कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने एनईपी का बचाव किया, कहा-यदि आरएसएस का एजेंडा है तब भी कुछ गलत नहीं

09/25/2021 10:23:35 AM

बेंगलुरु, 24 सितंबर (भाषा) कर्नाटक विधानसभा में शुक्रवार को मॉनसून सत्र के अंतिम दिन राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन के मुद्दे पर हंगामा हुआ और कांग्रेस द्वारा इसे आरएसएस या नागपुर शिक्षा नीति बताए जाने पर मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा कि यदि ऐसा है तब भी कुछ गलत नहीं है।

सदन को स्थगित किए जाने से लगभग एक घंटा पहले कांग्रेस सदस्य हंगामा करते हुए आसन के समक्ष पहुंच गए। पहले उन्होंने सत्र की अवधि बढ़ाए जाने की मांग की और फिर एनईपी के क्रियान्वयन के मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का एजेंडा करार दिया।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नीति का बचाव करते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया और कहा कि एनईपी इटली की या रोम की शिक्षा नीति या मैकाले की शिक्षा नीति नहीं है जो कांग्रेस चाहती है। इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।

कांग्रेस नेता सिद्धरमैया ने सत्र बढ़ाए जाने की मांग करते हुए कहा, ‘‘एनईपी इस देश के भविष्य का मामला है, इस पर चर्चा होनी चाहिए... हमारे अध्यक्ष (प्रदेश कांग्रेस प्रमुख डी के शिवकुमार) ने इसे नागपुर शिक्षा नीति कहा है।’’
इसके बाद, सदन में मौजूद शिवकुमार ने कहा कि ‘‘नागपुर’’ शिक्षा नीति पर चर्चा होनी चाहिए।

इस टिप्पणी से नाराज दिख रहे सी टी रवि सहित भाजपा के कुछ विधायक चिल्लाकर कहने लगे, ‘‘हां है... लेकिन यह रोम या इटली की शिक्षा नीति नहीं है।’’
सिद्धरमैया ने आगे कहा कि यह आरएसएस का एजेंडा है, इसलिए इसे किसी भी कीमत पर क्रियान्वित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे राज्य में बिना उचित चर्चा के लागू किया जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि आरएसएस या नागपुर एजेंडे में क्या गलत है, यदि यह छात्रों और देश के लिए अच्छा है।

सिद्धरमैया ने इसके जवाब में कहा, ‘‘आएसएस आपकी पृष्ठभूमि हो सकती है।’’
कागेरी ने जवाब में कहा, ‘‘मैं अब भी आरएसएस... हूं।’’
इस बीच मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘‘राष्ट्र, राष्ट्रवाद और आरएसएस एक ही हैं। आरएसएस का मतलब है राष्ट्रवाद। यदि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आरएसएस का एजेंडा है तब भी कुछ गलत नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि देश और इसके बच्चों के लिए क्या अच्छा है। एनईपी 21वीं सदी के लिए हमारे बच्चों को तैयार करने और वैश्विक मानकों के लिए है।’’
यह उल्लेख करते हुए कि देश को मैकाले की शिक्षा नीति की जरूरत नहीं है जो अंग्रेज लेकर आए थे, बोम्मई ने कहा, ‘‘यह (मैकाले की शिक्षा नीति) हमारे देश के प्रतिकूल रही है और इसने हमारे बच्चों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया है।’’
सिद्धरमैया ने इसके जवाब में कहा, ‘‘यह (एनईपी) कुछ और नहीं, बल्कि तानाशाही, हिटलर (शाही) है। यह आरएसएस की शिक्षा नीति है।’’
बोम्मई ने इसके बाद पलटवार करते हुए कहा, ‘‘उन्हें (कांग्रेस) इसे आरएसएस की शिक्षा नीति कहने दीजिए, हम पर इससे कोई असर नहीं पड़ता, असल में, हम इसे स्वीकार करते हैं। हां, यह आरएसएस की शिक्षा नीति है... राष्ट्रवाद और आरएसएस एक ही हैं।’’
उन्होंने कहा कि एनईपी पर डॉ. कस्तूरीरंगन जैसी प्रसिद्ध हस्तियों के नेतृत्व में तीन साल तक चर्चा हुई है और यह इस देश के बच्चों के भले के लिए बदलाव लाने पर केंद्रित है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘एनईपी एक ऐसी नीति है जिसे भारतीयों ने भारतीयों और भारत के बच्चों के लिए तैयार किया है। उनकी (कांग्रेस) पार्टी के लोग ‘विदेशी’ हैं, इसलिए उनकी मैकाले की शिक्षा नीति है, वे विदेशी शिक्षा नीति चाहते हैं। कांग्रेस की शिक्षा नीति गुलामी की है, हमारा कदम देश के स्वाभिमान के लिए है।’’
विधानसभा में हंगामे के बीच अध्यक्ष ने विभिन्न समितियों के प्रमुखों से सदन के समक्ष रिपोर्ट रखने को कहा। इसके बाद, उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर से कोविड-19 की दूसरी लहर पर सिद्धरमैया द्वारा बृहस्पतिवार को शुरू की गई चर्चा पर जवाब देने को कहा।
हालांकि, सदन में कांग्रेस सदस्यों की ओर से भाजपा नीत केंद्र सरकार व शिक्षा नीति के खिलाफ नारेबाजी जारी रही। इस पर भाजपा सदस्यों ने भी जवाबी नारे लगाए। हंगामा थमते न देख अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।



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