''लोमड़ियों का मार्च'', ठाकरे बंधुओं की रैली पर महाराष्ट्र के मंत्री का विवादित बयान
punjabkesari.in Sunday, Oct 04, 2026 - 04:07 PM (IST)
मुंबई : महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता आशीष शेलार ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रविवार को शिवसेना (उबाठा) और मनसे की विरोध रैली को विश्व पशु दिवस पर आयोजित 'लोमड़ियों के मार्च' करार दिया। शेलार ने शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे चुनाव जीतने में असमर्थ रहने के कारण निर्वाचन आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर सवाल उठा रहे हैं।
शेलार ने कहा, 'आज विश्व पशु दिवस है। रैली और उसके नाम को देखकर मुझे लगता है कि यह 'गर्जना' मोर्चा नहीं, बल्कि 'कोल्हेकुई' (लोमड़ियों का मार्च) है। लोमड़ियां कह रही हैं कि अंगूर खट्टे हैं। वे चुनाव जीतने में अपनी असमर्थता के लिए निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यह चालाक लोगों का जमावड़ा है।' शेलार ने निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाने को लेकर ठाकरे बंधुओं पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा रुख़ अपनाने से पहले उन्हें अपने राजनीतिक रिश्तों पर भी नज़र डालनी चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक ने कहा, 'अगर आप देखना चाहते हैं कि मतभेदों के बाद किस तरह आम सहमति बनती है, तो निर्वाचन आयोग को क्यों देखते हैं? उद्धवजी और राज ठाकरे, पहले खुद आईने में देखिए।' मतपत्र से मतदान कराने की मांग पर शेलार ने कहा कि EVM भाजपा सरकार ने शुरू नहीं की थी। उन्होंने कहा कि ईवीएम का विकास 1970 के दशक के अंत में हुआ था और 1982 में केरलम में इसका पहली बार इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में 1989 में जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन किया गया था।
शोलार ने कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 2007 और 2012 में मुंबई नगर निगम चुनाव जीता था और 2017 में भी ईवीएम के जरिए मतदान के बावजूद सत्ता बरकरार रखी थी। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे की पार्टी ने 2009 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 13 सीट जीती थीं, जबकि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने ईवीएम के जरिए मुंबई नगर निगम चुनाव जीते थे। शेलार ने कहा, 'जब आप जीतते हैं तो ईवीएम अच्छी होती हैं, लेकिन जब कोई और जीतता है तो वे गलत हो जाती हैं। राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस का यही रुख है।'
