ड्यूटी के दौरान थमीं CRPF जवान की धड़कनें; तिरंगे में लिपटकर लौटा वीर, मासूम बेटे के आखिरी सैल्यूट ने सबकी आंखें की नम
punjabkesari.in Friday, May 15, 2026 - 12:53 AM (IST)
नेशनल डेस्क: राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि झुंझुनूं ने देश सेवा में अपना एक और सपूत खो दिया है। ओडिशा में तैनात सीआरपीएफ (CRPF) के जवान ओमप्रकाश मीणा का ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से आकस्मिक निधन हो गया। गुरुवार को जब इस वीर का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव सिंगनोर पहुंचा, तो मानों पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया और हर आंख नम हो उठी।
शेखावाटी के शेर की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
सिंगनोर गांव के निवासी 37 वर्षीय ओमप्रकाश मीणा सीआरपीएफ की 127वीं बटालियन में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे। मंगलवार शाम ड्यूटी के दौरान उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा और वह हमेशा के लिए खामोश हो गए। गुरुवार दोपहर जब उनकी पार्थिव देह गुढ़ागौड़जी पहुँची, तो वहां से उनके पैतृक गांव तक एक विशाल तिरंगा यात्रा निकाली गई। 'भारत माता की जय' और 'ओमप्रकाश मीणा अमर रहें' के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। दिल्ली-बवाना से आई 55वीं बटालियन की टुकड़ी ने उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर अंतिम सलामी दी।
मासूम बेटे ने जब किया सैल्यूट, तो पत्थर दिल भी पिघल गए
शहीद जवान अपने पीछे एक अधूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनकी पत्नी अनुराधा देवी, एक बेटी (कक्षा 8) और एक बेटा (कक्षा 5) शामिल हैं। अंतिम संस्कार के समय जब सेना के अधिकारियों ने तिरंगा शहीद के नन्हे बेटे को सौंपा, तो उस मासूम ने आंसू पोंछते हुए अपने पिता को नमन कर सैल्यूट किया। यह भावुक दृश्य देख वहां मौजूद हजारों लोगों का कलेजा मुंह को आ गया और हर कोई फूट-फूट कर रोने लगा।
प्रमोशन की दहलीज पर थे ओमप्रकाश
ओमप्रकाश मीणा वर्ष 2011 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। उन्होंने हैदराबाद में ट्रेनिंग के बाद भोपाल और श्रीनगर जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी थीं। दुखद बात यह है कि उन्होंने हाल ही में हवलदार पद के लिए अपना प्रशिक्षण पूरा किया था और उनकी पदोन्नति (प्रमोशन) होने ही वाली थी, लेकिन उससे पहले ही काल ने उन्हें अपनी आगोश में ले लिया।
बढ़ते हार्ट अटैक ने बढ़ाई चिंता
एक हट्टे-कट्टे जवान की अचानक इस तरह मौत ने ग्रामीणों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। गांव में चर्चा रही कि कोविड के बाद युवाओं में हृदयघात (Heart Attack) की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि डॉक्टरों ने अभी तक कोविड टीकाकरण और इन घटनाओं के बीच कोई पुख्ता चिकित्सकीय संबंध स्थापित नहीं किया है, फिर भी कम उम्र में बढ़ते ये मामले समाज के लिए बड़ा सवाल बन गए हैं।
