Chandra Grahan 2026: क्या गर्भ में पल रहे बच्चे को ग्रहण से होता है खतरा? जानिए

punjabkesari.in Monday, Mar 02, 2026 - 03:38 PM (IST)

ChandraGrahan 2026 : कल यानि की 3 मार्च को साल का पहला चंद्र गहण लगने जा रहा है।  फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन होने वाली यह खगोलीय घटना कई मायनों में खास है, क्योंकि यह सूर्य ग्रहण के महज 15 दिनों के भीतर हो रही है। ग्रहण को लेकर लोगों में कई सारी मान्यताएं हैं। इनमें खासकर गर्भवती महिलाओं को लेकर । अक्सर बड़े-बुजुर्ग ग्रहण के दौरान कई पाबंदियां लगाने की सलाह देते हैं, लेकिन क्या आधुनिक विज्ञान भी इन बातों से सहमत है? आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय।

क्या वाकई होती हैं हानिकारक किरणें?

अक्सर यह माना जाता है कि ग्रहण के दौरान ब्रह्मांड से ऐसी शक्तियां या किरणें निकलती हैं जो गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुँचा सकती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण महज पृथ्वी की छाया का चंद्रमा पर पड़ना है। इससे किसी भी तरह का हानिकारक विकिरण (Radiation) नहीं निकलता, जिससे शिशु के विकास या स्वास्थ्य पर कोई जैविक प्रभाव पड़े।

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खान-पान और नुकीली चीजों का डर के पीछे कितनी है सच्चाई?

परंपरागत रूप से ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को सुई, चाकू या कैंची जैसी नुकीली चीजों से दूर रहने और उपवास करने को कहा जाता है। भोजन और पानी को लेकर डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि गर्भावस्था में भूखा रहना खतरनाक हो सकता है। लंबे समय तक पानी न पीने या भोजन न करने से ब्लड शुगर लेवल गिर सकता है और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की समस्या हो सकती है। दूसरी ओर नुकीली चीजों को लेकर यह दावा भी वैज्ञानिक रूप से निराधार है कि चाकू या सुई के इस्तेमाल से बच्चे में कोई शारीरिक दोष आ सकता है। जन्मजात दोष अनुवांशिक या पर्यावरणीय कारणों से होते हैं, किसी खगोलीय घटना से नहीं।

क्या बाहर जाना सुरक्षित है?

सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसम अच्छा है, तो बाहर जाने में कोई बुराई नहीं है। ग्रहण से कोई शारीरिक खतरा नहीं होता; केवल थकान या मौसम की प्रतिकूलता ही असुविधा का कारण बन सकती है।

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एक्सपर्ट की सलाह

गर्भावस्था के दौरान सबसे महत्वपूर्ण है—सही पोषण, पर्याप्त नींद और मानसिक शांति। यदि कोई महिला अपनी सांस्कृतिक मान्यताओं का पालन करना चाहती है, तो वह ऐसा कर सकती है, बशर्ते वह खुद को और बच्चे को शारीरिक कष्ट न दे। जबरन उपवास या डर के माहौल में रहने के बजाय, आराम करना और डॉक्टर की सलाह मानना सबसे बेहतर विकल्प है।


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News Editor

Radhika

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