शीना बोरा हत्याकांड : घटनाक्रम

punjabkesari.in Wednesday, May 18, 2022 - 05:55 PM (IST)

मुंबई, 18 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मुख्य आरोपी इंद्राणी मुखर्जी को उनकी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में बुधवार को जमानत दे दी। हत्याकांड का पूरा घटनाक्रम निम्नलिखित है।

24 अप्रैल, 2012 : शीना बोरा की कंपनी को उनका त्याग पत्र मिला, जिसके बारे में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बाद में दावा किया था कि उनके भाई मिखाइल द्वारा उनकी मृत्यु के बाद यह भेजा गया था।

23 मई, 2012 : स्थानीय पुलिस को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में एक क्षत-विक्षत शव मिला। बाद में सीबीआई ने दावा किया कि यह शीना का शव है।

21 अगस्त, 2015 : इंद्राणी मुखर्जी के पूर्व चालक श्यामवर राय को पुलिस ने अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया। उसने पुलिस को तीन साल पहले शीना की हत्या और अपराध में इंद्राणी की कथित संलिप्तता के बारे में बताया।

25 अगस्त, 2015 : इंद्राणी मुखर्जी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया।

26 अगस्त, 2015 : इंद्राणी मुखर्जी के पूर्व पति संजीव खन्ना को कोलकाता में गिरफ्तार किया गया।

एक सितंबर, 2015 : इंद्राणी मुखर्जी के पूर्व साथी कोलकाता निवासी सिद्धार्थ दास ने शीना बोरा के जैविक पिता होने का दावा किया।

18 सितंबर, 2015 : मामला सीबीआई को स्थानांतरित। केंद्रीय एजेंसी ने इंद्राणी मुखर्जी, संजीव खन्ना और श्यामवर राय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
19 नवंबर, 2015 : इंद्राणी के तत्कालीन पति पीटर मुखर्जी को सीबीआई ने गिरफ्तार किया ।

जनवरी 2016 : सीबीआई ने इंद्राणी मुखर्जी और श्यामवर राय के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में पूरक आरोपपत्र में पीटर मुखर्जी का भी नाम भी शामिल किया गया।

जनवरी-फरवरी 2017 : मामले में सुनवाई शुरू। सीबीआई की विशेष अदालत ने इंद्राणी, पीटर मुखर्जी और संजीव खन्ना पर शीना बोरा की हत्या के अलावा साजिश, अपहरण, सबूत नष्ट करने और झूठी जानकारी देने को लेकर आरोपित किया।

4 अक्टूबर, 2019 : इंद्राणी और पीटर मुखर्जी ने कैद में रहते हुए अपनी शादी खत्म करने का फैसला किया। मुंबई के परिवार न्यायालय ने उनका तलाक मंजूर किया।
6 फरवरी, 2020 : पीटर मुखर्जी को मुंबई उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए जमानत दे दी कि मामले में उनकी संलिप्तता को साबित करने के लिए प्रथम दृष्टया कोई सबूत नहीं है।

6 फरवरी, 2020 : मुंबई उच्च न्यायालय ने इंद्राणी की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि श्यामवर राय ने उन्हें मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया और बीमारियों के उनके दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।

20 मार्च, 2020 : सीबीआई द्वारा जमानत आदेश को चुनौती नहीं देने के फैसला के बाद पीटर मुखर्जी आर्थर रोड जेल से रिहा ।
18 मई, 2022 : उच्चतम न्यायालय ने इंद्राणी मुखर्जी की गिरफ्तारी के लगभग सात साल बाद जमानत दी।



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PTI News Agency

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