माता-पिता को एक साथ रहते देखना चाहता था 19 साल का होनहार बेटा, खुवाडिया पहाड़ी पर एक झटके में उजड़ गया परिवार
punjabkesari.in Tuesday, Aug 25, 2026 - 06:17 AM (IST)
छत्रपति संभाजीनगर: एक हंसता-खेलता परिवार और डॉक्टर बनने का सपना देखने वाला 19 साल का होनहार युवा - सब कुछ महज़ कुछ ही मिनटों में खत्म हो गया। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर की खुवाडिया पहाड़ी पर पिछले दिनों घटी एक दिल दहला देने वाली घटना में माता-पिता और बेटे, तीनों की मौत हो गई। इस मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे है। वहीं अब जांच में सामने आया है कि 19 वर्षीय कुणाल अपने माता-पिता के बीच बरसों से चले आ रहे विवादों और प्रॉपर्टी के तनाव को सुलझाकर उन्हें फिर से एक देखना चाहता था। लेकिन जब यह सपना सच होता न दिखा तो एक अनहोनी घटना में पूरा परिवार हमेशा के लिए शांत हो गया।
कुणाल चाहता था कि माता-पिता के बीच सुलह हो जाए
संगीता के मायके वालों ने बताया कि पति-पत्नी के बीच झगड़ों और प्रॉपर्टी से जुड़े तनाव ने परिवार पर असर डाला था। उनके मुताबिक, कुणाल अपने माता-पिता को एक साथ लाना चाहता था और उनके मतभेदों को खत्म होते देखना चाहता था। उन्होंने उसे एक होनहार छात्र बताया, जिसने इस साल 10वीं कक्षा की CBSE परीक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उन्होंने कहा कि कुणाल MBBS करना चाहता था।
मृतक मुरलीधर की बहन, शोभा राजेंद्र मस्के ने पति-पत्नी के रिश्ते पर बताया कि मुरलीधर और संगीता ने करीब 22 साल पहले लव मैरिज की थी और दावा किया कि मुरलीधर के माता-पिता इस शादी के खिलाफ थे और शादी में शामिल नहीं हुए थे। शोभा के अनुसार, शादी के बाद मुरलीधर और उनके परिवार के बीच रिश्ते खराब हो गए थे। उन्होंने मुरलीधर और संगीता के बीच कई सालों से चले आ रहे मतभेदों का भी ज़िक्र किया।
चंदगुडे परिवार जिस मकान में किराए पर रहता था, उसके केयरटेकर और पड़ोसियों के मुताबिक, परिवार का व्यवहार बहुत शांत था। मुरलीधर पिछले 10 सालों से ड्राइवर का काम कर रहे थे और उनके काम की तारीफ होती थी। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि अंदरूनी तनाव इतना बढ़ चुका है।
मुरलीधर के साथ काम करने वालों ने भी उन्हें शांत और अनुशासित व्यक्ति बताया। चौधरी ट्रांसपोर्ट के मैनेजर पवन ओतांबे ने बताया कि मुरलीधर ने वहां करीब 10 साल तक ड्राइवर के तौर पर काम किया था और उनके खिलाफ कभी कोई शिकायत नहीं मिली थी। पड़ोसियों ने बताया कि कुणाल पढ़ाई में होशियार था और उन्हें याद है कि वह मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देखता था।
पुलिस की जांच के अनुसार, कुणाल सुबह करीब 8 बजे घर से निकला था, बताया जा रहा है कि वह अपनी क्लास के लिए गया था। जब वह सुबह 9.10 बजे तक इंस्टीट्यूट नहीं पहुंचा, तो इंस्टीट्यूट ने उसकी मां से संपर्क किया। सुबह 10 बजे से 10.30 बजे के बीच उसकी लोकेशन पहाड़ी पर ट्रेस की गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने सुबह करीब 10.45 बजे पुलिस को सूचना दी। सुबह करीब 11.30 बजे फायर ब्रिगेड को बुलाया गया। जब टीम पहुंची, तो कुणाल पहाड़ी की चोटी पर था और अपनी जगह बदल रहा था। बचाव दल ने उसे वापस आने के लिए मनाने की कोशिश की और एहतियात के तौर पर नीचे एक सेफ्टी नेट लगाया।
इसी कोशिश के दौरान मुरलीधर अपने बेटे के पास पहुंचे और उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की इस बीच दोनों का बैलेंस बिगड़ गया और वे नीचे गिर गए। पुलिस के अनुसार, इसके कुछ ही देर बाद संगीता ने भी छलांग लगा दी। इस दर्दनाक हादसे के बाद परिवार का पालतू कुत्ता 'शेरू' दो दिनों तक बंद मकान के अंदर अपनों का इंतज़ार करता रहा। पड़ोसियों ने उसे खाना-पानी दिया। बाद में एनिमल वेलफेयर ग्रुप ने उसे रेस्क्यू कर म्युनिसिपल शेल्टर पहुंचाया।
