सड़क पर बर्तन धोने से लेकर जज बनने तक: मुहम्मद क़ासिम की बड़ी कामयाबी
punjabkesari.in Sunday, Sep 17, 2023 - 08:20 PM (IST)
नेशनल डेस्क: मज़हर सुबहानी "कहते हैं बदलते हुए वक़्त के साथ अगर इन्सान अपने आपको ना बदले तो वो पीछे रह जाता है", यही वजह है कि इस ज़मीन पर अनगिनत ऐसे लोग मौजूद हैं ,जिन्होंने अपने आपको वक़्त के साथ साथ बदला, अपनी ज़िंदगी में ऐसे सकारात्मक इन्क़िलाब (परिवर्तन) लाए, जिसकी वजह से उनका अतीत उनके भविष्य से बिल्कुल अलग नज़र आ रहा है, उन्हीं इन्क़िलाबी लोगों में से आज मुलाक़ात कीजिए भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश के मशहूर शहर संभल के रहने वाले मुहम्मद क़ासिम से।
मुहम्मद क़ासिम की उम्र 29 साल है, संभल उतर प्रदेश के रहने वाले हैं, मुहम्मद क़ासिम का ताल्लुक़ एक ऐसे परिवार से है जिसकी माली हालत बहुत खराब थी, कुछ साल पहले मुहम्मद क़ासिम अपने पिता के साथ सड़क किनारे हलीम का ठेले लगाते थे,और गंदी प्लेटें धोया करते थे, क़ासिम का अतीत, मुश्किलों और परेशानियों से भरा हुआ था, एक मेहनती बाप का बेटा मुहम्मद क़ासिम शिक्षा के साथ साथ अपने पिता के काम में हाथ बटाया करता था, जिससे पिता के काम में आसानी हो जाती, घर के खर्च को सँभालने के लिए यही हलीम का एक ठेला था।
मुहम्मद क़ासिम ने प्रारंभिक शिक्षा उत्तरप्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूल से पाई, इसके बाद उन्होंने वारसी जूनियर हाई स्कूल में दाख़िला लिया, हाई स्कूल में फ़ेल हो गए, फिर क़ासिम ने दोबारा हाई स्कूल का फ़ार्म भारा और प्राईवेट से हाई स्कूल और इंटर मुकम्मल किया। आश्चर्य की बात ये है कि क़ासिम सिर्फ अपने घर में नहीं बल्कि अपने पूरे ख़ानदान में ऐसे शख़्स थे, जिन्होंने पहली बार स्कूल की शक्ल देखी थी, यूनिवर्सिटी जाना तो दूर उनके ज़हन में यूनीवर्सिटी का तसव्वुर भी नहीं था कि यूनीवर्सिटी क्या होती है?
उच्च शिक्षा के लिए मुहम्मद क़ासिम को अपना वतन छोड़ना पड़ा, मुहम्मद क़ासिम स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद अलीगढ़ आए और यहां से बीएएलएलबी की तैयारी की, भारत की मशहूर शैक्षणिक संस्थान अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी में एंट्रेंस टेस्ट दिया, इमतिहान में कामयाब हुए और यहां उन्हें दाख़िला मिल गया। दाख़िला मिलने पर मुहम्मद क़ासिम की शिक्षा की लालसा को एक नई ताक़त मिल गई, बीएएलएलबी करने के बाद एलएलएम की तैयारी की, और भारत की टॉप यूनीवर्सिटी, दिल्ली यूनीवर्सिटी (DU) में एडमिशन के लिए टेस्ट दिया और इस टेस्ट में अव्वल मुक़ाम हासिल किया, कामयाबीयों का ये सिलसिला यहीं नहीं रुका, बल्कि एलएलएम में एडमिशन के बाद मुहम्मद क़ासिम ने UGC-NET का परीक्षा दिया और 2021 में NET क्लियर कर वे अपने लोगों के लिए फ़ख़्र की वजह बन गए। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मुहम्मद कासिम ने अपनी पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया, पूरी मेहनत और लगन से अपनी पढ़ाई जारी रखी।
मोहम्मद क़ासिम कहते हैं,“छात्र जीवन के दौरान जब मैं अलीगढ़ में था तो मुझे अपने परिवार की ख़ुशी और ग़म की कई रस्में छोड़नी पड़ीं। मैं अपनी दो बहनों की विदाई में भी शामिल नहीं हो सका।कामयाबी का तक़ाज़ा था कि ख़ुशीयों को क़ुर्बान किया जाये, लिहाज़ा मैंने ये क़ुर्बानी भी दे दी और आज मुझे इन सभी बलिदानों का प्रतिफल मिला है।” कासिम की निरंतर कड़ी मेहनत और समर्पण ने उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाई, लेकिन कौन जानता था कि सड़क के किनारे बर्तन धोने वाला, पीड़ितों को न्याय देगा, अब मुहम्मद कासिम के लिए अपने सपनों को पूरा करने का समय आ गया था।
उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग पीसीएस परीक्षा का परिणाम 30 अगस्त 2022 को जारी हुआ, कासिम ने 135वीं रैंक हासिल की और अपने परिवार के साथ-साथ शहर के लोगों का भी गौरव बन गए। इस बड़ी सफलता के बाद कासिम के दोस्त और परिवार वाले सभी खुशी से झूम रहे हैं। मुहम्मद कासिम अपनी सफलता का श्रेय देते हुए कहते हैं,"आज जब मैं सभी का शुक्रिया अदा कर रहा हूं तो मैं उन्हें कैसे भूल सकता हूं? लोगों ने मेरा मज़ाक़ उड़ाया, मुझ पर जुमले कसे।”
मेरी कमज़ोरी का मज़ाक़ उड़ाया, यह मज़ाक़, यह जुमले,मेरे काम आए और मैंने इन नकारात्मक शब्दों के साथ अपनी खामियों को ठीक किया।” मुहम्मद क़ासिम अपनी कामयाबी का सेहरा माँ के सर बाँधते हैं, वे कहते हैं, "यक़ीनन मेरी इस कामयाबी के पीछे ला-तादाद लोगों की दुआएं, उनकी मुहब्बतें, और उनकी शुभकामनाएं ज़रूर रही हैं, मेरे परिवार के लोगों का बहुत सहारा रहा है, लेकिन मैं आजीवन अपनी मां क़र्ज़दार रहूँगा, जिन्होंने तंग-दस्ती में भी, मेहनत मशक़्क़त करके, पैसा क़र्ज़ लेकर, मुझे सहारा दिया और मेरी हर ज़रूरत को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी।"
नई पीढ़ी को पैग़ाम देते हुए मुहम्मद कासिम कहते हैं कि-"अगर संसाधन सीमित हैं तो हमें घबराना नहीं चाहिए, हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, हमें प्रयास करते रहना चाहिए, क्योंकि प्रयास करने वालों की कभी हार नहीं होती"। आज क़ासिम अपनी लगातार मेहनत और लगन के कारण उन सभी को न्याय दिलाने के हकदार बन गए हैं जो लंबे समय से जु़ल्म और अन्याय से पीड़ित हैं। साथ ही, कासिम उन सभी के लिए एक आदर्श हैं, जो हालात की परवाह किए बग़ैर, कामयाबी को अपना मुक़द्दर बनाना चाहते हैं।
