जरूर कराएं ये टेस्ट: बिना सीने के दर्द के ही डायबिटीज मरीजों को हार्ट अटैक का खतरा, डॉक्टरों की बड़ी चेतावनी

punjabkesari.in Tuesday, Oct 06, 2026 - 07:34 AM (IST)

नई दिल्ली: डायबिटीज (शूगर) सिर्फ शुगर की बीमारी नहीं है, बल्कि यह दिल की बीमारियों (Heart Disease) और हार्ट अटैक के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। हाल ही में देश के जाने-माने विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ा हुआ ब्लड शुगर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और शरीर में सूजन खून की नसों को अंदर से कमजोर कर देते हैं, जिससे गंभीर दिल की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

दिल पर डायबिटीज का असर कैसे पड़ता है?
सर गंगा राम अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के हार्ट फेलियर प्रोग्राम के डायरेक्टर, डॉ. अश्विन मेहता बताते हैं कि डायबिटीज दिल की बीमारी का एक बहुत बड़ा कारण है।

हाइपरग्लाइसीमिया : लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर हाई रहने से खून की नसें अंदर से डैमेज हो जाती हैं, जिसे एंडोथेलियल डिसफंक्शनकहा जाता है।

कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड: डायबिटीज के मरीजों में अक्सर कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर भी बढ़ जाता है, जिससे नसों में चर्बी  जमने का खतरा और बढ़ जाता है  डायबिटीज के साथ अक्सर हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) जैसी समस्याएं भी जुड़ जाती हैं, जो हार्ट अटैक के जोखिम को और खतरनाक बना देती हैं। डॉ. मेहता के अनुसार, मेडिकल साइंस में डायबिटीज को 'मायोकार्डियल रिस्क इक्विवेलेंट' (Myocardial Risk Equivalent) माना जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज है, तो डॉक्टरों को उसका इलाज ऐसे करना चाहिए मानो उसे पहले से ही कोरोनरी आर्टरी डिजीज या हार्ट अटैक की समस्या हो।

एक डराने वाला मामला: गैस समझी जाने वाली तकलीफ निकली ट्रिपल वेसल ब्लॉकेज
डॉ. मेहता ने 45 साल के एक डायबिटीज मरीज का उदाहरण साझा किया। वह मरीज पिछले 10 साल से डायबिटीज से पीड़ित था लेकिन दवाइयां अनियमित रूप से ले रहा था।

लक्षण: उसे अचानक पेट के ऊपरी हिस्से में तेज बेचैनी  महसूस हुई। उसे लगा कि यह भारी या मसालेदार खाना खाने की वजह से गैस की समस्या है। जब वह इमरजेंसी में पहुंचा और उसका  ECG  किया गया, तो उसमें दिल की गड़बड़ी के संकेत मिले। उसे दिल के दौरे का कोई पुराना इतिहास नहीं था।

एंजियोग्राफी: जांच के बाद पता चला कि उसकी तीनों मुख्य कोरोनरी धमनियां पूरी तरह से ब्लॉक हो चुकी थीं और केवल एक छोटी सी चैनल के जरिए खून का संचार हो रहा था। मरीज हैरान था कि उसे कोई सीने का दर्द या गंभीर लक्षण क्यों नहीं महसूस हुआ। आखिरकार, उसकी बाईपास सर्जरी (Bypass Surgery) करनी पड़ी।

'साइलेंट किलर': दर्द का अलार्म सिस्टम क्यों फेल हो जाता है?
मेदांता के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, डॉ. नरेश त्रेहान ने समझाया कि डायबिटीज के मरीजों में दिल की बीमारियों का समय पर पता लगाना क्यों मुश्किल होता है। डायबिटीज की वजह से दिल तक दर्द पहुंचाने वाली नसें (nerve endings) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। यानी दिल का 'अलार्म सिस्टम' खराब हो जाता है।

चेस्ट पेन का न होना: मरीजों को हार्ट अटैक आने से पहले सीने में होने वाला वह दर्द महसूस नहीं होता, जो आमतौर पर एक चेतावनी का काम करता है। इसलिए, उनका दिल अंदर ही अंदर डैमेज होता रहता है और उन्हें पता भी नहीं चलता।

कमजोर हार्ट फंक्शन: डॉ. त्रेहान ने बताया कि कई मरीज उनके पास तब आते हैं जब उनके दिल की कार्यक्षमता (Heart Function) घटकर सिर्फ 20% रह जाती है। उन्हें सिर्फ सांस फूलने की समस्या पर शक होता है, और जब वे इको (ECHO) करवाते हैं, तब जाकर इस गंभीर स्थिति का खुलासा होता है।

विशेषज्ञों की सलाह और बचाव के उपाय
Regular Check-up: डॉ. नरेश त्रेहान का सुझाव है कि डायबिटीज का इलाज करने वाले डॉक्टरों (फिजीशियन और डायबिटोलॉजिस्ट) को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीज हर साल या डॉक्टर की सलाह के मुताबिक हर दो साल पर इकोकार्डियोग्राम (ECHO) और दिल की अन्य जांच जरूर करवाएं। डॉक्टरों की जिम्मेदारी है कि वे मरीजों को सिर्फ शुगर कंट्रोल करने की सलाह न दें, बल्कि उन्हें दिल पर मंडराने वाले गंभीर खतरों के प्रति भी पूरी तरह आगाह करें ताकि समय रहते उनकी जान बचाई जा सके।


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Content Editor

Anu Malhotra

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