Mobile Torch Delivery: सरकारी अस्पताल की बिजली गुल, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में करवाई गई महिला की डिलीवरी

punjabkesari.in Tuesday, Apr 07, 2026 - 11:23 AM (IST)

Government Hospital Negligence: छत्तीसगढ़ की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। मुंगेली जिले के लोरमी स्थित 50 बिस्तरों वाले मातृ-शिशु अस्पताल में एक गर्भवती महिला को अंधेरे और बदइंतजामी के बीच अपनी संतान को जन्म देना पड़ा। अस्पताल में बिजली गुल होने के कारण नर्सिंग स्टाफ ने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर डिलीवरी कराई। राहत की बात यह रही कि मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही को बेनकाब कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित महिला सोमवार दोपहर अपने पति हेमंत के साथ प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची थी। जब महिला को प्रसव कक्ष (लेबर रूम) में ले जाया गया तब बिजली थी लेकिन प्रसव प्रक्रिया शुरू होते ही अचानक अस्पताल की बत्ती गुल हो गई। अस्पताल में लगे ऑटो-कट जनरेटर और इन्वर्टर भी ऐन वक्त पर काम नहीं आए। बताया जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से पूरा सिस्टम ट्रिप कर गया था। करीब आधे घंटे तक महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। अंत में कोई रास्ता न देख नर्सों ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर प्रसव कराया।

पति का आरोप: डिप्टी सीएम से कर दो शिकायत

महिला के पति हेमंत ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हेमंत के मुताबिक घटना के वक्त वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। जब उन्होंने नर्सों से अव्यवस्था पर सवाल किया तो उन्हें कथित तौर पर यह जवाब मिला— "जिससे शिकायत करनी है कर दो, अरुण साव (डिप्टी सीएम) से कर दो। जब अधिकारी और डॉक्टर ही नहीं हैं, तो हम क्या करें?"

राजनीतिक गलियारों में हलचल

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे जान से खिलवाड़ बताते हुए कहा- अगर संवेदनशील समय पर जनरेटर और बैकअप सिस्टम काम नहीं कर रहे थे तो यह गंभीर लापरवाही है। बीएमओ (BMO) की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। डिलीवरी के वक्त डॉक्टर का होना अनिवार्य है ऐसी घटनाओं के दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रशासन की सफाई

स्वास्थ्य विभाग और खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) ने सफाई देते हुए कहा कि खराब मौसम के कारण तकनीकी खराबी आई थी। विभाग का दावा है कि सिस्टम को अब दुरुस्त कर लिया गया है और बिजली व्यवस्था सामान्य है। हालांकि यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि करोड़ों की लागत से बने अस्पतालों में इमरजेंसी बैकअप समय पर सक्रिय क्यों नहीं होता?


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Rohini Oberoi

Related News