370 सीट का दावा, 5 मुश्किलें हैं सामने... क्या BJP कर पाएगी इस टारगेट को पूरा ?

punjabkesari.in Tuesday, Feb 06, 2024 - 04:51 PM (IST)

नेशनल डेस्क : लोकसभा चुनाव अब बस कुछ ही देर रह गई है। इस बार के चुनाव के लिए BJP का खास नारा "अबकी बार 400 के पार" भी लगाया जा रहा है। सोमवार को संसद में बीजेपी के लिए 370 सीट पर जीत का दावा करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने टारगेट को सेट कर दिया है। हालांकि इस लक्ष्य को पूरा करना भी इतना आसान नहीं है। बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने 37% वोट के आधार पर 303 सीटें पर अपनी जीत का झंडा गाड़ा था। भाजपा पार्टी ने पीएम मोदी के नाम और काम के कारण 2014 के लोकसभा चुनाव में कामयाबी हासिल की थी। 2019 में 2014 के मुकाबले 6% ज्यादा वोट अधिक मिले थे, जिसके चलते 21 सीटें अधिक जीतने में कामयाबी भी मिली थी। लेकिन इस बार का लक्ष्य बढ़ गया है जिस कारण चुनौतियां भी बड़ गई हैं। पर कहीं ना कहीं देश का माहौल देख के 370 सीटों का यह पहाड़ बीजेपी के लिए कुछ मुशकिल नहीं है। फिर भी देश के इन पांच हिस्सों की मुश्किलों पर पार किए बीना बीजेपी पीएम मोदी के इस दावे को पूरा करने में सफल नहीं हो पाएगी।

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1-पंजाब-हरियाणा- हिमाचल-कश्मीर और दिल्ली 
2014 के बाद से पूरे देश में बीजेपी की लोकप्रियता ने आसमान को छुआ है पर उत्तर भारत के पंजाब और दिल्ली में अभी बीजेपी दूरी बनी हुई है। जबकि पार्टी ने अपनी हर मुमकिन कोशिश को आजमाया है, ताकि इन राज्यों में भी बीजेपी खुद को स्थापित कर पाए। हालांकि ये छोटे राज्य हैं पर 370 के टारगेट को पूरा करने के लिए भाजपा को एक-एक सीट जरूरी है। पंजाब में बीजेपी के सामने आम आदमी पार्टी से मुकाबला है। यानि कि इस बार पंजाब की 13 सीटों में से 2 सीटों को जितना भी अब मुश्किल भरा काम दिखआई दे रहा है। कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पहली बार चुनाव होंगे। लद्दाख में जिस तरह केंद्र के खिलाफ हाल ही में आंदोलन हुए हैं उससे वहां की सीट भी खतरे में ही दिखाई दे रहा है। हिमाचल में भी कांग्रेस ने अपनी सरकार को जमा लिया है तो जाहिर है कि जिस पार्टी की सरकार होती है उस पार्टी को कुछ माइलेज तो मिलता ही है। हालांकि अगर पिछली बार की बात करें तो यहां पर बीजेपी को 4 में से 4 सीटों पर जीत मिली थीं। लेकिन इस बार यहां पर सभी सीट को जीतना आसान नहीं होगा। दिल्ली में भी पिछली बार सभी 7 सीटें बीजेपी ने जीती थी पर जिस तरह आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में सरकार बनाई और नगर निगमों पर भी कब्जा कर लिया उससे यहां पर चैलेंज और बढ़ गया है। इसके अलावा I.N.D.I.A गठबंधन ने भी दिल्ली में बीजेपी के लिए इस चैलेंज को बढ़ा दिया है। इसका मतलब के दिल्ली को जीतना भी  बीजेपी के लिए मुश्किल होता जा रहा है।

2-यूपी में सीट बढ़ाना भी नहीं है आसान
उत्तर प्रदेश में 2019 के चुनावों में बीजेपी ने 80 में से 62 सीट को जीता था, इसके अलावा 2 सीटें सहयोगी दलों की मदद से भी जीती थी। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था शायद यही कारण रहा कि पार्टी 2014 की सफलता दोहरा नहीं सकी। बहुजन समाज पार्टी को 10 सीटें मिलीं थीं जबकि समाजवादी पार्टी को सिर्फ 5 सीट ही मिली। 2024 का चुनाव अब इंडिया गठबंधन के साथ होने जा रहा है। इसी बीच अखिलेश यादव और जयंत चौधरी में भी आपसी सहमति हो चुकी है। जबकि कांग्रेस के साथ लगातार सीट शेयरिंग पर चर्चा हो रही है। समाजवादी पार्टी ने अपनी ओर से कांग्रेस को 11 सीटों का ऑफर दे दिया है। अगर ये समझौता भी हो जाता है तो यह निश्चित है कि बीजेपी के लिए अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना भी आसान नहीं होगा। पूर्वी यूपी के कई जिलों में पिछली बार बीजेपी साफ हो गई थी। 

