99.8% डिजिटलीकरण के बाद भी 2.91 करोड़ राशन कार्डों में गड़बड़ी, हुआ बड़ा खुलासा
punjabkesari.in Friday, Jul 24, 2026 - 11:57 AM (IST)
बिजनेस डेस्कः देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में 99.8 फीसदी राशन कार्डों का डिजिटलीकरण और 99.3 फीसदी लाभार्थियों का आधार से सीडिंग होने के बावजूद 2.91 करोड़ राशन कार्डों में विभिन्न प्रकार की गड़बड़ियां पाई गई हैं। यह खुलासा संसद की उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण संबंधी स्थायी समिति की 16वीं रिपोर्ट में हुआ है, जिसे गुरुवार को लोकसभा में पेश किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत 20.5 करोड़ राशन कार्ड पूरी तरह डिजिटल किए जा चुके हैं और लगभग 80 करोड़ लाभार्थी इस प्रणाली से जुड़े हैं। आधार से व्यापक स्तर पर लिंकिंग के कारण डुप्लीकेट, मृत, स्थानांतरित और अन्य अपात्र लाभार्थियों की पहचान की गई, जिसके चलते 6.77 करोड़ फर्जी राशन कार्ड रद्द किए गए। इसके बावजूद डेटा शुद्धिकरण अभियान के दौरान 2.91 करोड़ राशन कार्डों में अलग-अलग तरह की विसंगतियां पाई गईं।
पुराना आईटी सिस्टम बना बड़ी चुनौती
समिति ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का डिजिटलीकरण तेजी से आगे बढ़ा है लेकिन कई राज्यों में अब भी पुराने सर्वर, पुराने सॉफ्टवेयर, विभिन्न एजेंसियों के बीच सीमित डेटा इंटीग्रेशन और रियल टाइम डेटा एनालिटिक्स की कमी बनी हुई है। इससे निगरानी, नीति निर्माण और खाद्यान्न वितरण की दक्षता प्रभावित हो रही है।
रिपोर्ट में सरकार को क्लाउड आधारित आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, एकीकृत डेटा प्लेटफॉर्म और एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली विकसित करने की सिफारिश की गई है। साथ ही डेटा का नियमित ऑडिट और समय-समय पर अपडेट सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
बुजुर्गों और दिव्यांगों को हो रही परेशानी
समिति ने माना कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के दौरान सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, दिव्यांगों और मेहनतकश लोगों को होती है। कई मामलों में फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने से पात्र लाभार्थियों को राशन लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसलिए समिति ने फेस ऑथेंटिकेशन सहित वैकल्पिक पहचान व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिश की है, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति को राशन से वंचित न रहना पड़े।
'वन नेशन-वन राशन कार्ड' से बढ़ी सुविधा
रिपोर्ट के अनुसार 'वन नेशन-वन राशन कार्ड' (ONORC) योजना अब देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू हो चुकी है। इसके तहत 200 करोड़ से अधिक पोर्टेबिलिटी लेनदेन हो चुके हैं। इससे प्रवासी श्रमिकों और दूसरे राज्यों में काम करने वाले पात्र लाभार्थियों को देश में कहीं भी उचित मूल्य की दुकान से राशन प्राप्त करने की सुविधा मिल रही है।
समिति ने कहा कि डिजिटलीकरण से पारदर्शिता बढ़ी है लेकिन पीडीएस को पूरी तरह सक्षम और त्रुटिरहित बनाने के लिए तकनीकी ढांचे को और मजबूत करना तथा लाभार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक प्रमाणीकरण प्रणाली विकसित करना आवश्यक है।
