल यात्रा में मदद कर सकता है और उन्हें बैंकिंग सर्विस समझा सकता है।
वित्त मंत्री ने युवा ग्राहकों के बीच पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर बैंकों के बारे में सोच में अंतर को उजागर किया। उन्होंने कहा कि PSBs की छवि अभी भी सरकारी बैंक वाली है और अक्सर उन्हें प्राइवेट बैंकों की तुलना में कम आकर्षक माना जाता है।
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युवाओं के साथ हाल ही में हुई बातचीत का ज़िक्र करते हुए सीतारमण ने कहा कि वे अकाउंट खोलने के लिए प्राइवेट सेक्टर बैंकों को पसंद करते हैं क्योंकि वे उन्हें कूल मानते हैं। उन्होंने PSBs से युवाओं से सीधे जुड़ने को कहा ताकि वे समझ सकें कि उनकी सर्विस को और आकर्षक कैसे बनाया जा सकता है।
सीतारमण ने कहा, कहीं न कहीं, प्राइवेट बैंकों की छवि ऐसी है कि वे बैंक तो हैं ही लेकिन अच्छे भी हैं... मैं चाहती हूं कि पब्लिक सेक्टर बैंक कूल न होने वाली छवि से बाहर आएं। उन्होंने बैंकों से युवाओं से बात करने और यह समझने को कहा कि बैंकिंग सर्विस को क्या चीज़ कूल बनाती है।
साथ ही सीतारमण ने PSBs से बैंकिंग से जुड़े समझदारी भरे स्टैंडर्ड और गंभीरता को बनाए रखने को कहा। उन्होंने कहा, हमें युवाओं की उम्मीदों के साथ कदम मिलाकर चलना चाहिए और कूल होने तथा ज़िम्मेदार बैंकिंग प्रैक्टिस बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSB) का लक्ष्य युवाओं की वित्तीय ज़िंदगी के अलग-अलग पड़ावों पर उनकी पहली और सबसे भरोसेमंद पसंद बनना होना चाहिए। इन पड़ावों में पहला अकाउंट खोलना, पहली सैलरी पाना, हायर एजुकेशन लेना, कोई बिज़नेस शुरू करना या पहला इन्वेस्टमेंट करना शामिल है।
वहीं सीतारमण ने फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम के बारे में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने बैंकों से कहा कि वे युवाओं को क्रेडिट स्कोर, अलग-अलग बैंक क्रेडिट प्रोडक्ट और सरकारी क्रेडिट स्कीम के बारे में जानकारी दें ताकि भविष्य में बिज़नेस शुरू करने के लिए उन्हें आसानी से फाइनेंस मिल सके। उन्होंने बैंकों से यह भी कहा कि वे युवाओं को ज़िम्मेदार क्रेडिट अनुशासन के तहत अच्छा क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखने के महत्व के बारे में जागरूक करें।
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साथ ही सीतारमण ने पब्लिक सेक्टर बैंकों से कहा कि वे 2 अक्टूबर, 2026 (गांधी जयंती) से एक महीने तक चलने वाले खास 'बैंकिंग फॉर यूथ' कैंपेन को शुरू करने पर विचार करें। उन्होंने कहा कि इस कैंपेन को डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज़ (DFS) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के ज़रिए चलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस कैंपेन का मकसद युवाओं की वित्तीय यात्रा की शुरुआत में ही उनसे जुड़ना और उनके साथ लंबे समय तक चलने वाला रिश्ता बनाना होना चाहिए न कि सिर्फ एक बार अकाउंट खोलने तक ही सीमित रहना चाहिए।
सीतारमण ने बैंकों से कहा कि वे युवा ग्राहकों के साथ कैंपस से करियर और उसके आगे तक के रिश्ते बनाएं। उन्होंने PSB से कहा कि वे युवाओं के ब्रांच आने का इंतज़ार करने के बजाय, अकाउंट खोलने की पहल, वित्तीय जागरूकता कार्यक्रमों और सीधे बातचीत के ज़रिए इस कैंपेन को कॉलेजों, यूनिवर्सिटीज़, स्किल-बिल्डिंग संस्थानों और दूसरे कैंपसों तक ले जाएं।
