Budget Lock-in period: बजट से पहले 10 दिनों तक दुनिया से काट दिए जाते हैं अफसर, न फोन की इजाजत न परिवार से बात! जानिए क्यों?
punjabkesari.in Friday, Jan 30, 2026 - 12:47 PM (IST)
Budget Lock-in period: भारत का केंद्रीय बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी 'गोपनीय फाइल' है। 1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना 9वां बजट पेश करने जा रही हैं। बजट पेश होने से करीब एक हफ्ते पहले नॉर्थ ब्लॉक (वित्त मंत्रालय) का बेसमेंट एक 'किले' में तब्दील हो जाता है। यहाँ 'हलवा सेरेमनी' के साथ शुरू होता है 'लॉक-इन' पीरियड। बजट की छपाई से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को न फोन इस्तेमाल करने की इजाजत होती है, न ही वे अपने परिवार से मिल सकते हैं। यह सब इसलिए ताकि बजट की एक भी लाइन बाहर न आए।

इतिहास के वो दो काले अध्याय: जब लीक हो गया बजट
आज भले ही बजट डिजिटल और सुरक्षित हो, लेकिन भारत के इतिहास में दो बार ऐसी चूक हुई जिसने सरकार की नींव हिला दी थी।
1. 1947: एक अनौपचारिक बातचीत और इस्तीफा
आजाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश होना था। आर.के. शन्मुखम चेट्टी वित्त मंत्री थे। लेकिन बजट पेश होने से पहले ही ब्रिटेन के तत्कालीन वित्त मंत्री ह्यू डाल्टन ने तंबाकू, बीयर और मुनाफे पर लगने वाले टैक्स की जानकारी एक पत्रकार को दे दी। खबर मात्र 20 मिनट में लीक हो गई। परिणाम स्वरूप, डाल्टन को माफी मांगनी पड़ी और अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

2. 1950: जब राष्ट्रपति भवन से लीक हुई जानकारी
1950 तक बजट के दस्तावेज राष्ट्रपति भवन स्थित प्रेस में छपते थे। जॉन मथाई के कार्यकाल में प्रिंटिंग के दौरान ही जानकारी बाहर आ गई। इस कांड के बाद मथाई को इस्तीफा देना पड़ा। इसी घटना के बाद सरकार ने फैसला लिया कि बजट अब राष्ट्रपति भवन में नहीं, बल्कि नॉर्थ ब्लॉक के सुरक्षित बेसमेंट में छपेगा।
अब बजट कितना सुरक्षित है?
आज का बजट पूरी तरह डिजिटल है। प्रिंटेड कॉपियां केवल औपचारिकता के लिए सीमित मात्रा में निकाली जाती हैं। सुरक्षा इतनी सख्त है कि जैमर लगाए जाते हैं, साइबर सिक्योरिटी की कई परतें होती हैं और हर आने-जाने वाले का कड़ा रिकॉर्ड रखा जाता है।
