UCC पर कांग्रेस का BJP पर हमला, जयराम रमेश बोले- ‘विभाजन और ध्यान भटकाने का हथियार’

punjabkesari.in Wednesday, Sep 23, 2026 - 01:38 PM (IST)

नई दिल्ली: कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कोई कानूनी सुधार नहीं है, बल्कि ''विभाजन, व्यवधान और ध्यान भटकाने का एक हथियार'' तथा समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में बनाए रखने का एक साधन है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए गठित राज्य सरकार की समिति से बंबई उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश के इस्तीफे और समिति के कामकाज को लेकर उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए कहा कि इससे कई ''बड़े सवाल'' खड़े होते हैं। उन्होंने एक बयान में सवाल किया कि क्या संविधान सभा ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें हर राज्य अपनी अलग समान नागरिक संहिता बनाए? रमेश ने कहा, ''इसका जवाब है: बिल्कुल नहीं।

पारिवारिक कानून में सुधार' पर अपना परामर्श पत्र जारी किया
कांग्रेस नेता ने कहा, ''क्या बाबासाहेब आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान निर्माताओं ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें एक राजनीतिक दल की राजनीतिक चालों और हिसाब-किताब के मुताबिक अलग-अलग समान नागरिक संहिता बनाने के लिए राज्य एक-दूसरे से होड़ करें। इसका जवाब है: बिल्कुल नहीं।'' रमेश ने इस बात का उल्लेख किया कि 17 जून 2016 को मोदी सरकार ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे को विस्तृत अध्ययन के लिए भारत के 21वें विधि आयोग के पास भेजा था। उन्होंने कहा कि व्यापक अध्ययन के बाद आयोग ने 31 अगस्त 2018 को 'पारिवारिक कानून में सुधार' पर अपना परामर्श पत्र जारी किया था। उन्होंने कहा कि परामर्श पत्र के पृष्ठ सात के अनुच्छेद 1.15 में आयोग का निष्कर्ष स्पष्ट था कि ''इस स्तर पर समान नागरिक संहिता बनाना न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।

पारिवारिक कानूनों में मौजूद भेदभाव को दूर करने की सिफारिश की
रमेश ने कहा कि इसके बजाय विधि आयोग ने भारत की कानूनी और सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखते हुए अलग-अलग पारिवारिक कानूनों में मौजूद भेदभाव को दूर करने की सिफारिश की थी। कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने उसी विधि आयोग के निष्कर्षों को नजरअंदाज कर दिया, जिसे उसने इस मुद्दे की जांच का जिम्मा सौंपा था। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भारतीय जनता पार्टी शासित कई राज्यों ने अपनी-अपनी समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। रमेश के मुताबिक, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता 27 जनवरी 2025 से लागू हुई, जबकि गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026, असम विधानसभा ने 27 मई 2026 और मध्यप्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई 2026 को समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बाकी दलों की आवाज दबा दी गई
कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि राज्य स्तर पर बनायी जा रही ये समान नागरिक संहिता एक जैसे नहीं हैं और इनमें ''अलग-अलग प्रावधान, अलग-अलग दंड, अलग-अलग प्रक्रियाएं और कई महत्वपूर्ण छूट'' हैं। उन्होंने उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह ''कई पितृसत्तात्मक परंपराओं को अब भी जारी रखता है'' और राज्य में कानून का पालन करने वाले निवासियों के लिए भी ''कई तरह की समस्याएं'' पैदा कर रहा है। रमेश ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि ''राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बाकी दलों की आवाज दबा दी गई है'' और भाजपा उन्हें ''चुप करा रही है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के लिए समान नागरिक संहिता ''कोई ऐसा कानूनी सुधार नहीं है, जिसे पूरी तरह सोच-विचार के बाद, ज्यादा से ज्यादा व्यापक विचार-विमर्श और सार्वजनिक बहस के जरिए और अधिकतम संभव सहमति के साथ लागू किया जाए।'' उन्होंने कहा, ''असल में यह विभाजन, व्यवधान और ध्यान भटकाने का एक हथियार है, लोगों को परेशान करने और डराने का एक माध्यम है, पूर्वाग्रहों को भड़काने और समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में बनाए रखने का एक साधन है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Ramkesh

Related News