दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में फीस का आतंक! बच्चों का नाम काटने की धमकी, मामला पहुंचा हाई कोर्ट

punjabkesari.in Friday, Mar 27, 2026 - 05:14 PM (IST)

नेशनल डेस्क: नई दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मयूर विहार और द्वारका के नामी स्कूलों पर आरोप है कि वे मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं और अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं। इस मुद्दे ने अब कानूनी रूप ले लिया है और मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है।

अभिभावकों का आरोप: नियमों की खुली अनदेखी

माता-पिता का कहना है कि स्कूल प्रशासन शिक्षा विभाग के नियमों और कोर्ट के निर्देशों को नजरअंदाज कर रहा है। कई अभिभावकों ने दावा किया कि फीस न भरने पर बच्चों का नाम काटने और परीक्षा परिणाम रोकने जैसी सख्त कार्रवाई की जा रही है, जिससे परिवारों में चिंता और गुस्सा बढ़ गया है।

स्कूल के बाहर प्रदर्शन की तैयारी

मयूर विहार स्थित एक बड़े स्कूल के खिलाफ अभिभावक 27 मार्च को विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन बढ़ी हुई फीस वसूलने के लिए बच्चों को माध्यम बना रहा है। यहां तक कि छोटे बच्चों को भी नाम काटने की चेतावनी दी जा रही है, जिससे अभिभावक खुद को मजबूर महसूस कर रहे हैं।

द्वारका में भी वही हाल, बढ़ी फीस से बढ़ी परेशानी

द्वारका के एक अन्य स्कूल में भी फीस बढ़ोतरी को लेकर विवाद सामने आया है। अभिभावकों का कहना है कि उन्हें नोटिस देकर चेतावनी दी गई है कि तय समय में फीस जमा न करने पर बच्चों का नाम हटा दिया जाएगा। कुछ मामलों में फीस करीब 1.5 से 1.8 लाख रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है, जो मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

कोर्ट के आदेश के बावजूद जारी है दबाव

अभिभावकों का कहना है कि Delhi High Court ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फीस विवाद के चलते बच्चों के नाम नहीं काटे जा सकते। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अभिभावक मूल फीस के साथ बढ़ी हुई राशि का आंशिक भुगतान करें और अंतिम निर्णय का इंतजार करें। इसके बावजूद कुछ स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं।

राजनीति में भी गूंजा मुद्दा

इस पूरे विवाद पर आम आदमी पार्टी के नेता Saurabh Bharadwaj ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्कूलों की मनमानी पर सवाल उठाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।

क्या चाहते हैं अभिभावक

अभिभावकों की मांग है कि फीस बढ़ोतरी पारदर्शी तरीके से हो और शिक्षा विभाग के नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए। उनका कहना है कि अचानक बढ़ी फीस बच्चों की पढ़ाई और परिवार के बजट दोनों पर भारी पड़ रही है।

अब सबकी नजर कोर्ट के फैसले पर

फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और अगली सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है। इस बीच, दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था और प्राइवेट स्कूलों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।


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Content Writer

SHUKDEV PRASAD

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