General MM Naravane Biography: कौन हैं जनरल एमएम नरवणे? जिनके एक जिक्र ने लोकसभा में खड़ा किया सियासी तूफान

punjabkesari.in Monday, Feb 02, 2026 - 05:00 PM (IST)

नेशनल डेस्क: बजट सत्र के चौथे दिन संसद में संग्राम छिड़ गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा Four Stars of Destiny के कुछ अंशों का जिक्र किया। राहुल गांधी ने एक मैगजीन के लेख का हवाला देते हुए चीन सीमा और अग्निपथ योजना पर सवाल उठाए, जिस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने तीखी आपत्ति जताई।

क्या है 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' का विवाद?

जनरल नरवणे की यह किताब उनकी 40 साल की सैन्य सेवा की यादगार है। पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित होने वाली इस किताब के कुछ अंश दिसंबर 2023 में मीडिया में लीक हो गए थे। नियमों के अनुसार, सेना के उच्च पदों से सेवानिवृत्त अधिकारियों को अपनी किताब प्रकाशित करने से पहले रक्षा मंत्रालय से 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (NOC) लेना होता है। रिपोर्टों के मुताबिक, किताब में 2020 के गलवान संघर्ष, चीनी टैंकों की मूवमेंट और 'अग्निपथ योजना' को लेकर कुछ ऐसी बातें कही गई हैं जो सरकार के आधिकारिक पक्ष से अलग हो सकती हैं। फिलहाल यह किताब सरकारी Review के कारण बाजार में नहीं आ सकी है।

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जनरल एमएम नरवणे: एक 'सोल्जर' का सफर

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारतीय सेना के 28वें प्रमुख रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में चीन की आक्रामकता का डटकर मुकाबला किया था। नरवणे के जीवन पर नजर डाले तो उनका जन्म 22 अप्रैल 1960 को पुणे (महाराष्ट्र) में हुआ। उनके पिता मुकुंद नरवणे भी वायुसेना में विंग कमांडर रह चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) पुणे और आईएमए देहरादून से प्रशिक्षण लिया। उन्होंने डिफेंस स्टडीज में एम.फिल. की डिग्री हासिल की है। सैन्य जीवन शुरुआत जून 1980 में 7वीं बटालियन, सिख लाइट इन्फैंट्री में कमीशन के तौर पर हुई। उन्होंने अपने जीवन की महत्वपूर्ण कमान जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की दूसरी बटालियन के नेतृत्व के तौर पर संभाली। इसके बाद उन्होंने असम राइफल्स (उत्तर) के महानिरीक्षक के रूप में और म्यांमार में भारत के 'डिफेंस अताशे' (Defence Attaché) रहे।

सर्वोच्च पद: 31 दिसंबर 2019 को उन्होंने जनरल बिपिन रावत से सेना प्रमुख का पदभार संभाला। जनरल रावत के निधन के बाद वे दिसंबर 2021 से अप्रैल 2022 तक 'चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी' के अस्थायी चेयरमैन भी रहे।

 


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News Editor

Radhika

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