'ऊंच जाति' का दूल्हा हो या फिर 80 लाख का पैकेज, सफल Business woman की शादी वाली शर्त ने छेड़ दी बहस

punjabkesari.in Thursday, Apr 30, 2026 - 01:10 PM (IST)

Caste vs Money in Wedding : क्या आज के दौर में प्यार, समझदारी और स्वभाव जैसे शब्द सिर्फ किताबों तक सीमित रह गए हैं? क्या आधुनिकता के इस दौर में भी हमारी शादियां 'जाति' और 'बैंक बैलेंस' के तराजू पर तौली जा रही हैं? हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक घटना ने इन सवालों को फिर से गरमा दिया है। यह मामला एक 32 वर्षीय सफल महिला का है जो खुद का फैशन बिजनेस चलाती है। परिवार भी काफी प्रतिष्ठित है—पिता IPS अधिकारी हैं और मां टीचर। बाहर से देखने पर यह एक आधुनिक और प्रगतिशील (Progressive) परिवार नजर आता है लेकिन जब बात घर की बेटी की शादी की आई तो आधुनिकता का चोला उतर गया। महिला ने शादी के लिए जो शर्त रखी उसने मैचमेकिंग (Marriage Bureau) कंपनी की फाउंडर को भी हैरान कर दिया। उसकी मांग सीधी थी: "या तो लड़का ब्राह्मण या राजपूत जैसी 'उच्च जाति' का हो, या फिर उसका सालाना पैकेज कम से कम 80 लाख रुपये हो।"

महिला का चौंकाने वाला जवाब 

जब मैरिज ब्यूरो की फाउंडर ने महिला से पूछा कि अगर लड़का हर मामले में परफेक्ट हो—स्वभाव अच्छा हो, लाइफस्टाइल शानदार हो, लेकिन वह 'अपर कास्ट' का न हो, तो क्या वह शादी करेगी? इस पर महिला का जवाब चौंकाने वाला था। उसने कहा कि अगर लड़के की कमाई 80 लाख रुपये सालाना से ज्यादा है तो उसे उसकी जाति से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसका मतलब साफ था, अगर पैसा बहुत ज्यादा है, तो जाति का बंधन फीका पड़ जाता है। यानी समाज में प्रतिष्ठा पाने के दो ही रास्ते बचे हैं—या तो आपका जन्म किसी खास जाति में हुआ हो या फिर आपके पास इतना पैसा हो कि जाति गौण (Secondary) हो जाए।

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महिला की इस विचारधारा के पीछे की वजह

जब महिला से उसकी इस विचारधारा के पीछे की वजह पूछी gai तो उसने अपनी हिचकिचाहट जाहिर की। उसने बताया कि वह खुद भी नहीं जानती कि वह ऐसा क्यों चाहती है लेकिन उसे डर है कि उसके माता-पिता किसी और बात पर राजी नहीं होंगे। यह साफ दिखाता है कि आज की युवा पीढ़ी, जो खुद को बहुत 'ओपन माइंडेड' कहती है, कहीं न कहीं आज भी पारिवारिक दबाव और पुराने सामाजिक ढर्रों के तले दबी हुई है।

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इंटरनेट पर छिड़ी बहस

इस कहानी के सामने आने के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। एक पक्ष का कहना है कि आज के दौर में शादी एक पवित्र बंधन के बजाय एक 'बिजनेस डील' बनती जा रही है। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि अरेंज मैरिज में हमेशा से स्टेटस ही देखा जाता रहा है इसमें कुछ नया नहीं है। वहीं मैरिज ब्यूरो की फाउंडर का कहना है कि जातिवाद अब खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उसने एक नया और 'पॉलिश्ड' रूप ले लिया है। 


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Content Editor

Rohini Oberoi

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