बस्तर पंडुम 2026 का भव्य समापन, गृहमंत्री अमित शाह बोले – बस्तर है भारत की आत्मा

punjabkesari.in Monday, Feb 09, 2026 - 06:43 PM (IST)

नेशनल डेस्क: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित ऐतिहासिक लालबाग मैदान में 9 फरवरी 2026 को संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम महोत्सव 2026 का भव्य और यादगार समापन हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने जनजातीय कला-संस्कृति पर आधारित विशाल प्रदर्शनी का गहन अवलोकन किया। अमित शाह ने अलग-अलग स्टॉल्स पर रुककर आदिवासी समुदायों की पारंपरिक कलाओं, हस्तशिल्प, खान-पान और जीवनशैली को करीब से देखा और कलाकारों की जमकर सराहना की।

प्रदर्शनी अवलोकन के बाद अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि “बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का सजीव प्रतिबिंब है।” उन्होंने यह भी दोहराया कि केंद्र सरकार नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और अब बस्तर की पहचान डर नहीं, बल्कि संस्कृति, कला और गौरव से होगी।

प्रदर्शनी में दिखी जनजातीय विरासत की जीवंत झलक

बस्तर पंडुम 2026 की प्रदर्शनी में जनजातीय जीवन की विविधता और प्रकृति से जुड़ाव को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। यहां प्रमुख रूप से पारंपरिक शिल्प,ढोकरा आर्ट,टेराकोटा और वुड कार्विंग,बांस एवं लौह शिल्प,सीसल कला,वेशभूषा और आभूषण दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा, हल्बा जनजातियों की पारंपरिक पोशाकें शामिल रहे।

 आदिवासी व्यंजनों और पेय ने खींचा ध्यान

प्रदर्शनी में बस्तर के पारंपरिक खान-पान की भी खास झलक देखने को मिली, जिनमें जोंधरी लाई के लड्डू,मंडिया पेज,आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल,पान बोबो, तीखुर और पारंपरिक पेय लांदा और सल्फी शामिल रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने और नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आदिवासी कला, शिल्प और परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता

12 अलग-अलग श्रेणियों में विजेताओं को सम्मानित किया गया—

  • जनजातीय नृत्य: गौर माड़िया नृत्य – बुधराम सोढ़ी (दंतेवाड़ा)
  • जनजातीय गीत: पालनार दल – मंगली एवं साथी (दंतेवाड़ा)
  • जनजातीय नाट्य: लेखम लखा – सुकमा
  • जनजातीय वाद्ययंत्र: रजऊ मंडदी – कोण्डागांव
  • जनजातीय वेशभूषा: गुंजन नाग – सुकमा
  • जनजातीय आभूषण: सुदनी दुग्गा – नारायणपुर
  • जनजातीय शिल्प: ओमप्रकाश गावड़े – कांकेर
  • जनजातीय चित्रकला: दीपक जुर्री – कांकेर
  • जनजातीय पेय: भैरम बाबा समूह – बीजापुर
  • जनजातीय व्यंजन: ताराबती – दंतेवाड़ा
  • आंचलिक साहित्य: उत्तम नाईक – कोण्डागांव
  • वन औषधि: राजदेव बघेल – बस्तर

विजेताओं को अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सम्मानित किया। टॉप-3 विजेताओं को राष्ट्रपति भवन में कला प्रस्तुति और सहभोज का विशेष आमंत्रण भी मिलेगा।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उद्घाटित यह तीन दिवसीय महोत्सव हजारों कलाकारों की भागीदारी के साथ जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का ऐतिहासिक प्रयास साबित हुआ।


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Ramanjot

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