रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका: ट्रंप ने नए कड़े कानून पर किए दस्तखत
punjabkesari.in Saturday, Sep 19, 2026 - 06:46 AM (IST)
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले एक नए कानून को मंजूरी दे दी है। इस कानून के तहत अमेरिकी प्रशासन को उन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का व्यापक अधिकार मिल गया है जो रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदते हैं। इस कदम का सीधा असर भारत और चीन जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ सकता है।
30 दिनों के भीतर फैसला लेने का प्रावधान
नए कानून के मुताबिक, अमेरिका राष्ट्रपति को उन 5 सबसे बड़े देशों से आयात होने वाले सामान पर 30 दिनों के भीतर 100% तक टैरिफ लगाना होगा जो रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीद रहे हैं या प्रतिबंधों से बचने में मॉस्को की मदद कर रहे हैं। हालांकि, कानून में किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिखा गया है और न ही टाॅप 5 देशों के चयन का तरीका साफ है। इससे ट्रंप प्रशासन को यह तय करने की पूरी छूट मिल गई है कि किस देश को निशाना बनाया जाए।
बता दें कि भारत और चीन रूस से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हैं, लेकिन कानून में किसी खास देश का नाम नहीं लिया गया है और न ही यह साफ तौर पर बताया गया है कि टाॅप पांच देशों की लिस्ट कैसे तय की जाएगी। इससे ट्रंप प्रशासन को यह तय करने की काफी छूट मिलती है कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है।
इसलिए, नए कानून से अमेरिका आने वाले भारतीय सामान पर भारी टैरिफ लगने का रास्ता साफ हो सकता है, हालांकि इसका तुरंत क्या असर होगा, यह अभी साफ नहीं है। रॉयटर्स के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि ट्रंप ऐसे कदम उठाने से हिचकिचा सकते हैं जिनसे नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले कंज्यूमर कीमतें और एनर्जी की लागत बढ़ सकती है।
भारत पर असर?
इस कानून को लेकर चिंताएं इसलिए पैदा हुई हैं क्योंकि यह साफ नहीं है कि आखिर किन देशों को निशाना बनाया जा सकता है। नेशनल फॉरेन ट्रेड काउंसिल की वाइस प्रेसिडेंट जेनेट चू ने कहा कि किन देशों पर टैरिफ लग सकता है, इस बारे में अलग-अलग राय है, चर्चा में भारत, ब्राज़ील, जापान और यूरोपीय संघ के देश शामिल हैं।
भारत/चीन की प्रतिक्रिया
भारत ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी टैरिफ से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं चीन ने इस कानून को "लॉन्ग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन" बताते हुए कहा कि इसका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है। इस कानून के आलोचकों का तर्क है कि इसकी व्यापक भाषा राष्ट्रपति को बहुत ज़्यादा अधिकार देती है। वकील लॉरा ब्रैंक ने कहा कि राष्ट्रपति को मिले व्यापक अधिकारों के कारण इस शक्ति का दुरुपयोग हो सकता है।
ट्रम्प ने 80 से ज़्यादा देशों पर 50% तक टैरिफ़ लगाए
बता दें कि जनवरी 2025 में पद संभालने के बाद से, ट्रम्प ने 80 से ज़्यादा देशों पर 50% तक टैरिफ़ लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनमें से कई उपायों को रद्द कर दिया है और कहा है कि ट्रम्प ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया था। नए कानून के तहत लगाए गए टैरिफ़ को कानूनी रूप से चुनौती देना ज़्यादा मुश्किल हो सकता है क्योंकि कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से इन शुल्कों को मंज़ूरी दी है।
