शिवसेना कार्यकर्ताओं ने ''''अडानी हवाईअड्डा'''' साइनबोर्ड को तोड़ा; कंपनी ने कहा, नाम नहीं बदला गया

2021-08-02T23:26:38.263

मुंबई, दो अगस्त (भाषा) शिवसेना कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सोमवार दोपहर मुंबई में हवाईअड्डे के समीप छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास ''अडानी हवाईअड्डा'' लिखे एक साइनबोर्ड को कथित तौर पर तोड़ दिया। इस घटना के बाद इस हवाई अड्डे का संचालन करने वाले कॉर्पोरेट समूह ने स्पष्ट किया कि हवाई अड्डे की ब्रांडिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
कार्यकर्ताओं ने साइनबोर्ड के खिलाफ नारेबाजी की। हवाई अड्डे का नाम 17वीं सदी के मराठा योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखा गया है।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कुछ कार्यकर्ता बाद में पास में स्थित वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर आ गए, जिससे शहर के मुख्य उत्तर-दक्षिण मार्ग पर कुछ देर के लिए यातायात बाधित हो गया।

महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार की एक प्रमुख घटक पार्टी राकांपा ने कहा कि अडानी समूह की ओर से उसका नाम "बदलना" गलत है, जिसने पिछले महीने मुंबई हवाईअड्डे का प्रबंधन अपने हाथ में लिया था।
वरिष्ठ निरीक्षक अलका मांडवे ने कहा कि घटना के बाद पुलिस ने शिवसेना के चार कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और उन्हें विले पार्ले पुलिस थाने ले आई और बाद में उन्हें रिहा कर दिया, लेकिन अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

मांडवे ने कहा, "हम अभी भी मामले की जांच कर रहे हैं और किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।"
इस बीच, अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड के एक प्रवक्ता ने कहा, "मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अडानी एयरपोर्ट्स की ब्रांडिंग के आसपास की घटनाओं के आलोक में, हम पूरी तरह से आश्वस्त करते हैं कि एएएचएल ने केवल पिछली ब्रांडिंग को बदलकर अडानी एयरपोर्ट्स ब्रांडिंग किया है और छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (सीएसएमआईए) की टर्मिनल पर ब्रांडिंग या पोजिशनिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है।" बयान में कहा गया, "सीएसएमआईए में ब्रांडिंग भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के मानदंडों और दिशानिर्देशों के अनुसार किया गया है। एएएचएल बड़े पैमाने पर विमानन समुदाय के हित में सरकार द्वारा निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का पालन करना जारी रखेगा।"
इस बीच, इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, महाराष्ट्र के मंत्री और राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि अडानी समूह की ओर से हवाई अड्डे का नाम "बदलना" गलत है।
पत्रकारों से बात करते हुए, मलिक ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का स्वामित्व अडानी समूह के पास चला गया, जब उसने जीवीके समूह से सभी शेयर खरीदे। इसका मतलब यह नहीं है कि इसका नाम बदलकर अडानी एयरपोर्ट कर देना चाहिए।
मंत्री ने कहा, "इसे प्रबंधन के सभी अधिकार हैं, लेकिन हवाईअड्डे का नाम बदलने का कोई अधिकार नहीं है।"
उन्होंने कहा कि निजी कॉरपोरेट समूह को लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''वहां अडानी एयरपोर्ट लिखना गलत है और इससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। अडानी (समूह) को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
गौरतलब है कि अडानी समूह ने पिछले महीने कहा था कि उसने जीवीके समूह से मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया है।
मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यात्री और माल यातायात दोनों मामले में देश का दूसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा (दिल्ली के आईजीआईए के बाद) है।
कंपनी ने एक बयान में कहा कि मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के जुड़ने के साथ, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड का अब भारत के हवाई माल यातायात के 33 प्रतिशत पर नियंत्रण हो गया है।

हवाई अड्डों पर ब्रांडिंग के संबंध में ऐसा ही मुद्दा लगभग सात महीने पहले केंद्र द्वारा संचालित भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) द्वारा उठाया गया था- जिन हवाई अड्डों का प्रबंधन अडानी समूह कर रहा है।

जनवरी में एएआई की तीन समितियों ने पाया कि अडानी समूह ने अहमदाबाद, मंगलुरु और लखनऊ के हवाई अड्डों पर रियायत समझौतों में निर्धारित ब्रांडिंग मानदंडों का उल्लंघन किया है, जिनके प्रबंधन का काम समूह ने पिछले साल लिया था।
नतीजतन, अडानी समूह ने एएआई के साथ हस्ताक्षर किए गए रियायत समझौतों के अनुसार ब्रांडिंग और डिस्प्ले में बदलाव करना शुरू कर दिया।

एएआई ने कहा कि 29 जून को लखनऊ और मंगलुरु हवाईअड्डों पर ब्रांडिंग और डिस्प्ले में बदलाव की प्रक्रिया चल रही थी और अहमदाबाद हवाईअड्डे पर इसे पूरा कर लिया गया था।

अडानी समूह ने फरवरी 2019 में लखनऊ, मंगलुरु और अहमदाबाद में हवाईअड्डों को चलाने के लिए बोली जीती। इस समूह की कंपनियां- अडानी लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एएलआईएएल), अडानी मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एएमआईएएल) और अडानी अहमदाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एएआईएएल) ने फरवरी 2020 में एएआई के साथ रियायत समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
एएएचएल के तहत काम करने वाली इन तीन कंपनियों ने अक्टूबर और नवंबर 2020 में हवाई अड्डों का कार्यभार संभाला।

दिसंबर 2020 में एएआई ने तीन हवाई अड्डों पर ब्रांडिंग और डिस्प्ले को रियायत समझौतों के अनुकूल नहीं पाया। इसलिए, उसने एएलआईएएल, एएमआईएएल और एएआईएएल को पत्र लिखकर "सुधारात्मक उपाय" करने के लिए कहा।

हालांकि, इन कंपनियों ने दिसंबर के अंत में जवाब दिया कि उन्होंने समझौतों के ब्रांडिंग मानदंडों का उल्लंघन नहीं किया है।
एक महीने बाद, एएआई ने तीन हवाई अड्डों पर सभी होर्डिंग्स और डिस्प्ले का "संयुक्त सर्वेक्षण" करने के लिए तीन अलग-अलग समितियों का गठन किया और जांच की कि क्या वे रियायत समझौतों के अनुकूल हैं।

प्रत्येक समिति में चार सदस्य थे, जिसमें अडानी समूह की कंपनी के एक कार्यकारी अधिकारी, जो हवाई अड्डे का संचालन कर रहा है, केंद्र द्वारा संचालित इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड के एक अधिकारी और एएआई के दो अधिकारी शामिल थे।

जनवरी के अंत में लखनऊ हवाई अड्डा पर बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें उसने मानदंडों का उल्लंघन पाया। मंगलुरु और अहमदाबाद में हवाई अड्डों पर बनी अन्य दो समितियों ने भी इसी तरह के उल्लंघन पाए थे।


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