Trump Maduro Arrest: ट्रंप के पास कौन सी है सुपरपावर? क्या सच में किसी विदेशी राष्ट्रपति को करवा सकते हैं गिरफ्तार?

punjabkesari.in Tuesday, Jan 06, 2026 - 11:35 AM (IST)

 इंटरनेशनल डेस्क: बीती 3 जनवरी को वेन्जुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका के न्यूयार्क ले जाया गया। इस गिरफ्तारी से पहले अमेरिका ने वहां पर हवाई हमले किए। राष्ट्रपति की गिरफ्तारी पर यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के पास इतनी पावर है कि वो किसी भी देश के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करवा सकते हैं? सीधे शब्दों में समझे तो इसका जवाब है नहीं। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार किसी भी देश के मौजूदा राष्ट्रपति को 'हेड ऑफ स्टेट इम्युनिटी' (Head of State Immunity) यानी कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है। यह नियम कहता है कि जब तक कोई व्यक्ति अपने देश का पद संभाले हुए है, उसे किसी दूसरे देश की अदालत में न तो घसीटा जा सकता है और न ही गिरफ्तार किया जा सकता है।

इस सवाल के जवाब के साथ ही दूसरा सवाल यह उठता है कि फिर वेन्जुऐला के राष्ट्रपकि मादुरो की गिरफ्तारी कैसे हुई?

फिर मादुरो की गिरफ्तारी कैसे हुई?

मादुरो के मामले में अमेरिका ने एक बहुत ही चतुर कानूनी 'लूपहोल' (Loophole) का इस्तेमाल किया है। अमेरिका 2018 और 2024 के चुनावों में धांधली का हवाला देते हुए निकोलस मादुरो को वेनेजुएला का वैध राष्ट्रपति मानता ही नहीं है। अमेरिकी न्याय विभाग ने मादुरो को 'राष्ट्रपति' के बजाय एक 'नार्को-टेररिस्ट' (नशीली दवाओं का तस्कर) घोषित कर रखा है। वाशिंगटन का तर्क है कि एक अपराधी को 'डिप्लोमैटिक इम्युनिटी' नहीं मिल सकती। 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने काराकस में ऑपरेशन चलाकर मादुरो को पकड़ा, जिसे अमेरिका ने 'कानून प्रवर्तन कार्रवाई' (Law Enforcement Operation) करार दिया है।

अमेरिका की असली ताकत: सीधी नहीं, पर प्रभावी

अमेरिकी राष्ट्रपति भले ही हर किसी को गिरफ्तार न कर सकें, लेकिन उनके पास दबाव बनाने के कई बड़े हथियार हैं:

  • आर्थिक प्रतिबंध: किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाना।
  • संपत्ति फ्रीज करना: विदेशी नेताओं के अमेरिकी बैंकों में रखे पैसे जब्त करना।
  • अंतरराष्ट्रीय अलगाव: कूटनीतिक रास्तों से किसी देश को दुनिया से अलग-थलग कर देना।

इस पूरी जानकारी से निष्कर्ष यह निकलता है कि मादुरो की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए एक बड़ी चुनौती है। जहाँ रूस और चीन इसे 'संप्रभुता पर हमला' बता रहे हैं, वहीं अमेरिका इसे 'न्याय' कह रहा है। भविष्य में यह घटना तय करेगी कि क्या अब कोई भी ताकतवर देश दूसरे देश के नेता को अपराधी बताकर उठा सकता है।

  


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News Editor

Radhika

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