ट्रंप ने ओबामा को मिले नोबेल पर उठाए सवाल, बोले- इसका सबसे बड़ा हकदार मैं, भारत ने लगा दी क्लास
punjabkesari.in Saturday, Jan 10, 2026 - 12:09 PM (IST)
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को मिले नोबेल पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतिहास में उनसे ज्यादा हकदार कोई नहीं है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ा संघर्ष रुकवाया, जबकि भारत ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि पिछले साल मई में भारत-पाक तनाव के दौरान स्थिति बेहद गंभीर थी और “आठ विमान आसमान में मार गिराए गए थे”। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ये विमान किस देश के थे।
Trump claims credit for averting wars—from India–Pakistan to others—framing himself as the decisive peacemaker and positioning the Nobel Peace Prize as overdue recognition. pic.twitter.com/rMYT1BK6xk
— Dr.Barlin (@DrBarlin) January 10, 2026
ट्रंप ने कहा, “लोग मुझे पसंद करें या न करें, लेकिन मैंने आठ बड़ी जंगें रुकवाई हैं। कुछ दशकों से चल रही थीं और कुछ शुरू होने वाली थीं, जैसे भारत और पाकिस्तान के बीच।” उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान उन्हें संघर्ष रुकवाने का श्रेय दिया और कहा कि इससे लाखों लोगों की जान बची। हालांकि, भारत ने एक बार फिर ट्रंप के दावों की ‘क्लास’ लगा दी। भारत का स्पष्ट रुख है कि भारत-पाक संघर्ष विराम पूरी तरह द्विपक्षीय बातचीत का नतीजा था और इसमें किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं रही।
भारत का कहना है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उसने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। इसके बाद चार दिन तक दोनों ओर से हमले हुए और 10 मई को आपसी सहमति से संघर्ष विराम हुआ। नोबेल शांति पुरस्कार पर ट्रंप ने ओबामा को निशाने पर लेते हुए कहा, “ओबामा को राष्ट्रपति बनते ही नोबेल दे दिया गया, जबकि उन्होंने कुछ किया ही नहीं। उन्हें खुद नहीं पता कि उन्हें यह पुरस्कार क्यों मिला।”ट्रंप के इन बयानों के बाद एक बार फिर साफ हो गया है कि नोबेल पुरस्कार और भारत-पाक मुद्दे को लेकर अमेरिकी राजनीति में बयानबाज़ी तेज़ होती जा रही है, जबकि भारत अपने रुख पर अडिग है।
