Border 2 Movie Review: 30 साल बाद सनी देओल लौटे, वही जोश और इमोशन के साथ… फर्स्ट हाफ दमदार

punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 12:03 PM (IST)

नेशनल डेस्क: करीब तीन दशक पहले आई फिल्म बॉर्डर केवल एक सिनेमाई अनुभव नहीं थी, बल्कि कई पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और जज्बात का प्रतीक बन गई थी। जब बॉर्डर 2 की घोषणा हुई, तो दर्शकों में उसी पुरानी यादों और रोमांच की लहर देखने को मिली। लेकिन एक सवाल भी था – क्या बॉलीवुड में चल रहे सीक्वल ट्रेंड के बीच ये फिल्म अपने असली इमोशंस को बरकरार रख पाएगी? इंटरवल तक की कहानी यह भरोसा देती है कि हां, बॉर्डर 2 ने अपने जज्बात खोने नहीं दिए।

फर्स्ट हाफ: कहानी की धड़कन
बॉर्डर 2 की शुरुआत उस समय होती है जब जंग का ऐलान नहीं हुआ है। इंटरवल तक कहानी पाकिस्तान के ऑपरेशन चंगेज खान की ओर बढ़ती है, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध की आधिकारिक शुरुआत है। इस दौरान फिल्म अपने मुख्य किरदारों को परिचित कराती है – होशियार सिंह दहिया (वरुण धवन), निर्मलजीत सिंह सेखों (दिलजीत दोसांझ) और एम एस रावत (अहान शेट्टी)। इन सभी को कैडेट ट्रेनिंग एकेडमी में ट्रेनिंग देते हैं फतेह सिंह कलेर, यानी सनी देओल।

ट्रेनिंग, दोस्ती और इमोशंस
कहानी में ट्रेनिंग का कॉम्पिटिशन, दोस्ती, शरारत और तीनों कैडेट्स की पर्सनल लाइफ दिखाई गई है। इसमें दो शादियां, दो खूबसूरत गाने, कॉमेडी और भरपूर इमोशन शामिल हैं। यही इमोशन फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है – वो जज्बात जो दर्शकों को स्क्रीन पर खड़े फौजी की भावना तक महसूस कराते हैं।

सनी देओल: फिल्म की रीढ़
अगर बॉर्डर 2 की आत्मा उसके इमोशंस हैं, तो उसका मजबूत शरीर सनी देओल हैं। तीस साल बाद भी सनी अपने कंधों पर फिल्म का जोश और ताकत बनाए रखते हैं। वरुण, दिलजीत और अहान भी अपने किरदारों में पूरी तरह फिट हैं। इंटरवल तक की कहानी ने इमोशंस को ऊंचाई पर ले जाकर युद्ध की घोषणा कर दी है। अब यह देखने वाली बात है कि सेकंड हाफ में ये ऊंचाई कितनी मजबूती से बनी रहती है।

सिनेमाई अनुभव या भावनाओं का सफर?
बॉर्डर 2 की स्टोरीटेलिंग साधारण हो सकती है, कुछ लोगों को यह थोड़ा साधारण लग सकता है, लेकिन इसकी कमी फिल्म के इमोशनल पलों ने पूरी कर दी है। ये पल दर्शकों के दिल और आंखों तक असर करते हैं और उन्हें फिल्म के हर जज्बात के साथ जोड़ देते हैं।

 


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Content Editor

Anu Malhotra

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