Cipla के पुणे वेयरहाउस का दवा बिक्री और वितरण लाइसेंस रद्द, FDA ने बताई कई अनियमितताएं
punjabkesari.in Friday, Oct 02, 2026 - 09:33 PM (IST)
नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने दवा कंपनी सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के पुणे स्थित वेयरहाउस के दवा बिक्री और वितरण लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। वाडकी स्थित कंपनी के कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग (C&F) वेयरहाउस के निरीक्षण में कई अनियमितताएं पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
FDA ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत कानूनी प्रक्रिया नए सिरे से पूरी करने के बाद लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया गया। FDA के पुणे डिवीजन-3 के सहायक आयुक्त (ड्रग्स) ने 1 अक्टूबर को इस संबंध में नया आदेश जारी किया।
अगस्त में भी हुई थी कार्रवाई
इससे पहले FDA ने 27 अगस्त को इसी वेयरहाउस के खिलाफ कार्रवाई की थी। उस दौरान सिप्ला की ‘रिएक्टिन प्लस’ टैबलेट की पैकेजिंग, भंडारण, दस्तावेजों और बाजार से दवा वापस लेने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं सामने आई थीं। FDA के मुताबिक, दवा की पैकेजिंग पर बिना अनुमति के प्रचार संबंधी दावे किए गए थे। इसके अलावा वेयरहाउस के प्रबंधन और दवाओं के भंडारण में भी कई खामियां पाई गई थीं।
हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद FDA ने अपनी पिछली कार्रवाई वापस लेते हुए नए सिरे से कानूनी प्रक्रिया शुरू की। विभाग ने 4 सितंबर को कंपनी को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी ने 11 सितंबर को लिखित जवाब दिया और 21 सितंबर को उसे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया। कंपनी के जवाब, सुनवाई के दौरान दी गई दलीलों, निरीक्षण रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद FDA ने 1 अक्टूबर को नया आदेश जारी किया।
‘रिएक्टिन प्लस’ की पैकेजिंग पर आपत्ति
FDA के अनुसार, निरीक्षण के दौरान ‘रिएक्टिन प्लस’ टैबलेट की पैकेजिंग पर इसे दर्द निवारक दवा बताते हुए सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच, शरीर में दर्द और दांत दर्द में राहत जैसे दावे पाए गए।
विभाग ने कहा कि यह दवा शेड्यूल-H के तहत आने वाली प्रिस्क्रिप्शन दवा है। पैकेजिंग पर मानव आकृति और मांसपेशियों के दर्द से राहत का चित्रण भी पाया गया। FDA के मुताबिक, पैकेजिंग पर इस्तेमाल किए गए दावे, शब्द और चित्र संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे। विभाग ने इसे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत मिसब्रांडिंग से जुड़ा मामला माना।
FDA ने यह भी कहा कि दवा के मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी केवल निर्माता की भूमिका का हवाला देकर अपनी कानूनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकती।
वेयरहाउस में भंडारण से जुड़ी कमियां
निरीक्षण के दौरान दवाओं के भंडारण और वेयरहाउस प्रबंधन में भी कई कमियां सामने आईं। FDA के अनुसार, निर्धारित फॉर्म-35 निरीक्षण पुस्तिका उपलब्ध नहीं थी। पर्याप्त पैलेट और रैक नहीं होने के कारण दवाओं के बॉक्स सीधे जमीन पर रखे गए थे और कुछ स्टॉक पर धूल जमा मिली।
इसके अलावा एक्सपायरी दवाओं के लिए अलग से निर्धारित क्षेत्र नहीं था, जिस पर ‘एक्सपायरी-नॉट फॉर सेल’ लिखा हो। एक्सपायरी दवाओं के निपटारे से संबंधित जरूरी SOP और रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं पाए गए।
FDA ने खरीद और बिक्री के बिलों की डुप्लीकेट प्रतियों पर हस्ताक्षर तथा कंप्यूटर/SAP रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच भी विसंगतियां पाईं। विभाग के मुताबिक, इनमें एंटीबायोटिक दवाओं का स्टॉक भी शामिल था।
कंपनी की ओर से SAP और अन्य कंप्यूटर सिस्टम में रिकॉर्ड रखे जाने का हवाला दिया गया था। हालांकि, FDA ने कहा कि केवल कंप्यूटर रिकॉर्ड उपलब्ध होने से लाइसेंसधारक की कानूनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। दवाओं का उचित भंडारण, साफ-सफाई, वास्तविक स्टॉक का मिलान और निरीक्षण के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना लाइसेंसधारक की जिम्मेदारी है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नए सिरे से कार्रवाई
FDA ने स्पष्ट किया कि 1 अक्टूबर को जारी आदेश 27 अगस्त की कार्रवाई को दोहराना नहीं है। विभाग के अनुसार, यह बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत पूरी प्रक्रिया दोबारा पूरी करने के बाद लिया गया स्वतंत्र नियामक फैसला है। FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि दवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा दवा आपूर्ति श्रृंखला में कानूनी प्रावधानों का पालन कराना है।
