Teacher Slap Rules: क्या टीचर बच्चे को थप्पड़ मार सकता है? जानिए क्या हैं CBSE के नियम
punjabkesari.in Tuesday, Jul 21, 2026 - 02:56 PM (IST)
CBSE Child Safety Rules : स्कूल बच्चों के सीखने, खेलने और आत्मविश्वास बढ़ाने की जगह होते हैं। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करे। लेकिन अगर कोई शिक्षक बच्चे को थप्पड़ मार दे, डांटे, पूरी क्लास के सामने अपमानित करे या मानसिक रूप से प्रताड़ित करे, तो क्या यह सही है?
इस सवाल का जवाब साफ है—नहीं। भारतीय कानून और CBSE के दिशा-निर्देश बच्चों को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से पूरी तरह सुरक्षा प्रदान करते हैं। चाहे बच्चा नर्सरी, एलकेजी (LKG), यूकेजी (UKG) या किसी भी कक्षा में पढ़ता हो, स्कूल की जिम्मेदारी है कि उसे सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिले।
RTE Act क्या कहता है?
शिक्षा का अधिकार (Right to Education-RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 17 के तहत बच्चों को शारीरिक दंड (Physical Punishment) और मानसिक प्रताड़ना (Mental Harassment) देना प्रतिबंधित है। वहीं, CBSE भी अपने संबद्ध स्कूलों को स्पष्ट निर्देश देता है कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का हिंसक या अपमानजनक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। स्कूलों को डर नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वास का माहौल बनाना होगा।
सिर्फ थप्पड़ मारना ही नहीं, ये भी हैं शारीरिक दंड
अक्सर लोग मानते हैं कि शारीरिक दंड का मतलब सिर्फ मारना होता है, जबकि कानून और बाल सुरक्षा दिशानिर्देश इसके दायरे को कहीं अधिक व्यापक मानते हैं।
इनमें शामिल हैं—
- थप्पड़ मारना
- हाथ या किसी वस्तु से पीटना
- कान खींचना
- हाथ मरोड़ना
- बच्चे को झकझोरना
- धक्का देना
- लंबे समय तक खड़ा रखना
- दर्द देने वाली स्थिति में बैठाना या खड़ा करना
- ऐसा कोई भी व्यवहार जिससे बच्चे को शारीरिक पीड़ा हो
- मानसिक प्रताड़ना भी है अपराध जैसी गंभीर चिंता
बच्चे को चोट सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि उसके मन पर भी लग सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार बचपन में मिला मानसिक आघात लंबे समय तक बच्चे के आत्मविश्वास, पढ़ाई और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।
मानसिक प्रताड़ना में शामिल हैं-
- पूरी कक्षा के सामने बेइज्जत करना
- गाली देना या अपमानजनक शब्द कहना
- बार-बार डराना या धमकाना
- गलतियों का मजाक उड़ाना
- दूसरे बच्चों से अपमानजनक तुलना करना
- "बेवकूफ", "निकम्मा" या ऐसे अन्य शब्दों का इस्तेमाल करना
- डर के जरिए अनुशासन कायम करना
- बच्चों की सुरक्षा को लेकर CBSE के क्या नियम हैं?
CBSE के Affiliation Bye-Laws के अनुसार सभी संबद्ध स्कूलों को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और अन्य संबंधित संस्थाओं के बाल सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। स्कूलों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को हिंसा, बुलिंग, उत्पीड़न और किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार से सुरक्षित रखें। बच्चों की सुरक्षा CBSE संबद्धता की महत्वपूर्ण शर्तों में शामिल है।
अगर शिक्षक ने बच्चे को थप्पड़ मार दिया तो क्या करें?
1. पहले बच्चे की बात ध्यान से सुनें
बिना गुस्सा किए बच्चे से शांत तरीके से पूछें-
आज स्कूल में क्या हुआ?
क्या किसी ने तुम्हें मारा?
उस समय कौन था?
टीचर ने क्या कहा?
ध्यान रखें कि बच्चे पर जवाब देने का दबाव न बनाएं।
2. चोट के सबूत सुरक्षित रखें
अगर बच्चे के शरीर पर चोट के निशान हैं तो-
तुरंत फोटो लें।
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच कराएं।
मेडिकल रिपोर्ट सुरक्षित रखें।
3. स्कूल प्रशासन से तुरंत मिलें
इन लोगों से मुलाकात करें-
क्लास टीचर
कोऑर्डिनेटर
प्रिंसिपल
साथ ही मांग करें
घटना पर लिखित जवाब
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की कार्रवाई
स्कूल द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी
4. शिकायत हमेशा लिखित में करें
ईमेल या लिखित आवेदन के जरिए शिकायत दर्ज कराएं।
साथ में सुरक्षित रखें-
शिकायत की कॉपी
रिसीविंग या डायरी नंबर
ईमेल रिकॉर्ड
आगे की कार्रवाई में यही सबसे महत्वपूर्ण सबूत बनते हैं।
5. स्कूल कार्रवाई न करे तो कहां करें शिकायत?
यदि स्कूल संतोषजनक कार्रवाई नहीं करता, तो अभिभावक इन संस्थाओं से संपर्क कर सकते हैं-
स्कूल मैनेजमेंट कमेटी
जिला शिक्षा अधिकारी
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR)
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)
CBSE (यदि स्कूल संबद्ध है)
पुलिस (यदि मामला मारपीट या किसी आपराधिक अपराध से जुड़ा हो)
6. क्या शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है?
हाँ। CBSE के नियमों के अनुसार स्कूल प्रबंधन आरोपों की जांच के बाद संबंधित शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। मामले की गंभीरता के आधार पर चेतावनी, निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
CCTV फुटेज क्यों है महत्वपूर्ण?
CBSE के नए सुरक्षा मानकों के तहत स्कूलों में प्रमुख स्थानों और कक्षाओं में CCTV लगाने पर जोर दिया गया है। यदि किसी बच्चे के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत होती है, तो CCTV फुटेज जांच में महत्वपूर्ण सबूत बन सकती है।
