वेनेजुएला-अमेरिका जंग से बढ़ेंगी दुनिया की मुसीबतें ! जानें विवाद की मुख्य जड़, भारत पर पड़ेगा क्या असर?
punjabkesari.in Saturday, Jan 03, 2026 - 04:35 PM (IST)
International Desk:लैटिन अमेरिका में तनाव चरम पर है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। तेल, सत्ता और भू-राजनीतिक प्रभाव की इस लड़ाई ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को चुनौती दी है, बल्कि दुनिया और भारत की अर्थव्यवस्था व कूटनीति पर भी इसके दूरगामी असर पड़ने की आशंका है।वेनेजुएला अमेरिका टकराव केवल दो देशों की जंग नहीं, बल्कि तेल, सत्ता और वैश्विक प्रभाव की लड़ाई है। अगर हालात बिगड़े, तो इसका असर पूरी दुनिया और भारत की अर्थव्यवस्था व कूटनीति पर साफ दिखेगा।
अमेरिका-वेनेजुएला जंग के मुख्य कारण
तेल और ऊर्जा संसाधन
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा सिद्ध तेल भंडार है। अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र में अपने ऊर्जा हित और प्रभाव बनाए रखना चाहता है। मादुरो सरकार की नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए बाधा मानी जाती हैं।
मादुरो सरकार की वैधता पर विवाद
अमेरिका और उसके सहयोगी राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अवैध मानते रहे हैं। चुनावों में धांधली, मानवाधिकार उल्लंघन और विपक्ष के दमन के आरोप इस टकराव की राजनीतिक नींव हैं।
रूस, ईरान और चीन से बढ़ती नजदीकी
वेनेजुएला का रूस और ईरान के साथ सैन्य व तकनीकी सहयोग, जैसे ड्रोन और हथियार अमेरिका को सीधे चुनौती देता है। वाशिंगटन इसे अपने प्रभाव क्षेत्र में बाहरी दखल मानता है।
प्रतिबंध और जवाबी सख्ती
अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था चरमराई। मादुरो सरकार ने इसे “आर्थिक युद्ध” बताया, जिससे टकराव और गहरा गया।
लैटिन अमेरिका में रणनीतिक दबदबा
अमेरिका नहीं चाहता कि लैटिन अमेरिका में कोई सरकार उसके खिलाफ सैन्य या वैचारिक धुरी बनाए। वेनेजुएला इस संघर्ष का केंद्र बन गया है।
दुनिया पर संभावित प्रभाव
- तेल की कीमतों में उछाल: आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक बाजार अस्थिर हो सकते हैं।
- क्षेत्रीय अस्थिरता: लैटिन अमेरिका में शरणार्थी संकट और राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।
- महाशक्तियों की खींचतान: रूस–चीन बनाम अमेरिका की टकराहट तेज हो सकती है।
- संयुक्त राष्ट्र पर दबाव: अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता पर बहस गहराएगी।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव
भारत तेल आयात पर निर्भर है। कीमतें बढ़ने से महंगाई और चालू खाता घाटा प्रभावित हो सकता है।
कूटनीतिक संतुलन की चुनौती
भारत के अमेरिका से रणनीतिक संबंध हैं, लेकिन वह संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का भी समर्थक है। संतुलित रुख जरूरी होगा।
भारतीय प्रवासी और व्यापार
लैटिन अमेरिका में भारतीय व्यवसायों और प्रवासियों की सुरक्षा चिंता का विषय बन सकती है।
वैश्विक मंचों पर भूमिका
भारत शांति, संवाद और कूटनीति की अपील कर मध्यस्थ या संतुलनकारी आवाज बन सकता है।
