GPS फेल होने के बाद भी मिलेगी सटीक लोकेशन, भारत समेत 4 देशों के वैज्ञानिकों ने बनाई नई हाईटेक ट्रैकिंग तकनीक

punjabkesari.in Monday, Jul 20, 2026 - 12:02 PM (IST)

इंटरनेशनल डेस्क : जीपीएस सिग्नल कमजोर पड़ने या पूरी तरह गायब हो जाने की समस्या जल्द ही बीते समय की बात हो सकती है। वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने ऐसी नई पोजिशनिंग तकनीक विकसित की है, जो भूमिगत स्थानों, टनलों और ऊंची इमारतों के बीच भी सटीक लोकेशन बताने में सक्षम होगी। इस नई प्रणाली को भविष्य के स्मार्ट ट्रांसपोर्ट और आपातकालीन सेवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

चार देशों के वैज्ञानिकों ने मिलकर विकसित की तकनीक
इस अत्याधुनिक तकनीक को क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के नेतृत्व में भारत, चीन और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसका नाम ज्वाइंट डीएएस एंड जीएनएसएस (JDG) रखा गया है। हाल ही में स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित IEEE अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस प्रणाली को पहली बार दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया। इस शोध में भारत की पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी, चीन की शी आन जियाओतोंग यूनिवर्सिटी और अमेरिका की शिकागो स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

जीपीएस बंद होने पर भी बताएगी सटीक लोकेशन
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नई तकनीक पारंपरिक सैटेलाइट आधारित जीपीएस पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहती। यदि किसी कारण से जीपीएस सिग्नल उपलब्ध नहीं होता, तब भी यह सिस्टम आसपास मौजूद फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क की मदद से व्यक्ति या वाहन की स्थिति का सटीक पता लगा सकता है। इससे उन स्थानों पर भी लोकेशन ट्रैक करना संभव होगा, जहां सामान्य जीपीएस अक्सर काम करना बंद कर देता है।

फाइबर ऑप्टिक केबल बनेंगी स्मार्ट सेंसर
नई तकनीक में पहले से बिछी इंटरनेट फाइबर ऑप्टिक केबलों को विशेष सेंसर की तरह इस्तेमाल किया जाता है। जब कोई वाहन या व्यक्ति इन केबलों के आसपास से गुजरता है, तो जमीन में पैदा होने वाले सूक्ष्म कंपन को सिस्टम रिकॉर्ड कर लेता है। इसके बाद यह जानकारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉडल तक पहुंचाई जाती है, जो इन संकेतों का विश्लेषण कर वास्तविक समय (Real-Time) में सटीक लोकेशन तैयार करता है।

स्मार्ट ट्रैफिक और सेल्फ-ड्राइविंग सिस्टम को मिलेगा फायदा
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, आपातकालीन बचाव सेवाओं, स्वचालित (Self-Driving) वाहनों और इनडोर नेविगेशन सिस्टम को अधिक विश्वसनीय बनाएगी। विशेष रूप से भूमिगत रास्तों, मेट्रो नेटवर्क, सुरंगों और घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में इसका उपयोग बेहद प्रभावी साबित हो सकता है।


 


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Content Editor

Purnima Singh

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