Little Angel Alin: 10 महीने की नन्हीं परी ने जाते-जाते 4 बच्चों को दी नई जिंदगी, राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 11:39 AM (IST)
Kerala Youngest Organ Donor Alin : मौत के बाद भी कोई कैसे अमर हो सकता है, इसकी मिसाल पेश की है केरल की मात्र 10 महीने की मासूम आलिन शेरिन अब्राहम ने। वह केरल की सबसे कम उम्र की अंग दाता (Organ Donor) बन गई हैं। ब्रेनडेड घोषित होने के बाद आलिन के माता-पिता ने एक ऐसा साहसी फैसला लिया जिसने चार अन्य परिवारों के बुझते हुए चिरागों को फिर से रोशन कर दिया। मंगलवार को नेदुंगदप्पल्ली सेंट थॉमस सीएसआई चर्च में जब इस नन्हीं जान को अंतिम विदाई दी गई तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। केरल सरकार ने मासूम के इस महान बलिदान को सम्मान देते हुए उसे पूरे राजकीय सम्मान के साथ विदा किया।
दुखद हादसा और महान फैसला
5 फरवरी को एक सड़क दुर्घटना में आलिन गंभीर रूप से घायल हो गई थी। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और उसे ब्रेनडेड घोषित कर दिया गया। अपनी इकलौती बेटी को खोने के असहनीय दुख के बीच पिता अरुण अब्राहम और मां शेरिन ने अंग दान का फैसला किया। आलिन का लीवर, दोनों किडनी, कॉर्निया और हार्ट वॉल्व दान किए गए। इन अंगों की मदद से अब चार अन्य बच्चे एक सामान्य जीवन जी सकेंगे।
चमेली के फूलों में लिपटी अंतिम यात्रा
सुबह जब आलिन का पार्थिव शरीर चमेली के फूलों से सजे एक छोटे से सफेद ताबूत में घर लाया गया तो वहां जनसमूह उमड़ पड़ा। केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी, राज्य मंत्री वीना जॉर्ज और वीएन वासवन सहित कई दिग्गजों ने इस नन्हीं देवदूत को श्रद्धांजलि दी।
दादा का भावुक संदेश: वह अपना कर्तव्य पूरा कर लौट गई
चर्च में अंतिम प्रार्थना के दौरान आलिन के दादा, रेजी सैमुअल ने एक ऐसा संदेश पढ़ा जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया। उन्होंने कहा, हमारी बच्ची ने 20 महीने का सफर तय किया, 10 महीने गर्भ में और 10 महीने इस धरती पर। लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मुझे दुख है? हां, दर्द तो बहुत है लेकिन हमें सांत्वना है कि हमारी पोती अब चार बच्चों के रूप में जीवित है। ईश्वर ने उसे जिस मकसद के लिए भेजा था वह उसे पूरा कर वापस लौट गई है।
दो परिवारों का मिलन
इस दौरान एक बेहद भावुक पल तब आया जब श्रेया (वह बच्ची जिसे आलिन की किडनी मिली है) के दादा चंद्रन वहां पहुंचे। उन्होंने आलिन के ताबूत के पास खड़े होकर कहा, मैं उस नन्हीं परी का शुक्रिया अदा करने आया हूं जिसने मेरी पोती को नया जीवन दिया। मैं एक दादा हूं और समझ सकता हूं कि इस परिवार पर क्या बीत रही है।
मानवता की मिसाल
आलिन की यह कहानी केवल एक दुखद हादसे की खबर नहीं है बल्कि यह अंग दान के प्रति जागरूकता का एक बड़ा संदेश है। एक नन्हा जीवन जो बहुत संक्षिप्त था लेकिन उसने दुनिया पर जो छाप छोड़ी है वह सदियों तक याद रखी जाएगी।
