सेक्स टॉय विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें, अब असिस्टेंट कमिश्नर की सैलरी से वसूला जाएगा भारी फाइन

punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 04:57 PM (IST)

नेशनल डेस्क। दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्पादों के आयात (Import) से जुड़े एक विवाद पर सुनवाई करते हुए सीमा शुल्क विभाग (Customs Department) पर ₹50,000 का सख्त जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर जैनेंद्र जैन के वेतन से काटने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने यह कड़ा कदम इसलिए उठाया क्योंकि विभाग ने सेक्स टॉय (Sex Toy) और बॉडी मसाजर जैसे उत्पादों के आयात को लेकर स्पष्ट नीति (Clear Policy) बनाने के हाई कोर्ट के पहले के निर्देशों का पालन नहीं किया।

इसके अलावा कोर्ट ने दो कंपनियों के जब्त किए गए माल को छोड़ने का आदेश दिया था जिसके बावजूद विभाग ने माल को रोके रखा और फिर इस आदेश की समीक्षा (Review) की मांग करते हुए याचिका दायर की जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

क्या था पूरा विवाद?

यह मामला टेक्सिंक (Techsync) और देबंजन इम्पेक्स (Debanjan Impex) नामक दो आयातक कंपनियों से जुड़ा है। दोनों कंपनियों ने कोर्ट में याचिका लगाई थी कि कस्टम विभाग ने उनके माल को 'सेक्स टॉय' बताकर रोक लिया है। जबकि उनका दावा था कि पहले भी इसी तरह के उत्पादों को विभाग से बिना किसी आपत्ति के क्लियरेंस मिल चुकी थी। कंपनियों ने कस्टम अधिकारियों पर उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया था। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की।

हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सीमा शुल्क विभाग पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। कोर्ट ने साफ कहा कि विभाग बिना किसी उचित कारण के कंपनियों को परेशान कर रहा है। कोर्ट ने पाया कि विभाग के पास ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ मौजूद थे जो उसकी अपनी दलीलों का खंडन करते थे लेकिन विभाग ने उन्हें कोर्ट के सामने पेश नहीं किया। पीठ ने विभाग द्वारा दायर समीक्षा याचिका में कोई मजबूत आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया।

पहले के आदेश की अवहेलना

इससे पहले 30 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को स्पष्ट निर्देश दिया था कि 'बॉडी मसाजर' या 'सेक्स टॉय' के रूप में घोषित किए जाने वाले ऐसे उत्पादों के आयात के लिए एक समान और स्पष्ट नीति बनाई जाए। इस नीति को संबंधित मंत्रालयों के साथ परामर्श करके तैयार किया जाना था ताकि कस्टम अधिकारियों को साफ दिशा-निर्देश मिल सकें और कारोबारियों को परेशानी न हो। कोर्ट ने पहले ही दोनों कंपनियों के जब्त माल को अंतरिम रूप से रिहा करने का आदेश दे दिया था।

विभाग ने क्यों मांगी समीक्षा?

विभाग ने आदेश की समीक्षा की मांग करते हुए तर्क दिया कि इन उत्पादों के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अनुमति और बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2022 के तहत विस्तारित निर्माता जिम्मेदारी (EPR) प्रमाणपत्र लेना जरूरी है।

जुर्माना लगाने का कारण

अदालत ने पाया कि विभाग ने जानबूझकर उन दिशा-निर्देशों को छिपाया जो बताते थे कि ये अनुमतियां या प्रमाणपत्र इस मामले में जरूरी नहीं थे। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि विभाग ने जानबूझकर तथ्यों को छिपाया और कंपनियों पर दबाव बनाते हुए उन्हें बार-बार परेशान किया। इसी वजह से समीक्षा याचिका खारिज कर दी गई और सीमा शुल्क विभाग पर ₹50,000 (दोनों याचिकाओं के लिए 25-25 हजार) का जुर्माना लगाया गया जिसे असिस्टेंट कमिश्नर के वेतन से काटने का आदेश दिया गया।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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