El Nino Impact: महाराष्ट्र ने खेती के लिए बांध का पानी रोका, 31 अगस्त तक पीने के लिए पानी का स्टॉक सुरक्षित रखा
punjabkesari.in Monday, Jun 15, 2026 - 02:06 PM (IST)
El Nino impact: बढ़ते जल संकट के खतरे से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने अधिकारियों को बांधों का पानी कृषि सिंचाई के लिए छोड़ने पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है। जलाशयों में कम जलस्तर और एल नीनो प्रभाव के कारण कमजोर मानसून पूर्वानुमान का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने आदेश दिया है कि 31 अगस्त तक उपलब्ध समस्त जल भंडार केवल पेयजल उद्देश्यों के लिए सुरक्षित रखा जाए। मंत्री ने रविवार देर रात कृष्णा और गोदावरी नदी बेसिन के बांधों में जल भंडारण तथा मौजूदा मौसमी वर्षा की स्थिति की समीक्षा के बाद ये निर्देश जारी किए।
मंत्री ने राज्यभर में अवैध और अनधिकृत जल निकासी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी आदेश दिया। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, महाराष्ट्र के जलाशयों में वर्तमान में कुल उपयोगी जल भंडार केवल 357.5 TMC (थाउज़ंड मिलियन क्यूबिक फीट) है, जो उनकी कुल क्षमता का मात्र 25 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी कम है।
मंत्री विखे पाटिल ने कहा, “इस मौसम में अब तक अत्यंत कम वर्षा होने के कारण जलाशयों में अपेक्षित जल प्रवाह नहीं हो पाया है। मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए हमारी तत्काल और सर्वोच्च प्राथमिकता नागरिकों के लिए पेयजल सुरक्षित करना है।” पुणे संभाग में जल संकट विशेष रूप से गंभीर है, जहाँ पिछले वर्ष की तुलना में जल भंडारण में भारी गिरावट दर्ज की गई है। क्षेत्र की शहरी आबादी को सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह 31 अगस्त तक पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महानगर क्षेत्रों के लगभग 85 लाख निवासियों के लिए निर्बाध पेयजल कोटा सुरक्षित रखे।
मंत्री ने अन्य प्रमुख संभागों में भी चिंताजनक जल भंडारण स्थिति का उल्लेख करते हुए जनसंख्या आधारित जल कोटा मूल्यांकन करने को कहा। नाशिक संभाग में उपयोगी जल क्षमता 26 प्रतिशत और मराठवाड़ा संभाग में 28 प्रतिशत है। इन दोनों क्षेत्रों तथा अहिल्यानगर (पूर्व नाम अहमदनगर) में अत्यंत कम वर्षा दर्ज की गई है।
राज्य सरकार ने मराठवाड़ा और कृष्णा घाटी विकास निगमों के अंतर्गत आने वाले सभी बांधों और प्रमुख जलाशयों की तत्काल व्यापक समीक्षा कर स्थानीय जनसंख्या की आवश्यकताओं के अनुसार सटीक पेयजल कोटा निर्धारित करने का निर्णय लिया है। मानसून की अनिश्चितता से निपटने के लिए राज्य सरकार विकेंद्रीकृत योजना लागू करेगी। मंत्री ने कहा, “प्रत्येक जिले के लिए अलग और स्वतंत्र कार्ययोजना तैयार की जाएगी।”
इन आकस्मिक योजनाओं में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना, सक्रिय सूखा-निवारण उपाय लागू करना, प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा और निगरानी करना तथा जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाना शामिल होगा। जल संकट के दौरान अक्सर अवैध जल दोहन बढ़ने की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त प्रवर्तन अभियान को मंजूरी दी है। राजस्व विभाग, पुलिस विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से गठित संयुक्त दल नहरों, बांधों, नदियों और झीलों के आसपास नियमित गश्त और औचक छापेमारी करेंगे।
मंत्री के अनुसार, इन विशेष दलों को अवैध मोटर पंप, पाइपलाइन और पानी चोरी करने वाले उपकरण तुरंत जब्त करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, इन संयुक्त टीमों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे हर सप्ताह अपनी कार्रवाई और प्रवर्तन संबंधी विस्तृत रिपोर्ट सीधे मंत्रालय को भेजें। मंत्री विखे पाटिल ने कहा, “पानी की हर बूंद का हिसाब होना चाहिए। स्थानीय प्रशासन, नगर निगमों और जल आपूर्ति एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा ताकि जलाशयों में पर्याप्त नई आवक होने तक उपलब्ध जल भंडार का प्रभावी प्रबंधन किया जा सके।”