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3-पूर्वी भारत भी है चैलेंज 
बीजेपी को इस बार बंगाल ,बिहार के साथ साथ उड़ीसा में भी अपनी सफलता दोहराना मुश्किल लग रहा है। बीजेपी के पास ओडिशा से केवल 8 लोकसभा सांसद हैं, जबकि बीजेडी के पास 20 सीटें हैं। ओडीशा में बीजेपी की संभावना इसलिए भी थोड़ी कम लग रही हैं कि क्योंकि बीजेपी यहां पर अभी तक आक्रामक राजनीति के साथ नहीं आ पाई है।ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक के खिलाफ बीजेपी दोस्ती से मुकाबला कर रही है।  दूसरे नवीन पटनायक भी बीजेपी की राजनीति कर रहे हैं। बीजेपी के पास अगर अयोध्या का राम मंदिर है तो नवीन पटनायक के पास पुरी का कॉरिडोर। इसी तरह 370 सीटों के सपने को सकार करने के लिए बंगाल भी एक बड़ी बाधक बना हुआ है। बीजेपी को यहां अपना पुराना रिकॉर्ड 19 सीटों से आगे बढ़ने की कहीं से भी उम्मीद नज़र नहीं आ रही है। जिस तरह यहां लोकसभा चुनावों के बाद फिर से टीएमसी मजबूत हो कर उभरी है उससे नहीं लगता कि बीजेपी अपनी पुरानी सीटें भी हासिल कर पाएगी। 

4-दक्षिण भारत में 25 की जगह 50 सीट को जीतना होगा
आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 25 सीटें हैं, जिनमें बीजेपी को पिछले चुनाव में एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी। तमिलनाडु की 39 सीटों में से भी बीजेपी के हाथ कुछ नहीं आया और इस बार भी लड़ाई यहां कठिन है। केरल की 20 सीटों में से भी बीजेपी के लिए कोई जगह नहीं दिखआई दे रही है। बता दें कि इन तीनों राज्यों को मिलाकर ही 84 सीटें होती हैं। बीजेपी को अगर अपनी 400 सीटों के लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं तो यहां अपने खाते को खोलने के साथ अच्छा प्रदर्शन भी करना होगा। 370 का आंकड़ा पार करने के लिए पार्टी को केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश में कम से कम 30 सीटों की जरूरत होगी, जो काफी मुश्किल से नजर आ रहा है। इन राज्यों की कुल 101 सीटों में से बीजेपी के पास सिर्फ 4 सीटें हैं, जो तेलंगाना से हासिल हुई थी। तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद वो पुरानी सीटें भी मिलनी मुश्किल हो सकती हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कर्नाटक में भी मुश्किल हो सकती है। पिछले आम चुनाव में बीजेपी ने 28 में से 25 सीटें यहां से जीती थीं। इस बार पार्टी ने जेडी एस के साथ चुनावी समझौता किया है। जिससे जाहिर है कि बीजेपी को 4 सीटें जेडी-एस को देनी होगी। कर्नाटक में भी अब बीजेपी का राज नहीं है। सत्ता बदलने के बाद राज्य की राजनीति में कांग्रेस और मजबूत हुई है। तमिलनाडु और केरल में अब भी बीजेपी को कोई चमत्कार ही सीट दिला सकता है। हालांकि पार्टी इन दोनों राज्यों में जिस तरीके से मेहनत कर रही है वो जरूर रंग लाएगा।

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5-महाराष्ट्र भी है मुश्किल
उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक लोकसभा सांसद महाराष्ट्र से ही आते हैं।  यहां 48 सीटों में से बीजेपी के पास 23 सीटें है। बीजेपी ने शिवसेना और एनसीपी को तोड़कर अपने दुश्मनों को कमजोर करने की कोशिश की है पर चुनावी रूप से अब भी पार्टी कमजोर ही महसूस कर रही है। कारण यह है कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे बिना पार्टी के भी काफी मजबूत हैं। अगर यहां इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग हो जाती है तो बीजेपी के लिए बहुत मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। 


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Content Editor

Mahima

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