BMW कारें बनाने वाले रोबोटों को मिली ‘सजा-ए-मौत’, ‘टर्मिनेटर’ के फरमान पर खुद भट्ठी में कूदकर दी जान
punjabkesari.in Tuesday, Oct 06, 2026 - 03:44 PM (IST)
New York: दुनिया में जहां इंसानों को रोबोटों से अपनी नौकरियां जाने का डर सता रहा है, वहीं एक कंपनी ने अपने पुराने रोबोटों को ही नौकरी से निकालने के बाद उनका ऐसा अंत किया कि कहानी किसी विज्ञान-कथा फिल्म जैसी लगती है। ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने वाली कंपनी फिगर एआई ने अपने पुराने रोबोटों की पूरी खेप को एक धधकती भट्ठी में डालकर नष्ट कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले के पीछे हॉलीवुड अभिनेता आर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर की एक सलाह भी जुड़ी थी मामला फिगर एआई ( Figure AI) के करीब दो साल पुराने F.02 मॉडल के रोबोटों का है।
ये रोबोट BMW की फैक्ट्रियों में कारों के निर्माण से जुड़े काम कर चुके थे। कंपनी का नया मॉडल तैयार होने के बाद पुराने रोबोटों को हटाने का फैसला किया गया। समस्या यह थी कि इन महंगी और अत्याधुनिक मशीनों को सामान्य कबाड़ में भेजना आसान नहीं था। कंपनी को आशंका थी कि उनके तकनीकी हिस्से और महंगे उपकरण चोरी हो सकते हैं। दूसरी ओर, प्रत्येक रोबोट को अलग-अलग खोलकर उसके पुर्जे निकालने में काफी समय और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत पड़ती।
CEO ने मांगी सलाह, ‘टर्मिनेटर’ स्टार ने दिया जवाब
फिगर एआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रेट एडकॉक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लोगों से पूछा कि पुराने रोबोटों का क्या किया जाए। इसी दौरान हॉलीवुड अभिनेता आर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर का जवाब चर्चा में आ गया। उनकी चर्चित फिल्म ‘टर्मिनेटर 2’ के एक दृश्य में उनका किरदार पिघली हुई धातु में समा जाता है। इसी संदर्भ में आर्नोल्ड ने रोबोटों को “पिघला दो” जैसी सलाह दी। कंपनी को यह विचार पसंद आया, लेकिन असली समस्या अब शुरू हुई। इन रोबोटों में लिथियम-आयन बैटरियां लगी थीं। इसलिए अमेरिका और मैक्सिको की कई धातु भट्टियों ने ऐसे रोबोटों को अपनी महंगी औद्योगिक भट्टियों में डालने से इनकार कर दिया।
आखिरकार फिगर एआई ने इन मशीनों को फिनलैंड की एक फाउंड्री तक पहुंचाया, जहां उन्हें धातु पिघलाने वाली बड़ी औद्योगिक भट्ठी में नष्ट किया गया। बताया गया कि रोबोटों को स्वचालित तरीके से भट्ठी में डालने की तैयारी की गई थी। अंतिम प्रक्रिया के लिए 75 टन की इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस का इस्तेमाल किया गया। रोबोटों को एक-एक करके भट्ठी में डाला गया और पूरी प्रक्रिया करीब 20 मिनट में पूरी की गई। इस तरह कभी कारों के निर्माण में इंसानों के साथ काम कर चुके ये महंगे ह्यूमनॉइड रोबोट आखिरकार पिघली हुई धातु के बीच खत्म हो गए।
पहले भी ‘रोबोट आत्महत्या’ की खबरें आईं
रोबोटों के अजीबोगरीब हादसे इससे पहले भी सुर्खियां बन चुके हैं। वर्ष 2017 में अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में ‘स्टीव’ नाम का सुरक्षा रोबोट फव्वारे में गिर गया था। उस घटना को लोगों ने मजाक में रोबोट की ‘आत्महत्या’ कहा था। 2024 में दक्षिण कोरिया में एक सरकारी विभाग का कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रोबोट सीढ़ियों के नीचे गिरा मिला था। बाद में इन घटनाओं को तकनीकी गड़बड़ी से जोड़कर देखा गया। रोबोटों में दर्द या संवेदना जैसी क्षमताओं को लेकर वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ शोध कर रहे हैं। हालांकि मौजूदा रोबोटों में इंसानों जैसी चेतना या भावनाएं होने का कोई स्थापित प्रमाण नहीं है। इसलिए यह कहना कि ये मशीनें भविष्य में इंसानों से अपनी ‘बेइज्जती’ या विनाश का बदला लेंगी, फिलहाल विज्ञान से ज्यादा विज्ञान-कथा का विषय है।
