छोटे शहरों की बड़ी उड़ान: 5 लाख से अधिक आबादी वाले नगरों पर फोकस, अब टियर-2 और टियर-3 शहरों की बदलेगी सूरत
punjabkesari.in Sunday, Feb 01, 2026 - 11:37 AM (IST)
Union Budget 2026 : केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के लिए खजाना खोल दिया है। सरकार ने विकास की गति को बनाए रखने के लिए पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) यानी कैपेक्स को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का बड़ा ऐलान किया है। इस भारी-भरकम निवेश का सबसे बड़ा फायदा उन शहरों को मिलेगा जो अब देश के नए ग्रोथ सेंटर बनकर उभरे हैं।
छोटे और मंझोले शहरों पर बड़ा दांव
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बजट का मुख्य फोकस 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों पर रहेगा।
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टियर-2 और टियर-3 शहरों का विकास: सरकार का मानना है कि ये शहर अब केवल रिहायशी इलाके नहीं बल्कि आर्थिक विकास के केंद्र बन चुके हैं।
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शहरी कायाकल्प: इन शहरों में बेहतर सड़कें, आधुनिक परिवहन, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी पर विशेष जोर दिया जाएगा ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार और निवेश बढ़ सके।
12 साल में 6 गुना बढ़ा कैपिटल खर्च
सरकार ने आंकड़ों के जरिए यह दिखाया है कि पिछले एक दशक में बुनियादी ढांचे पर खर्च करने की उसकी रणनीति कितनी आक्रामक रही है:
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2014-15: सार्वजनिक पूंजीगत खर्च मात्र 2 लाख करोड़ रुपये था।
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2025-26 (BE): यह बढ़कर 11.2 लाख करोड़ रुपये हुआ।
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2026-27 (प्रस्तावित): अब इसे बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बढ़ोत्तरी?
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निजी निवेश को बढ़ावा: जब सरकार बुनियादी ढांचे पर खर्च करती है, तो प्राइवेट कंपनियाँ भी निवेश के लिए प्रोत्साहित होती हैं (Crowding-in effect)।
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रोजगार सृजन: इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से लाखों लोगों को काम मिलता है।
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लॉजिस्टिक लागत में कमी: बेहतर सड़कों और रेलवे से माल ढुलाई सस्ती होती है, जिससे महंगाई कम करने में मदद मिलती है।
