बांग्लादेश में एक और दिल दहला देने वाली घटनाः हिंदू पेट्रोल पंप कर्मी को कार से कुचलकर मारा, एक माह में 10वें हिंदू की हत्या (Video)
punjabkesari.in Saturday, Jan 17, 2026 - 03:51 PM (IST)
Dhaka: बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले के सदर उपजिला में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हिंदू पेट्रोल पंप कर्मचारी को जानबूझकर कार से कुचलकर मार डाला गया। मृतक की पहचान 30 वर्षीय रिपन साहा के रूप में हुई है, जो गोलंदा मोड़ के पास स्थित करीम फिलिंग स्टेशन पर काम करता था।स्थानीय मीडिया और पुलिस के अनुसार, यह घटना शुक्रवार को उस समय हुई जब एक काली लैंड क्रूजर कार ने करीब 5,000 टका का ईंधन भरवाया और बिना भुगतान किए निकलने की कोशिश की। रिपन साहा ने वाहन को रोकते हुए पैसे की मांग की, जिस पर चालक ने उसे जानबूझकर कुचल दिया और मौके से फरार हो गया।
Another Hindu youth was ki££ed today in Rajbari, Bangladesh❗
— BANGLADESH CRISIS 🇧🇩 (@BDcrisis) January 16, 2026
BNP leader Abul Hashem ran his car over Filling Station Worker Ripon Shaha (30) while he asked to pay the price of Patrol. Later he died on spot.#BangladeshCrisis pic.twitter.com/vkcAZ1jZvS
राजबाड़ी सदर थाना प्रभारी खोंडकर जियाउर रहमान ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या है। पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया है और उसके मालिक अबुल हाशेम, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की जिला इकाई के पूर्व कोषाध्यक्ष बताए जा रहे हैं, को गिरफ्तार कर लिया गया है। वाहन चालक कमाल हुसैन को भी हिरासत में ले लिया गया है। करीम फिलिंग स्टेशन के कर्मचारियों ने बताया कि साहा कार के सामने खड़ा हो गया था, तभी चालक ने जानबूझकर गाड़ी चढ़ा दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

यह घटना पिछले एक महीने में हिंदू समुदाय से जुड़े लोगों की दसवीं हत्या बताई जा रही है, जिससे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे पहले, फेनी जिले में एक अन्य हिंदू युवक समीर दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। 9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा था कि वह हालात पर नजर बनाए हुए है और उम्मीद करता है कि बांग्लादेश सरकार ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करेगी। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और आम जनता में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
